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छत्तीसगढ़ कृषि आकस्मिक योजना: बलरामपुर में कम बारिश और अल-नीनो के प्रभाव से किसानों को बचाने प्रशासनिक पहल






बलरामपुर: कम वर्षा से निपटने कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने शुरू किया विशेष जन जागरूकता अभियान, कृषक सूचना रथ रवाना


बलरामपुर: कम वर्षा की चुनौती से निपटेंगे किसान, कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने कृषि आकस्मिक कार्ययोजना के तहत ‘कृषक सूचना रथ’ को दिखाई हरी झंडी

ब्यूरो रिपोर्ट: प्रदेश खबर नेटवर्क
स्थान: बलरामपुर (छत्तीसगढ़)
दिनांक: 1 जुलाई 2026

बलरामपुर। चालू खरीफ मौसम के दौरान छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल रहा है। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में सामान्य से कम वर्षा की स्थिति और वैश्विक स्तर पर अल-नीनो (El Niño) के संभावित विपरीत प्रभाव को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। स्थानीय कृषकों को खेती के सुरक्षित, वैज्ञानिक और वैकल्पिक उपायों के प्रति जागरूक करने के एक बड़े उद्देश्य के साथ जिले में ‘कृषि आकस्मिक कार्ययोजना’ (Agricultural Contingency Plan) और ‘विशेष जन जागरूकता अभियान’ का शंखनाद किया गया है।

इस महत्वपूर्ण राष्ट्र-हितैषी और किसान-कल्याणकारी अभियान की शुरुआत करते हुए बलरामपुर कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने संयुक्त जिला कार्यालय के प्रांगण में आयोजित एक गरिमामय समारोह में ‘कृषक सूचना रथ’ को हरी झंडी दिखाकर विभिन्न क्षेत्रों के लिए रवाना किया। इस विशेष रथ का मुख्य उद्देश्य सुदूर वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली फसलों और आधुनिक तकनीकों से अवगत कराना है ताकि विपरीत मौसम में भी उनकी आजीविका सुरक्षित रहे।

कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी का स्पष्ट संदेश: “मौसम की अनिश्चितता से घबराने के बजाय हमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण और व्यावहारिक कृषि तकनीकों को अपनाना होगा। हमारा लक्ष्य जिले के हर एक किसान तक पहुंचकर उन्हें जागरूक करना है ताकि कम वर्षा में भी वे बेहतर उत्पादन और अधिकतम लाभ कमा सकें।”

चार प्रमुख तहसीलों पर विशेष ध्यान: गांवों और हाट-बाजारों में लगेगा ‘कृषि चौपाल’

कृषि विभाग द्वारा तैयार की गई इस विशेष कार्ययोजना के तहत रवाना किया गया कृषक सूचना रथ जिले के उन क्षेत्रों पर विशेष फोकस करेगा जहां सिंचाई के पारंपरिक साधनों की कमी है या जो पूरी तरह वर्षा आधारित खेती पर निर्भर हैं। शुरुआती चरण में यह सूचना रथ जिले की चार प्रमुख तहसीलों के विभिन्न ग्रामों और स्थानीय ग्रामीण हाट-बाजारों का सघन भ्रमण करेगा:

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  • चांदो तहसील: दूरस्थ क्षेत्रों के आदिवासी बाहुल्य गांवों में सघन प्रचार-प्रसार।
  • चलगी तहसील: स्थानीय किसानों को कम अवधि की फसलों के प्रति प्रेरित करना।
  • रघुनाथनगर तहसील: उत्तर सीमावर्ती इलाकों में जल संरक्षण की नवीन विधाओं की जानकारी पहुंचाना।
  • राजपुर तहसील: मैदानी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के हाट-बाजारों में सघन जागरूकता शिविर।

इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल एकतरफा सूचना प्रसार माध्यम नहीं होगा। सूचना रथ के भ्रमण के दौरान कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के वैज्ञानिक भी मैदानी स्तर पर मौजूद रहेंगे। ये विशेषज्ञ विभिन्न गांवों में पहुंचकर ‘कृषि चौपाल’ का आयोजन करेंगे, जहां ग्रामीण किसानों से सीधा संवाद (Direct Interaction) स्थापित किया जाएगा और उनकी शंकाओं का मौके पर ही निवारण किया जाएगा।

