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सलमान खान ‘काला हिरण’ फिल्म विवाद: दिल्ली हाई कोर्ट में अब 6 जुलाई को सुनवाई






सलमान खान ‘काला हिरण’ फिल्म विवाद: दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई 6 जुलाई को, मेकर्स ने कोर्ट में दिया बड़ा बयान


सलमान खान ‘काला हिरण’ फिल्म विवाद: दिल्ली उच्च न्यायालय ने तय की 6 जुलाई की तारीख, सेंसर बोर्ड को लेकर मेकर्स का बड़ा कदम

प्रदेश खबर नेटवर्क | अपडेटेड: 01 जुलाई 2026, 05:55 PM IST
नई दिल्ली: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सलमान खान की कानूनी मुश्किलें और विवाद एक बार फिर चर्चा में हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को अभिनेता सलमान खान की उस याचिका पर सुनवाई के लिए छह जुलाई की तारीख तय की है, जिसमें आगामी हिंदी फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लिगेसी’ (Kala Hiran: The Battle for Legacy) की रिलीज, स्ट्रीमिंग और प्रमोशन को रोकने का अनुरोध किया गया है। अदालत ने इस मामले में एक बेहद महत्वपूर्ण तथ्य पर संज्ञान लिया कि फिल्म को अभी तक रिलीज के वास्ते आवश्यक प्रमाणपत्र के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पास भेजा ही नहीं गया है।

न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने बुधवार को इस मामले पर विचार किया। सुनवाई के दौरान जब सलमान खान के वरिष्ठ वकील ने इस बात पर जोर दिया कि फिल्म की रिलीज को रोकने के लिए तत्काल अंतरिम निर्देश जारी करने की आवश्यकता है, तब फिल्म के निर्माताओं की ओर से पेश वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि फिल्म को सोमवार (छह जुलाई) तक प्रमाणन के लिए सेंसर बोर्ड के पास नहीं भेजा जाएगा।

“अदालत में मेकर्स के वकील ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि क्या सेंसर बोर्ड के प्रमाणन के बिना कोई फिल्म रिलीज हो सकती है? कानूनन ऐसा संभव नहीं है। चूंकि फिल्म को अभी तक बोर्ड के पास भेजा ही नहीं गया है, इसलिए हम सोमवार तक इसे सेंसर बोर्ड को नहीं भेजेंगे। इस बयान के बाद अदालत ने मामले की अगली विस्तृत सुनवाई सोमवार, 6 जुलाई को तय कर दी।”
व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) के उल्लंघन का आरोप

सलमान खान ने पिछले महीने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। अभिनेता का मुख्य तर्क यह है कि यह फिल्म कथित तौर पर वर्ष 1998 के उस चर्चित काला हिरण शिकार मामले पर आधारित है, जिसमें उनका नाम जुड़ा था। सलमान खान की लीगल टीम के मुताबिक, यह फिल्म अदालत द्वारा पहले से संरक्षित उनके ‘पर्सनैलिटी राइट्स’ यानी व्यक्तित्व अधिकारों का खुला उल्लंघन करती है।

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अभिनेता ने अपनी दीवानी याचिका में कहा है कि उनकी लिखित अनुमति या सहमति के बिना उनके जीवन की घटनाओं, नाम और पहचान का व्यावसायिक लाभ उठाने के लिए इस तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। यह न केवल उनके कानूनी अधिकारों को प्रभावित करता है, बल्कि उनकी छवि और सार्वजनिक प्रतिष्ठा को भी गंभीर नुकसान पहुंचाता है।

पोस्टर और ब्रेसलेट को लेकर आपत्ति: झूठा नैरेटिव गढ़ने का दावा

याचिका में 59 वर्षीय अभिनेता ने विशेष रूप से फिल्म के प्रचार और पोस्टरों पर कड़ी आपत्ति जताई है। सलमान खान के वकील निजाम पाशा ने अदालत को बताया कि 29 मई को जारी किए गए फिल्म के पोस्टर और इसके बाद आए टीजर में अभिनेता के प्रति स्पष्ट और प्रत्यक्ष संदर्भ दिया गया है।

