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बस्तर के बकावंड में ‘जल अर्पण दिवस’ की धूम: 5 गांवों के ग्रामीणों ने लिया जल संरक्षण का महासंकल्प






बस्तर के बकावंड में जल अर्पण दिवस की धूम: 5 गांवों के ग्रामीणों ने लिया जल संरक्षण का संकल्प, डबरी और सोख्ता गड्ढों पर विशेष जोर


बस्तर के बकावंड में ‘जल अर्पण दिवस’ की धूम: पांच गांवों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर लिया जल संरक्षण का महासंकल्प, जागरूकता रैली से गूंजा इलाका

प्रकाशन स्थल: बकावंड (बस्तर) |
श्रेणी: क्षेत्रीय समाचार / विकास एवं पर्यावरण

बकावंड (बस्तर)। छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य बस्तर जिले से सामुदायिक सहभागिता और पर्यावरण संरक्षण की एक बेहद खूबसूरत और अनुकरणीय तस्वीर सामने आई है। जिले के विकासखंड बकावंड के अंतर्गत आने वाले पांच प्रमुख ग्रामों- जैतगिरी, सरगीपाल, गिरोला, डुरकाबेड़ा और बदलावंड में विगत दिवस ‘जल अर्पण दिवस’ पूरे उत्साह, उमंग और प्रतिबद्धता के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर इन क्षेत्रों के ग्रामीणों ने अभूतपूर्व एकजुटता दिखाते हुए जल संरक्षण एवं पानी बचाओ अभियान को अपने जीवन का हिस्सा बनाने और इसे पूरी तरह सफल करने के लिए सक्रिय सहभागिता निभाने का सामूहिक संकल्प लिया।

मुख्य आकर्षण: इस पूरे आयोजन के दौरान न केवल सरकारी निर्देशों का पालन हुआ, बल्कि ग्रामीणों ने खुद आगे आकर पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने और घरों से निकलने वाले अपशिष्ट जल (ग्रे-वाटर) के सही प्रबंधन के लिए कई कड़े और व्यावहारिक निर्णय लिए।

वर्षा जल संचयन के लिए पारंपरिक और आधुनिक तकनीकों का संगम

कार्यक्रम के दौरान आयोजित ग्राम सभाओं और चौपालों में ग्रामीणों ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि समय पर वर्षा जल का संचयन न होने के कारण भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आने वाले समय में क्षेत्र के भीतर बड़े पैमाने पर डबरी (छोटे तालाब) एवं नए तालाबों का निर्माण कराया जाएगा।

इसके साथ ही, जो पुराने तालाब और पारंपरिक जल स्रोत देखरेख के अभाव में सिल्ट (मिट्टी) से भर गए हैं, उनकी गाद निकालकर उन्हें फिर से पानी रोकने के लायक बनाया जाएगा। ग्रामीणों का मानना है कि डबरी निर्माण से न केवल मवेशियों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, बल्कि कृषि कार्यों के लिए भी स्थानीय स्तर पर सिंचाई के साधन सुलभ हो सकेंगे।

घरेलू अपशिष्ट जल का प्रबंधन: सोख्ता गड्ढा और बाड़ी विकास योजना

जल अर्पण दिवस के मौके पर जिन पांच महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई, उनमें पेयजल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखना और घरों से निकलने वाले पानी का दोबारा उपयोग करना शामिल था। ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि:

  • सोख्ता गड्ढों का निर्माण: गांवों में जितने भी सार्वजनिक हैंडपंप, कुएं या नल कनेक्शन हैं, उनके आसपास पानी को जमा होने से रोकने के लिए सोख्ता गड्ढों (सोक पिट) का निर्माण किया जाएगा। इससे गंदगी नहीं फैलेगी और मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियों पर लगाम लगेगी।
  • किचन गार्डन (बाड़ी) का विकास: घरों में बर्तन धोने, कपड़े साफ करने और नहाने के बाद निकलने वाले पानी को बेकार बहने देने या गलियों में कीचड़ बनाने के बजाय, उसे सीधे घरों के पीछे बनी साग-सब्जी की बाड़ी में मोड़ा जाएगा। इससे परिवारों को ताजी और जैविक सब्जियां भी मिलेंगी और पानी का सदुपयोग भी होगा।

महिला जल वाहिनी की सक्रियता: जागरूकता रैली से जगाया अलख

इस पूरे महाअभियान की रीढ़ की हड्डी के रूप में ‘महिला जल वाहिनी’ की सदस्य उभरकर सामने आईं। इन महिलाओं ने गांवों में गृहणियों और युवाओं को जल के आर्थिक और सामाजिक महत्व से अवगत कराया। महिलाओं का मानना है कि पानी की सबसे ज्यादा जरूरत और उसकी किल्लत का सामना घर की महिलाओं को ही करना पड़ता है, इसलिए इस अभियान की कमान भी उनके हाथों में होनी चाहिए।

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जैतगिरी से लेकर बदलावंड तक, सभी पांचों ग्रामों में महिला जल वाहिनी के नेतृत्व में भव्य जन जागरूकता रैली निकाली गई। रैली में शामिल बच्चे, युवा और बुजुर्ग हाथों में तख्तियां थामे हुए थे, जिन पर जल संरक्षण, पौधरोपण और स्वच्छता से जुड़े प्रेरक नारे लिखे थे। “पानी बचाओ-जीवन बचाओ” और “जल है तो कल है” के नारों से पूरा बकावंड क्षेत्र गूंज उठा।