कलेक्टर के कड़े निर्देश: अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचे अमला

अभियान की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग और राजस्व अमले के संबंधित अधिकारियों को कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी गांव या हाट-बाजार इस अभियान से अछूता नहीं रहना चाहिए। अधिकारी केवल कागजी खानापूर्ति न करें, बल्कि स्वयं मैदान में उतरकर चारों तहसीलों के अंतिम छोर पर बैठे किसान तक पहुंचें।

प्रशासन का मुख्य जोर इस बात पर है कि वर्तमान मौसम की परिस्थितियों के अनुरूप जो वैज्ञानिक तकनीकें प्रयोगशालाओं में सफल सिद्ध हुई हैं, उन्हें व्यावहारिक रूप से किसानों के खेतों तक स्थानांतरित किया जाए। इससे न केवल फसल का नुकसान रुकेगा, बल्कि लागत में कमी आने से किसानों की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ बनी रहेगी।

कृषि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की सलाह: फसल विविधीकरण ही सर्वोत्तम उपाय

संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने आकस्मिक योजना की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इन चौपालों और रथ के माध्यम से किसानों को मुख्य रूप से निम्नलिखित तकनीकी बिंदुओं पर मार्गदर्शन दिया जाएगा:

1. वैकल्पिक एवं कम पानी वाली फसलों का चयन

परंपरागत रूप से धान की ऐसी किस्में जो पकने में लंबा समय लेती हैं और जिन्हें अत्यधिक पानी की आवश्यकता होती है, उनके स्थान पर कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता देने की सलाह दी जा रही है। किसानों को धान के बदले मक्का, कोदो, कुटकी, रागी (मड़ुआ) जैसी लघु धान्य (मिलेट्स) फसलों के साथ-साथ अरहर, मूंग और उड़द जैसी दलहनी फसलें लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

2. नमी संरक्षण और उचित जल प्रबंधन

कम वर्षा की स्थिति में खेत की मिट्टी में मौजूद नमी को लंबे समय तक बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसके लिए वैज्ञानिकों द्वारा ‘मल्चिंग’ तकनीक, कतारबद्ध बोआई और जल संचयन के तरीके सिखाए जाएंगे। साथ ही उपलब्ध जल का वैज्ञानिक ढंग से उपयोग करने के लिए स्प्रिंकलर (ड्रिप) सिंचाई प्रणाली को अपनाने की बात कही गई है।

3. कम अवधि वाली फसलों की किस्में

यदि मानसून की बारिश में अधिक देरी होती है, तो किसानों को ऐसी फसलों की बोआई करनी चाहिए जो 90 से 100 दिनों के भीतर पककर तैयार हो जाती हैं। कृषि विभाग द्वारा ऐसी उन्नत बीजों की उपलब्धता और उन पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी (कृषक समृद्धि योजना) के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है।

मौके पर ही होगा समस्याओं का त्वरित समाधान

इस अभियान को बहुउपयोगी बनाने के लिए गांवों में आयोजित होने वाली कृषि चौपालों में एक समर्पित शिकायत निवारण और तकनीकी परामर्श डेस्क भी स्थापित की जा रही है। यहां किसान अपने खेतों की मिट्टी की जांच, कीट नियंत्रण, फसलों में लगने वाली बीमारियों और शासकीय कल्याणकारी योजनाओं जैसे ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ और ‘कृषक समृद्धि योजना’ के लाभ उठाने की प्रक्रिया के बारे में सीधे सवाल पूछ सकेंगे। वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को ऑन-द-स्पॉट (On-the-spot) तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक पर्चियां उपलब्ध कराई जाएंगी।

जिले में शुरू हुए इस विशेष अभियान की सराहना करते हुए स्थानीय प्रगतिशील किसानों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। उनका मानना है कि सही समय पर प्रशासन द्वारा दी जा रही यह व्यावहारिक जानकारी उन्हें सूखे या कम बारिश के संकट से उबरने में संबल प्रदान करेगी। कृषि विभाग को उम्मीद है कि इस व्यापक जन जागरूकता अभियान के माध्यम से बलरामपुर जिला विपरीत मौसमी परिस्थितियों के बावजूद कृषि उत्पादन के क्षेत्र में एक नया और अनुकरणीय मॉडल पेश करेगा।


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