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छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड: गरियाबंद में 53 शिल्पियों को मिली वित्तीय सहायता और आधुनिक उपकरण






गरियाबंद: हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत ने शिल्पियों को बांटे चेक और टूल किट्स, आत्मनिर्भरता पर दिया जोर


विकास और आत्मनिर्भरता

गरियाबंद: पारंपरिक कला को नई उड़ान, हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत ने शिल्पियों को सौंपे चेक और आधुनिक टूल किट

प्रदेश खबर नेटवर्क | गरियाबंद
प्रकाशित: 01 जुलाई 2026

समाचार के मुख्य अंश (Highlights)

  • भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की सीएचसीडीएस (CHCDS) योजना के तहत हुआ भव्य कार्यक्रम।
  • गरियाबंद जिले के 33 हितग्राहियों को औजार और उपकरण खरीदने के लिए मिली स्वीकृत राशि।
  • अन्य जिलों के 20 शिल्पियों को बेहतरीन कार्य के लिए आधुनिक उपकरण टूल्स किट प्रदान किए गए।
  • शिल्पियों ने उठाई मांग: डोंगरीगांव बांस शिल्प परियोजना मार्ग के पक्कीकरण और धमतरी में जूट शिल्प प्रशिक्षण की आवश्यकता जताई।

गरियाबंद, 01 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक और पारंपरिक हस्तशिल्प कला को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने तथा स्थानीय ग्रामीण शिल्पियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) की व्यापक हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना यानी सीएचसीडीएस (CHCDS) के अंतर्गत गरियाबंद में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस गरिमामयी कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत (राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त) मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कलाओं को सहेजने वाले ग्रामीण और जनजातीय शिल्पियों की सराहना करते हुए जिले के 33 चयनित हितग्राहियों को उन्नत औजार एवं उपकरण क्रय करने के लिए स्वीकृत राशि के चेक सीधे वितरित किए। इसके साथ ही, कार्यक्रम में अन्य जिलों से पहुंचे 20 विशिष्ट शिल्पियों को उनकी कला को गति देने के लिए आधुनिक उपकरण टूल्स किट भी सौंपे गए।

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शिल्पियों से सीधा संवाद: अध्यक्ष ने जानीं जमीनी समस्याएं

चेक और टूल किट वितरण के बाद बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत ने कार्यक्रम में उपस्थित बड़ी संख्या में आए शिल्पियों और कारीगरों से सीधे वन-टू-वन संवाद किया। उन्होंने शिल्पियों से उनके काम-काज, बाजार की उपलब्धता, कच्चे माल की समस्या और दैनिक जीवन में आने वाली अन्य आवश्यकताओं की विस्तृत जानकारी ली।

संवाद के दौरान गरियाबंद जिले के स्थानीय शिल्पियों ने अपनी एक प्रमुख बुनियादी समस्या को प्रमुखता से उनके समक्ष रखा। शिल्पियों ने बताया कि बांस शिल्प परियोजना डोंगरीगांव तक पहुंचना और निर्मित उत्पादों को मुख्य बाजार तक लाना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने आवागमन को सुगम और बारहमासी बनाने के लिए पारागांव से डोंगरीगांव मार्ग के पक्कीकरण (डामरीकरण) की मांग रखी।

वहीं दूसरी ओर, पड़ोसी जिले धमतरी से आए शिल्पियों ने अपनी कला को और निखारने के लिए स्थानीय स्तर पर एक सुसज्जित कार्यशाला भवन (Workshop Shed) के निर्माण और महिलाओं तथा युवाओं के लिए विशेष रूप से जूट शिल्प प्रशिक्षण (Jute Craft Training) कार्यक्रम शुरू करने का आग्रह किया।

“शासन की कल्याणकारी और क्लस्टर आधारित योजनाओं का मुख्य उद्देश्य हमारी पारंपरिक हस्तशिल्प धरोहर को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ जमीनी स्तर पर काम कर रहे शिल्पियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है। शिल्पियों को जो राशि प्राप्त हुई है, उससे वे आधुनिक तकनीक वाले औजार खरीदें ताकि उनके जॉबवर्क और उत्पादन की गुणवत्ता अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो सके।”
– शालिनी राजपूत, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड

गुणवत्ता और फिनिशिंग बढ़ाने पर विशेष जोर

शिल्पियों को प्रेरित करते हुए शालिनी राजपूत ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी बाजार में किसी भी उत्पाद की सफलता उसकी फिनिशिंग और विशिष्टता पर निर्भर करती है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर यदि शिल्पी आधुनिक टूल्स का उपयोग करेंगे, तो कम समय में अधिक और बेहतर उत्पादन संभव होगा। इससे न केवल उनके उत्पादों की मांग महानगरों और प्रदर्शनियों में बढ़ेगी, बल्कि उनके परिवारों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि शिल्पियों द्वारा रखी गई बुनियादी मांगों और अधोसंरचना विकास के प्रस्तावों पर बोर्ड अत्यंत सहानुभूतिपूर्वक और तेजी से विचार करेगा।

वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड के मुख्य महाप्रबंधक एस.एल. धुर्वे विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने बोर्ड द्वारा शिल्पियों के विपणन (मार्केटिंग) और ‘शबरी एम्पोरियम’ के माध्यम से दिए जा रहे देशव्यापी मंच की जानकारी दी।

इसके अलावा, कार्यक्रम में हस्तशिल्प विकास बोर्ड के पूर्व प्रबंधक एच.बी. अंसारी, गरियाबंद जिले के सहायक प्रबंधक रामवृक्ष नेताम सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, स्थानीय त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और अंचल के सैकड़ों परंपरागत शिल्पकार, धातु शिल्पी, बांस शिल्पी और काष्ठ शिल्पी भारी संख्या में उपस्थित रहे। अधिकारियों ने हितग्राहियों को टूल किट के सही रखरखाव और उपयोग के तकनीकी गुर भी सिखाए।


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