विशेषज्ञ मार्गदर्शन: आईईसी ज्योत्सना सूना ने दी तकनीकी और व्यावहारिक समझाइश

इस बेहद महत्वपूर्ण अवसर पर जल जीवन मिशन की आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार) विशेषज्ञ ज्योत्सना सूना विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने ग्रामीणों को बहुत ही सरल और स्थानीय भाषा में जल के वास्तविक महत्व के बारे में विस्तार से तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी दी।

ज्योत्सना सूना ने अपने संबोधन में निम्नलिखित मुख्य बातों पर विशेष समझाइश दी और ग्रामीणों को प्रेरित किया:

1. शुद्ध पेयजल का महत्व और जल जनित बीमारियां

उन्होंने बताया कि अशुद्ध पानी पीने से डायरिया, पीलिया और पेट की गंभीर बीमारियां होती हैं। इसलिए पानी को हमेशा ढककर रखना चाहिए और साफ बर्तन का उपयोग करना चाहिए। जल स्रोतों के 10 मीटर के दायरे में किसी भी तरह की गंदगी, कचरा या मवेशियों का जमावड़ा नहीं होना चाहिए।

2. नियमित जल कर (वॉटर टैक्स) का भुगतान

जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक नल से जल पहुंचाया जा रहा है। इस व्यवस्था को सुचारू और दीर्घकालिक रूप से चालू रखने के लिए स्थानीय स्तर पर नियमित जल कर का भुगतान बेहद जरूरी है। इससे ग्राम पंचायतें नलों और पाइपलाइनों की समय पर मरम्मत करा सकेंगी।

3. पौधरोपण और उनकी देखरेख

केवल पौधे लगाना काफी नहीं है, बल्कि उन्हें जीवित रखना हमारी जिम्मेदारी है। ज्योत्सना सूना ने ग्रामीणों को प्रेरित किया कि वे अपने जीवन के हर महत्वपूर्ण अवसर (जैसे बच्चों के जन्मदिन या त्योहारों) पर स्थानीय प्रजातियों के छायादार और फलदार पौधे लगाएं और उनके चारों ओर ट्री-गार्ड लगाकर उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लें।

पांचों ग्रामों के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की अनुकरणीय उपस्थिति

सामुदायिक सहभागिता के इस अनूठे मॉडल को सफल बनाने में स्थानीय पंचायत प्रशासन का पूरा सहयोग मिला। इस कार्यक्रम में जैतगिरी, सरगीपाल, गिरोला, डुरकाबेड़ा और बदलावंड के सरपंच, उपसरपंच, पंच, वार्ड सदस्य और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण महिला-पुरुष उपस्थित रहे।

पंचायतों के जनप्रतिनिधियों ने मंच से घोषणा की कि वे अपनी आगामी 15वें वित्त आयोग की राशियों और मनरेगा (MGNREGA) के अभिसरण से गांवों में जल संरक्षण के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति प्रदान करेंगे।

बकावंड की इस पहल का जिला स्तर पर प्रभाव

प्रशासनिक हलकों में भी बकावंड विकासखंड के इन पांच गांवों की इस सामूहिक पहल की सराहना की जा रही है। बस्तर जैसे आदिवासी अंचल में, जहां प्राकृतिक संसाधन प्रचुर मात्रा में हैं, वहां इस प्रकार की जागरूकता यह दर्शाती है कि ग्रामीण अब अपने जल अधिकारों और जल सुरक्षा को लेकर कितने गंभीर हो चुके हैं। यह पहल निश्चित रूप से जिले के अन्य विकासखंडों के लिए भी एक मार्गदर्शक और सशक्त उदाहरण के रूप में कार्य करेगी।

आयोजन की संक्षिप्त विवरण तालिका (At a Glance)

क्रमांक शामिल ग्राम पंचायतें प्रमुख स्वीकृत गतिविधियां मुख्य हितधारक / प्रतिभागी
01 जैतगिरी डबरी निर्माण, सोख्ता गड्ढा, जागरूकता रैली सरपंच, महिला जल वाहिनी, स्थानीय ग्रामीण
02 सरगीपाल तालाब गहरीकरण, किचन गार्डन संवर्धन पंचायती राज पदाधिकारी, युवा समूह
03 गिरोला जल कर भुगतान संकल्प, हैंडपंप स्वच्छता महिला समूह, जल जीवन मिशन आईईसी टीम
04 डुरकाबेड़ा व्यापक पौधरोपण, जल सुरक्षा योजना ग्राम सभा सदस्य, बुजुर्ग और बच्चे
05 बदलावंड ग्रे-वाटर मैनेजमेंट, सोक पिट निर्माण स्थानीय जनप्रतिनिधि, कृषक समूह


बकावंड विकासखंड में मनाया गया ‘जल अर्पण दिवस’ केवल एक दिवसीय रस्म अदायगी नहीं था, बल्कि यह बस्तर के ग्रामीण अंचलों में जल आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया गया एक ऐतिहासिक कदम है। जब तक समुदाय स्वयं पानी की हर बूंद की कीमत नहीं समझेगा, तब तक कोई भी मिशन पूरी तरह सफल नहीं हो सकता। ज्योत्सना सूना और महिला जल वाहिनी के प्रयासों ने ग्रामीणों के भीतर उस जिम्मेदारी की भावना को जगा दिया है।


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