दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया का गरियाबंद प्रवास: आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष संवाद
छत्तीसगढ़ राज्य के गरियाबंद जिले में सामाजिक उत्थान और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम संपन्न हुआ। दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम रायपुर के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया ने अपने आधिकारिक जिला प्रवास के दौरान क्षेत्र के दिव्यांग जनों से सीधा संवाद स्थापित किया। इस विशेष भेंट का मुख्य उद्देश्य धरातल पर शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करना, दिव्यांगजनों की वास्तविक समस्याओं को समझना और उनके स्थायी कल्याण के लिए नए अवसरों की तलाश करना था।
संवाद कार्यक्रम के दौरान लोकेश कावड़िया ने समाज के इस महत्वपूर्ण हिस्से को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य शासन द्वारा संचालित स्वरोजगार एवं आर्थिक सशक्तिकरण की योजनाएं केवल कागजी प्रावधान नहीं हैं, बल्कि यह दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक मजबूत जरिया हैं। उन्होंने सभी उपस्थित नागरिकों को प्रेरित किया कि वे इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और समाज में एक आत्मनिर्भर उद्यमी के रूप में अपनी पहचान स्थापित करें।
ऋणमुक्त हितग्राहियों का भव्य सम्मान और सराहना
इस प्रवास कार्यक्रम का एक सबसे प्रेरणादायक और गौरवपूर्ण क्षण वह रहा, जब निगम से वित्तीय सहायता प्राप्त कर अपने पैर पर खड़े होने वाले सफल उद्यमियों को सम्मानित किया गया। यह वे हितग्राही थे जिन्होंने निगम से ऋण प्राप्त कर न केवल अपने व्यवसाय को सफलतापूर्वक स्थापित किया, बल्कि ईमानदारी और अनुशासन का परिचय देते हुए समय सीमा के भीतर अपने पूरे ऋण की अदायगी भी सुनिश्चित की।
सफलतापूर्वक ऋणमुक्त होने वाले इन कर्मठ नागरिकों में ताम्रध्वज साहू, धर्मेन्द्र उईके, अंबिका शर्मा और कल्पना भोसले शामिल हैं। अध्यक्ष लोकेश कावड़िया ने इन सभी सफल हितग्राहियों को मंच पर आमंत्रित कर प्रतीक चिन्ह भेंट किया और उनकी इस अनुकरणीय सफलता के लिए उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इन चारों नागरिकों ने यह साबित कर दिया है कि यदि हौसला बुलंद हो और इरादे नेक हों, तो कोई भी शारीरिक या आर्थिक बाधा प्रगति का रास्ता नहीं रोक सकती।
| क्रमांक | सम्मानित हितग्राही का नाम | उपलब्धि | प्रेरणा संदेश |
|---|---|---|---|
| 1 | ताम्रध्वज साहू | सफलतापूर्वक ऋण की पूर्ण अदायगी | व्यवसाय विस्तार और समय पर पुनर्भुगतान |
| 2 | धर्मेन्द्र उईके | सफलतापूर्वक ऋण की पूर्ण अदायगी | वित्तीय अनुशासन और आत्मनिर्भरता |
| 3 | अंबिका शर्मा | सफलतापूर्वक ऋण की पूर्ण अदायगी | महिला उद्यमिता और आर्थिक स्वतंत्रता |
| 4 | कल्पना भोसले | सफलतापूर्वक ऋण की पूर्ण अदायगी | स्वरोजगार से परिवार को आर्थिक संबल |
इन हितग्राहियों के प्रयासों की सराहना करते हुए अध्यक्ष ने कार्यक्रम में उपस्थित अन्य सभी ऋण प्राप्तकर्ताओं और नए आवेदकों से भी अपील की कि वे इस सफलता की कहानी से सीख लें। उन्होंने समयबद्ध ऋण अदायगी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब एक लाभार्थी समय पर ऋण चुकाता है, तो वह राशि बैंक या निगम के कोष में वापस आकर किसी अन्य जरूरतमंद भाई-बहन के काम आती है। इसलिए समय पर ऋण लौटाना एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य भी है।
मुख्यधारा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं दिव्यांगजन
अपने विस्तृत संबोधन में लोकेश कावड़िया ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि दिव्यांगजन हमारे समाज की मुख्यधारा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अभिन्न हिस्सा हैं। उन्हें किसी भी स्तर पर समाज से अलग या कमजोर नहीं समझा जाना चाहिए। राज्य शासन और दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम मिलकर उनके सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर नई योजनाओं का निर्माण और क्रियान्वयन कर रहे हैं।
