धनतेरस 2026: भारत के बाजारों में चमकी महा-त्योहार की चमक, देश भर में रिकॉर्ड तोड़ ₹1.25 लाख करोड़ के व्यापार का ऐतिहासिक आंकड़ा पार
सोने-चांदी की ऊंची कीमतों के बावजूद खरीदारों के उत्साह ने तोड़े पिछले सारे रिकॉर्ड; ‘वोकल फॉर लोकल’ और स्वदेशी उत्पादों की धूम से अर्थव्यवस्था को मिली अभूतपूर्व गति।
रोशनी और उत्सव के महापर्व दीपावली के ठीक पहले आने वाला पांच दिवसीय दीपोत्सव का पहला चरण यानी ‘धनतेरस 2026’ भारतीय व्यापार जगत, खुदरा बाजारों और अर्थव्यवस्था के लिए एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख चुका है। इस वर्ष धनतेरस के पावन अवसर पर देशभर के बाजारों में जिस अभूतपूर्व और अकल्पनीय ग्राहकों की भीड़ तथा खरीदारी का सैलाब देखने को मिला है, उसने तमाम वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और मंदी के कयासों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) और ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) के शुरुआती और विस्तृत व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार, इस बार धनतेरस के एक ही दिन देश के भीतर कुल खुदरा और थोक व्यापार का यह आंकड़ा 1.25 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक मील के पत्थर को पार कर गया है!
यह आंकड़ा न केवल पिछले वर्ष के मुकाबले एक बड़ी छलांग को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारतीय उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति (Purchasing Power) और त्योहारी उल्लास पर महंगाई या उच्च मूल्य सूचकांक का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। महानगरों से लेकर सुदूर ग्रामीण अंचलों और टियर-2 तथा टियर-3 शहरों के बाजारों में जिस प्रकार सुबह से लेकर देर रात तक खरीदार उमड़े, उससे भारतीय अर्थव्यवस्था के मूल फंडामेंटल्स बेहद मजबूत स्थिति में नजर आ रहे हैं। आइए इस विस्तृत विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि इस धनतेरस पर किस सेक्टर ने कैसा प्रदर्शन किया, सोने-चांदी की रिकॉर्ड कीमतों का बाजार पर क्या असर पड़ा और किन-किन वस्तुओं की सबसे ज्यादा मांग रही।
मुख्य आर्थिक हाइलाइट्स (Key Highlights of Dhanteras 2026 Trade):
- कुल अनुमानित व्यापार: ₹1,25,000 करोड़ से अधिक (विभिन्न व्यापारिक संगठनों के संयुक्त आंकलन के अनुसार)।
- सोने और चांदी का कारोबार: अकेले कीमती धातुओं की बिक्री ₹66,000 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई।
- उपभोक्ता रुझान: ऊंचे दामों (Gold rate approx ₹1.44 lakh/10g & Silver ₹1.90 lakh/kg) के बावजूद हल्के वजन के आभूषणों (14k/18k) और आधुनिक विकल्पों की जबरदस्त मांग।
- विविध सेक्टर: ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रियल एस्टेट, बर्तन, और पारंपरिक शुभ वस्तुओं (फिश, कछुआ, हाथी, झाड़ू) की बंपर बिक्री।
धनतेरस 2026: व्यापारिक आंकड़े और वृहद आर्थिक परिदृश्य
धनतेरस का दिन भारतीय संस्कृति में भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की आराधना के साथ-साथ नई संपत्ति, धातु और वस्तुओं की खरीदारी के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस वर्ष (2026) जब बाजार खुले तो व्यापारिक संगठनों ने शुरुआत में ही ₹1 लाख करोड़ के व्यापार का अनुमान जताया था, लेकिन जैसे-जैसे दिन ढलता गया और शाम के शुभ मुहूर्त में खरीदारी ने रफ्तार पकड़ी, अंतिम व्यापारिक आंकलन ₹1.25 लाख करोड़ के जादुई आंकड़े को पार कर गया।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय महामंत्री और सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने इस अभूतपूर्व सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि, “यह धनतेरस भारतीय खुदरा बाजार की अजेय क्षमता का प्रमाण है। देश के करोड़ों नागरिकों ने जिस उत्साह के साथ पारंपरिक और आधुनिक सामानों की खरीदारी की है, उसने यह साबित कर दिया है कि भारतीय बाजार अपनी आंतरिक ताकत के बल पर वैश्विक आर्थिक मंदी की हर चुनौती से पार पाने में पूरी तरह सक्षम हैं।”
| व्यापारिक क्षेत्र / सेक्टर | अनुमानित कारोबार (₹ करोड़ में) | पिछले वर्ष की तुलना में रुझान / वृद्धि |
|---|---|---|
| सोना, चांदी और आभूषण (Gold & Bullion) | ₹66,000 करोड़ + | कीमतें अधिक होने के बावजूद मूल्य के आधार पर मजबूत बढ़त |
| ऑटोमोबाइल (कार, टू-हॉर्स, कमर्शियल व्हीकल्स) | ₹18,000 करोड़ + | पारंपरिक डिलीवरी के चलते बंपर बुकिंग और बिक्री |
| उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरण (Appliances) | ₹15,000 करोड़ + | स्मार्ट टीवी, रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन की रिकॉर्ड मांग |