पोस्टर में जो मुख्य किरदार दिखाया गया है, उसका हाव-भाव और हुलिया काफी हद तक सलमान खान से मेल खाता है। सबसे खास बात यह है कि उस किरदार ने हाथ में एक नीला ब्रेसलेट पहना हुआ है, जो पिछले कई दशकों से सार्वजनिक जीवन में सलमान खान की एक विशिष्ट और तुरंत पहचानी जाने वाली पहचान बन चुका है।

सलमान खान की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि राजस्थान की एक अदालत द्वारा उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत आरोपों से बरी किया जा चुका है, इसके बावजूद फिल्म के पोस्टर में मुख्य किरदार के हाथ में बंदूक दिखाई गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह पोस्टर और प्रस्तावित फिल्म समाज में एक गलत और भ्रामक नैरेटिव फैला रही है, जो अभिनेता को बदनाम करने की कोशिश है। साथ ही, इसमें अभिनेता के कथित तौर पर अंडरवर्ल्ड से संबंध होने का भी भ्रामक संकेत दिया गया है।

फेयर ट्रायल के अधिकार पर असर

याचिका में यह महत्वपूर्ण बिंदु भी उठाया गया है कि चूंकि मूल काला हिरण शिकार मामले से जुड़ी कानूनी कार्रवाई और अपीलें अभी भी माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के समक्ष लंबित हैं, ऐसे में इस विषय पर कोई भी फिल्म बनाना या उसे रिलीज करना अभिनेता के ‘फेयर ट्रायल’ (निष्पक्ष सुनवाई) के अधिकार में बाधा डाल सकता है। इससे न्यायालय की कार्यवाही और जनभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

विवाद के केंद्र में कौन हैं फिल्म के मेकर्स?

गौरतलब है कि इस फिल्म का निर्माण ‘जानी फायरफॉक्स फिल्म्स’ के बैनर तले किया जा रहा है। फिल्म के निर्माता और लेखक अमित जानी हैं, जबकि इसका निर्देशन भारत एस. श्रीनाथ द्वारा किया जा रहा है। सलमान खान ने अपनी याचिका में अमित जानी, भारत श्रीनाथ, कास्टिंग डायरेक्टर अक्षय पांडे और कुछ अन्य अज्ञात पक्षों को प्रतिवादी बनाया है।

इस कानूनी लड़ाई की शुरुआत तब हुई थी जब जून महीने की शुरुआत में सलमान खान की लीगल टीम ने मेकर्स को एक कानूनी नोटिस भेजकर फिल्म के पोस्टर और प्रचार सामग्री को तुरंत हटाने की मांग की थी। इसके जवाब में निर्माता अमित जानी ने सोशल मीडिया पर इस नोटिस को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी थी और दावा किया था कि उन्हें इस प्रोजेक्ट को लेकर विभिन्न माध्यमों से धमकियां भी मिल रही हैं, जिसकी उन्होंने प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज कराई है।

अब आगे क्या?

दिल्ली उच्च न्यायालय की अवकाशकालीन पीठ ने इससे पहले हुई सुनवाइयों में सलमान खान को निर्देश दिया था कि वे याचिका और सभी संबंधित दस्तावेजों की पूरी प्रति प्रतिवादियों (फिल्म निर्माताओं) को सौंपें, ताकि वे अपना विस्तृत जवाब दाखिल कर सकें। बुधवार को हुई संक्षिप्त सुनवाई के बाद अब सभी की निगाहें 6 जुलाई को होने वाली मुख्य सुनवाई पर टिकी हैं।

सोमवार को होने वाली इस सुनवाई में अदालत तय करेगी कि क्या फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लिगेसी’ के निर्माण, इसके प्रमोशन या इसकी रिलीज पर कोई अंतरिम रोक लगाई जानी चाहिए या नहीं। तब तक मेकर्स द्वारा फिल्म को सेंसर बोर्ड के पास न भेजने के आश्वासन से सलमान खान की टीम को फौरी राहत जरूर मिली है, क्योंकि बिना सर्टिफिकेशन के फिल्म सिनेमाघरों या ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज नहीं हो सकती।


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