Make in India के 12 साल पूरे: PM नरेंद्र मोदी बोले- इंफ्रास्ट्रक्चर, एंटरप्राइज और इनोवेशन से समृद्ध हो रहा भारत
नई दिल्ली: भारत सरकार की फ्लैगशिप पहल ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) ने आज सफलतापूर्वक 12 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक मील के पत्थर के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों और उद्योग जगत को बधाई दी और भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र (Global Manufacturing Hub) बनाने की दिशा में इस योजना के दूरगामी प्रभाव को रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विशेष वीडियो संदेश साझा करते हुए कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ केवल एक नीति नहीं है, बल्कि यह देश के बुनियादी ढांचे, उद्यमशीलता और नवाचार को सशक्त बनाने का एक राष्ट्रव्यापी अभियान है जो भारत की आर्थिक समृद्धि को गति प्रदान कर रहा है।
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1. ‘मेक इन इंडिया’ का सफर: 2014 से 2026 तक की ऐतिहासिक क्रांति
25 सितंबर 2014 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली से शुरू की गई ‘मेक इन इंडिया’ पहल का मुख्य उद्देश्य भारत में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देना, विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करना, बौद्धिक संपदा की रक्षा करना और देश में विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे का निर्माण करना था। 12 वर्षों के इस सफर में भारत ने आयात पर अपनी निर्भरता को कम करते हुए आत्मनिर्भरता की ओर बड़े कदम बढ़ाए हैं।
इस योजना के तहत शुरू में 25 क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया था, जिसे बाद में ‘मेक इन इंडिया 2.0’ के तहत 27 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों (15 विनिर्माण और 12 सेवा क्षेत्र) तक विस्तारित किया गया। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उत्पादन, ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल्स, वस्त्र उद्योग और नवीकरणीय ऊर्जा शामिल हैं।
2. विनिर्माण और आर्थिक विकास के प्रमुख आंकड़े
पिछले 12 वर्षों में भारत के औद्योगिक परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिला है। सरकारी आंकड़ों और हालिया रिपोर्टों के अनुसार प्रमुख क्षेत्रों की प्रगति इस प्रकार है:
| क्षेत्र / सूचकांक | वर्ष 2014-15 (सुरुआती दौर) | वर्ष 2025-26 (वर्तमान स्थिति) |
|---|---|---|
| इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन | ₹1.9 लाख करोड़ | ₹13.11 लाख करोड़ (लगभग) |
| मोबाइल फोन विनिर्माण | ₹18,000 करोड़ | ₹6.27 लाख करोड़ |
| PLI योजना का वास्तविक निवेश | शून्य (शुरू नहीं हुआ था) | ₹2.40 लाख करोड़ से अधिक |
| PLI के तहत कुल उत्पादन/बिक्री | – | ₹23.8 लाख करोड़ |
3. पीएलआई (PLI) योजना और ‘वोकल फॉर लोकल’ का प्रभाव
उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (Production Linked Incentive – PLI) योजना ने मेक इन इंडिया को एक नई ऊर्जा दी है। 14 प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों के लिए लागू की गई इस योजना ने वैश्विक कंपनियों को भारत में अपनी विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रेरित किया है।
PLI योजना की प्रमुख उपलब्धियां:
- निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि: PLI योजनाओं के माध्यम से ₹15.2 लाख करोड़ से अधिक का निर्यात हासिल किया गया है।
- रोजगार का सृजन: इस योजना के कारण देश भर में 14.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।
- रक्षा विनिर्माण: भारत जो कभी रक्षा सामग्री का सबसे बड़ा आयातक था, आज लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, मिसाइल और तोपों का स्वदेशी निर्माण कर रहा है और वैश्विक स्तर पर निर्यात भी कर रहा है।
4. इज ऑफ डूइंग बिजनेस और रेगुलेटरी सुधार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के विजन के अनुरूप, मेक इन इंडिया ने भारत में व्यापार करने की प्रक्रिया को सरल बनाया है:
- हजारों अप्रचलित नियमों और अनुपालनों (Compliances) को समाप्त किया गया।
- सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम के माध्यम से व्यावसायिक स्वीकृतियों को डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया।
- एफडीआई (FDI) नियमों में ढील दी गई, जिससे रक्षा, रेलवे और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में स्वचालित मार्ग से विदेशी निवेश संभव हुआ।
5. भावी दृष्टिकोण: ‘विकसित भारत 2047’ का मार्ग
केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि मेक इन इंडिया ने भारतीय उद्यमियों, स्टार्ट-अप्स और वैश्विक निवेशकों के मन में यह विश्वास पैदा किया है कि भारत न केवल विश्व के लिए निर्माण कर सकता है, बल्कि नवाचार में भी प्रतिस्पर्धा कर सकता है।
‘मेक इन इंडिया’ की 12वीं वर्षगांठ केवल बीते वर्षों की सफलताओं का जश्न मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ और 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के संकल्प को दोहराने का क्षण है। आगामी वर्षों में भारत सेमीकंडक्टर निर्माण, हरित ऊर्जा तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित औद्योगिक क्रांति (Industry 4.0) में वैश्विक नेतृत्व करने के लिए तैयार है।








