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धर्म एवं ज्योतिष – विशेष बुलेटिन
आज का पंचांग 11 अगस्त 2026: सावन शिवरात्रि पर जानें जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और संपूर्ण दैनिक पंचांग
अंबिकापुर / नई दिल्ली: सनातन धर्म में कालगणना और दैनिक जीवन के शुभ कार्यों के संपादन के लिए पंचांग का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से आज यानी 11 अगस्त 2026 का दिन अत्यंत पावन और फलदायी है। आज श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जिसे मुख्य रूप से सावन शिवरात्रि के रूप में देशभर में पूरे हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। भगवान भोलेनाथ के भक्तों के लिए आज का दिन जलाभिषेक, रुद्रार्चन और विशेष मनोकामना पूर्ति के लिए बेहद विशेष माना गया है।
आज का पंचांग – एक नजर में (11 अगस्त 2026)
- विक्रम संवत: 2083
- मास: श्रावण (सावन), कृष्ण पक्ष
- तिथि: चतुर्दशी तिथि (दिनभर)
- वार: मंगलवार
- नक्षत्र: पुनर्वसु नक्षत्र (सुबह 10:09 बजे तक), तत्पश्चात पुष्य नक्षत्र
- सूर्य राशि: कर्क
- चंद्र राशि: कर्क
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:53 बजे तक
- राहुकाल: दोपहर 03:45 बजे से शाम 05:25 बजे तक
1. आज की तिथि और ग्रह-नक्षत्र की स्थिति
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, पंचांग के पांच मुख्य अंग—तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण होते हैं। आज श्रावण कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। नक्षत्रों की बात करें तो सुबह 10:09 बजे तक पुनर्वसु नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद नक्षत्र सम्राट ‘पुष्य नक्षत्र’ का प्रवेश होगा। पुष्य नक्षत्र को अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है, जिसमें की गई पूजा-अर्चना और खरीदारी अक्षय फल प्रदान करती है। आज चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में संचार कर रहे हैं, जिससे मन में तरलता और धार्मिक ऊर्जा बनी रहेगी।
2. सावन शिवरात्रि और जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त
सावन महीने में आने वाली शिवरात्रि का अपना अलग ही महत्व है। इस दिन लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, देवघर, काशी और स्थानीय शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं। आज मंगलवार का दिन होने से भगवान हनुमान और भोलेनाथ दोनों की कृपा एक साथ प्राप्त करने का दुर्लभ संयोग बना है।
जलाभिषेक और पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त:
- प्रातः काल पूजा मुहूर्त: सुबह 05:50 बजे से सुबह 08:30 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त (विशेष पूजन हेतु): दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक
- रात्रि प्रथम प्रहर पूजा: शाम 06:55 बजे से रात्रि 09:35 बजे तक
- निशिता काल (रात्रि पूजा): मध्यरात्रि 12:05 बजे से 12:48 बजे तक
3. आज का शुभ और अशुभ समय (Muhurat Timings)
किसी भी नए अथवा मांगलिक कार्य की शुरुआत के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना आवश्यक होता है। वहीं अशुभ समय के दौरान महत्वपूर्ण कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है।
| समय का प्रकार | प्रकार / नाम | समय (अवधि) |
|---|---|---|
| शुभ समय | अभिजित मुहूर्त | दोपहर 12:00 PM से 12:53 PM |
| शुभ समय | विजय मुहूर्त | दोपहर 02:35 PM से 03:28 PM |
| शुभ समय | गोधूलि मुहूर्त | शाम 06:45 PM से 07:08 PM |
| अशुभ समय | राहुकाल | दोपहर 03:45 PM से शाम 05:25 PM |
| अशुभ समय | यमगंड | सुबह 09:05 AM से 10:45 AM |
| अशुभ समय | दिशा शूल | उत्तर दिशा (यात्रा से बचें या गुड़ खाकर निकलें) |
4. पंचांग के 5 प्रमुख अंगों का विस्तृत विवरण
वैदिक कालगणना के अनुसार पंचांग के पांच अंग इस प्रकार हैं:
- तिथि: कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (दिनभर)।
- वार: मंगलवार (मंगल ग्रह का प्रभाव)।
- नक्षत्र: पुनर्वसु (सुबह 10:09 तक), फिर पुष्य।
- योग: सिद्धि योग (धार्मिक कार्यों के लिए उत्तम)।
- करण: विष्टि / शकुनि करण।
5. सावन शिवरात्रि पर करें ये विशेष उपाय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आज सावन शिवरात्रि और पुष्य नक्षत्र का अद्भुत मिलन है। यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा या मंगल कमजोर स्थिति में हैं या काम में रुकावटें आ रही हैं, तो आज निम्नलिखित उपाय करें:
- शिवलिंग पर जलाभिषेक: तांबे के लोटे में जल, थोड़ा सा कच्चा दूध और काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें।
- महामृत्युंजय मंत्र: ‘ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्…’ मंत्र का 108 बार जाप करें।
- हनुमान जी की पूजा: मंगलवार होने के कारण हनुमान चालीसा का पाठ करें और चमेली के तेल का दीपक जलाएं।
11 अगस्त 2026 का दिन आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बेहद पावन है। सावन शिवरात्रि के इस पावन पर्व पर राहुकाल का ध्यान रखते हुए शुभ मुहूर्त में पूजन-अर्चन करें। पंचांग के अनुसार योजना बनाकर किए गए कार्य जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाते हैं।