उन्होंने आगे बताया कि निगम द्वारा कम ब्याज दरों पर व्यवसाय शुरू करने, छोटे उद्योग स्थापित करने, कृषि आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने और तकनीकी कौशल विकास के लिए ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इन योजनाओं का सरलीकरण किया गया है ताकि किसी भी आवेदक को प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण भटकना न पड़े।
प्रशासनिक सहयोग और कलेक्टर का आह्वान
इस गरिमामय कार्यक्रम में प्रशासनिक अमले की उपस्थिति ने इस बात को रेखांकित किया कि जिला प्रशासन भी इस वर्ग के कल्याण के लिए पूरी तरह संवेदनशील है। कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित कलेक्टर बी.एस. उईके ने सभी ऋण मुक्त हुए हितग्राहियों को उनकी इस बड़ी सफलता पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने इन चारों सफल नागरिकों को आगामी भविष्य में और अधिक ऊंचाइयों को छूने और अपने व्यापार को और बड़ा बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
कलेक्टर बी.एस. उईके ने जिले के प्रशासनिक परिदृश्य और वित्तीय अनुशासन पर चर्चा करते हुए एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने सम्मानित हुए हितग्राहियों से आग्रह किया कि वे समाज में एक ‘चेंज मेकर’ या दूत की भूमिका निभाएं। कलेक्टर ने कहा कि आपके आस-पास ऐसे कई साथी दिव्यांगजन हो सकते हैं जिन्होंने ऋण राशि तो ली है, लेकिन किन्हीं कारणों से या जागरूकता की कमी से वे इसे समय पर जमा नहीं कर पा रहे हैं। आपको ऐसे साथियों से मिलकर उन्हें समझाना चाहिए और ऋण राशि जमा कर ऋणमुक्ति का सम्मान प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
योजनाओं की विस्तृत जानकारी और सीधा संवाद
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें समाज कल्याण विभाग और निगम के अधिकारियों द्वारा उपस्थित जनसमुदाय को विभिन्न शासकीय कल्याणकारी योजनाओं की बिंदुवार और विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों पर प्रकाश डाला गया:
- कम ब्याज दर वाले स्वरोजगार ऋण: लघु व्यवसाय, किराना दुकान, सिलाई-कढ़ाई केंद्र, और मोबाइल रिपेयरिंग जैसी दुकानों के लिए वित्तीय सहायता।
- कौशल उन्नयन प्रशिक्षण: युवाओं को आधुनिक तकनीकी और व्यावसायिक कार्यों में दक्ष बनाने के लिए निशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम।
- सहायक उपकरण वितरण: मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र और अन्य उपकरणों के लिए पात्रता और आवेदन की प्रक्रिया।
- पेंशन एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाएं: राज्य और केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशनों की वर्तमान स्थिति।
इस दौरान एक खुला मंच भी आयोजित किया गया जहां दिव्यांगजनों ने अपनी व्यक्तिगत और सामूहिक समस्याओं को अधिकारियों के समक्ष रखा। कई हितग्राहियों ने ऋण आवेदन की प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाने के सुझाव दिए, जिन्हें अध्यक्ष और उपस्थित अधिकारियों ने बेहद संजीदगी से नोट किया। उपस्थित कई पुराने हितग्राहियों ने मंच पर आकर अपने अनुभव भी साझा किए और बताया कि किस तरह निगम के सहयोग से आज वे सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति और सहभागिता
इस महत्वपूर्ण संवाद और सम्मान समारोह के अवसर पर जिले के आला प्रशासनिक अधिकारी और विभागीय प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इनमें मुख्य रूप से जिला पंचायत के सीईओ प्रखर चन्द्राकर, निगम के प्रबंध संचालक पंकज वर्मा, और समाज कल्याण विभाग के उप संचालक डी.पी. ठाकुर शामिल थे।
इन सभी अधिकारियों ने कार्यक्रम के सफल संचालन में अपनी भूमिका निभाई और दिव्यांगजनों को आश्वस्त किया कि गरियाबंद जिला प्रशासन उनकी हर समस्या के त्वरित निराकरण के लिए हमेशा तत्पर रहेगा। समाज कल्याण विभाग के कर्मचारियों और फील्ड स्टाफ ने भी इस आयोजन को सफल बनाने में अपना बहुमूल्य योगदान दिया, जिससे जिले के दूर-दराज के क्षेत्रों से आए नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और हितग्राहियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। इस प्रवास और संवाद कार्यक्रम ने निश्चित रूप से गरियाबंद जिले के दिव्यांगजनों के भीतर एक नई ऊर्जा, आत्मनिर्भरता का संकल्प और आगे बढ़ने का एक नया हौसला फूंकने का काम किया है।










