विशाल समाचार कवरेज: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का सरगुजा प्रवास, रामगढ़ में भगवान श्री राम की प्रतिमा को किया नमन, ‘एक पेड़ माँ के नाम 3.0’ के तहत रोपा रुद्राक्ष
अम्बिकापुर: छत्तीसगढ़ के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज अपने एक दिवसीय सरगुजा प्रवास के दौरान विकासखंड उदयपुर के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल रामगढ़ पहुंचे। रामगढ़ के वन विभाग के विश्राम गृह (फॉरेस्ट रेस्ट हाउस) परिसर में नवनिर्मित ‘राम वाटिका’ में मुख्यमंत्री ने कदम रखते ही सबसे पहले वहां स्थापित मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की भव्य प्रतिमा के दर्शन किए। मुख्यमंत्री ने पूर्ण विधि-विधान और भक्तिभाव के साथ भगवान श्री राम की प्रतिमा को नमन किया, आरती उतारी और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस पावन अवसर पर उन्होंने प्रभु श्री राम से समस्त छत्तीसगढ़वासियों के जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और उत्तम स्वास्थ्य की मंगल कामना की।
इस आध्यात्मिक शुरुआत के तुरंत बाद मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पर्यावरण संरक्षण और मातृत्व शक्ति को सम्मान देने वाले महा-अभियान ’’एक पेड़ माँ के नाम 3.0’’ का शुभारंभ किया। उन्होंने इस अभियान के अंतर्गत राम वाटिका परिसर में अत्यंत पवित्र माने जाने वाले रुद्राक्ष के पौधे का रोपण किया। मुख्यमंत्री ने खुद अपने हाथों से मिट्टी और पानी देकर इस पौधे को सींचा और समाज को प्रकृति के संवर्धन का एक मजबूत संदेश दिया।
– श्री विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
‘एक पेड़ माँ के नाम 3.0’: पर्यावरण और मातृत्व का अनूठा संगम
संवाददाताओं और वहां उपस्थित विशाल जनसमुदाय को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस दूरदर्शी अभियान की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि धरती को हम ‘धरती माता’ कहते हैं और जो जन्म देती है, वह हमारी जन्मदात्री माँ है। इस अभियान के माध्यम से हम इन दोनों माताओं के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित कर रहे हैं। माँ के नाम पर लगाया गया हर एक पौधा आने वाले समय में एक विशाल वटवृक्ष बनेगा, जो न केवल पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में एक सार्थक और मिल का पत्थर साबित होगा, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, सुंदर और हरित भविष्य की सुदृढ़ आधारशिला भी रखेगा।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि आज वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर चुनौतियां हमारे सामने खड़ी हैं। बेमौसम बरसात, अत्यधिक गर्मी और प्राकृतिक आपदाएं प्रकृति के असंतुलन का परिणाम हैं। इन चुनौतियों का सामना करने का एकमात्र और सबसे प्रभावी उपाय बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करना है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के प्रत्येक नागरिक, युवा, महिला और छात्र-छात्राओं से भावुक अपील करते हुए आह्वान किया कि वे इस मानसून के सीजन में अपनी माँ के नाम पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं। इसके साथ ही उन्होंने सिर्फ पौधा लगाने तक सीमित न रहने, बल्कि उसके जीवित रहने, उसके संरक्षण और संवर्धन का भी कड़ा संकल्प लेने की बात कही ताकि प्रकृति का संतुलन सदैव बना रहे।
प्रभु श्री राम का जीवन मानवता का शाश्वत प्रकाश स्तंभ
रामगढ़ की पावन धरा, जिसका संबंध त्रेतायुग से और महाकवि कालिदास की अमर कृति ‘मेघदूतम’ से माना जाता है, वहां भगवान श्री राम की प्रतिमा को नमन करते हुए मुख्यमंत्री भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम का पूरा जीवन मर्यादा, सत्य, अद्वितीय त्याग और कठोर कर्तव्यपरायणता का एक अनुपम और सर्वोच्च आदर्श है। राम का चरित्र किसी एक कालखंड या समाज के लिए नहीं, बल्कि युगों-युगों से समस्त मानवता का मार्गदर्शन करता आ रहा है और आगे भी करता रहेगा।
मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमुदाय को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें केवल राम का नाम नहीं लेना है, बल्कि राम के काम और उनके बताए गए आदर्शों को अपने जीवन में उतारना है। प्रभु श्री राम द्वारा प्रशस्त किए गए सत्य और सेवा के मार्ग पर चलते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति की मदद करना ही सच्ची राम सेवा है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे सेवा, आपसी सद्भाव, भाईचारे और राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण के भाव से ओतप्रोत होकर छत्तीसगढ़ और भारत देश के उत्थान में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं।
मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
रामगढ़ के इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के साथ राज्य मंत्रिमंडल के प्रमुख सदस्य और क्षेत्र के लोकप्रिय जनप्रतिनिधि भी कंधे से कंधा मिलाकर उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, कृषि एवं आदिम जाति कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया और सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया।
उनके अलावा लुण्ड्रा विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री प्रबोध मिंज, सीतापुर के विधायक श्री रामकुमार टोप्पो, सरगुजा संभाग के विभिन्न नगरीय निकायों और त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ भाजपा नेता और भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण एवं वनवासी भाई-बहन उपस्थित थे। प्रशासनिक स्तर पर सरगुजा संभाग के कमिश्नर, पुलिस महानिरीक्षक (IG), सरगुजा के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (SP) और वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक (CCF) सहित तमाम आला अधिकारी व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने के लिए मुस्तैद रहे।
सरगुजा संभाग के विकास को मिलेगी नई गति
अपने प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरगुजा अंचल का विकास उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। रामगढ़ को एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए रोडमैप तैयार किया जा रहा है। कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि आदिम संस्कृति और वनों से आच्छादित इस क्षेत्र में ‘एक पेड़ माँ के नाम 3.0’ अभियान के तहत लाखों फलदार और औषधीय पौधे लगाए जाएंगे, जिससे स्थानीय आदिवासियों की आजीविका में सुधार होगा। वहीं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने भरोसा दिलाया कि रामगढ़ की ‘राम वाटिका’ और यहाँ के ऐतिहासिक स्थलों को देश के मानचित्र पर प्रमुखता से उभारा जाएगा।
मुख्य आकर्षण और कार्यक्रम के मुख्य बिंदु:
- रुद्राक्ष का रोपण: मुख्यमंत्री द्वारा पर्यावरण संतुलन और आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक के रूप में अत्यंत दुर्लभ और पवित्र रुद्राक्ष के पौधे का रोपण किया गया।
- राम वाटिका का निरीक्षण: मुख्यमंत्री ने फॉरेस्ट रेस्ट हाउस परिसर में नव-विकसित राम वाटिका का अवलोकन किया और वन विभाग के कार्यों की सराहना की।
- जनता से सीधा संवाद: मुख्यमंत्री ने उदयपुर विकासखंड के दूर-दराज के गांवों से आए ग्रामीणों और वनाश्रित परिवारों से मुलाकात की, उनकी समस्याएं सुनीं और त्वरित निराकरण के निर्देश दिए।
- हरित छत्तीसगढ़ का संकल्प: पूरे सरगुजा संभाग में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तीसरे चरण को जन-आंदोलन बनाने की घोषणा की गई।
अम्बिकापुर और संपूर्ण सरगुजा जिले के लिए 30 जून 2026 का यह दिन बेहद ऐतिहासिक रहा, जहां सूबे के मुखिया ने सीधे जमीन पर उतरकर प्रकृति की रक्षा और अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने का संदेश दिया। रामगढ़ की वादियों से उठी यह गूंज निश्चित रूप से पूरे छत्तीसगढ़ को हरा-भरा बनाने और नागरिकों में कर्तव्यबोध की भावना जगाने में मील का पत्थर साबित होगी। मुख्यमंत्री का यह सरगुजा प्रवास केवल एक शासकीय दौरा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्रगति, हरियाली और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का एक नया सवेरा लेकर आया है।