| बर्तन, रसोई के उत्पाद और मेटल यूटेंसिल्स | ₹8,000 करोड़ + | पीतल, तांबा और स्टील के बर्तनों की पारंपरिक खरीदारी |
| एफएमसीजी, गिफ्ट आइटम्स, लाइटिंग और सजावट | ₹18,000 करोड़ + | ‘वोकल फॉर लोकल’ और स्वदेशी उत्पादों का पूर्ण वर्चस्व |
| कुल महा-व्यापार (Total Turnover) | ₹1,25,000 करोड़ + | नया ऐतिहासिक ऑल-टाइम रिकॉर्ड |
सोने और चांदी का स्वर्णकाल: ऊंची कीमतों के बाद भी नहीं डिगा निवेशकों का विश्वास
इस वर्ष के सर्राफा बाजार (Bullion Market) का विश्लेषण करें तो एक बेहद दिलचस्प और नई प्रवृत्ति देखने को मिली। धनतेरस के दिन भारतीय बाजारों में सोने का भाव लगभग 1.44 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव लगभग 1.90 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास चल रहा था। पिछले साल की तुलना में सोने के दाम में लगभग 20 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई थी। इसके बावजूद, ग्राहकों ने सोने की चमक से दूरी बनाने के बजाय अपनी खरीदारी के पैटर्न को रणनीतिक रूप से बदल लिया (Strategic Shift in Buyer Behavior)।
ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने जानकारी देते हुए बताया कि चूँकि प्रति ग्राम कीमतें ऊंची थीं, इसलिए मध्यम वर्ग और युवा खरीदारों ने भारी-भरकम और पारंपरिक गहनों के स्थान पर हल्के वजन (Lightweight Jewellery) के आधुनिक डिज़ाइन वाले आभूषणों, 14 कैरेट और 18 कैरेट की ज्वेलरी, तथा डिजिटल गोल्ड/सिक्कों को प्राथमिकता दी। अकेले राजधानी दिल्ली के बुलियन बाजार में ही 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार दर्ज किया गया।
इसके साथ ही, रत्न और आभूषण क्षेत्र के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर) के दौरान भारत में सोने का आयात लगभग 1,82,995 करोड़ रुपये और चांदी का आयात 22,923 करोड़ रुपये रहा था, जिसने त्यौहारी सीजन के लिए पर्याप्त इन्वेंट्री और स्टॉक पहले से ही सुनिश्चित कर दिया था। यही कारण रहा कि देश के किसी भी कोने में ग्राहकों को मनपसंद डिजाइन और मात्रा की कमी का सामना नहीं करना पड़ा।
ऑटोमोबाइल सेक्टर में रफ्तार: सड़कों पर उतरीं लाखों नई गाड़ियां
धनतेरस के दिन केवल सोने-चांदी की दुकानों पर ही लंबी कतारें नहीं थीं, बल्कि देश भर के ऑटोमोबाइल शोरूम्स (कार, मोटरसाइकिल, स्कूटर और कमर्शियल व्हीकल्स) में भी उत्सव का अभूतपूर्व माहौल रहा। फгина (FADA) और स्थानीय डीलर्स संघ के शुरुआती रुझानों के अनुसार, इस धनतेरस पर ऑटोमोबाइल सेक्टर ने अकेले 18,000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया है।
लोग लंबे समय से अपनी पसंद की गाड़ियों की बुकिंग करवाकर रखे हुए थे और डिलीवरी के लिए विशेष रूप से धनतेरस के शुभ मुहूर्त को चुन रहे थे। एसयूवी (SUVs), कॉम्पैक्ट सेडान और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की मांग इस बार चरम पर रही। पेट्रोल-डीजल के पारंपरिक विकल्पों के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल इलेक्ट्रिक दोपहिया और चौपहिया वाहनों को खरीदने के लिए युवाओं और आधुनिक परिवारों में गजब का उत्साह देखा गया। कंपनियों द्वारा दी जाने वाली विशेष त्यौहारी छूट, आसान फाइनेंस स्कीम और कैश-बैक ऑफर्स ने इस बिक्री को और अधिक पंख दिए।
इलेक्ट्रॉनिक्स, होम अप्लायंसेज और डिजिटल गैजेट्स की धूम
पारंपरिक मान्यताओं से आगे बढ़कर आधुनिक भारतीय जीवनशैली का हिस्सा बन चुके इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल उपकरणों के बाजार ने भी इस धनतेरस पर नए रिकॉर्ड बनाए। घरों के आधुनिकीकरण के इस दौर में स्मार्ट टीवी, लार्ज-स्क्रीन डिस्प्ले, हाई-एंड रेफ्रिजरेटर, फुली ऑटोमेटिक वॉशिंग मशीन, और आधुनिक किचन चिमनी की बिक्री में जबरदस्त उछाल आया।
इसके अलावा, स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट्स जैसे गैजेट्स को भी धनतेरस के दिन उपहार स्वरूप देने या खुद के लिए खरीदने का चलन तेजी से बढ़ा है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी ब्रांडेड इलेक्ट्रॉनिक स्टोरों पर ग्राहकों की भारी भीड़ सुबह से लेकर आधी रात तक डटी रही। व्यापारियों के अनुसार, इस सेगमेंट में कुल मिलाकर 15,000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार दर्ज किया गया है।
शुभ वस्तुएं, बर्तन और ‘वोकल फॉर लोकल’ का जलवा
धनतेरस के दिन केवल महंगे आइटम ही नहीं, बल्कि पारंपरिक और आध्यात्मिक महत्व रखने वाली छोटी-छोटी वस्तुओं की खरीद का भी अपना एक विशेष महत्व है। इस दिन पीतल, तांबे और कांसे के बर्तन खरीदने की परंपरा सदियों पुरानी है। इस बार स्टील के साथ-साथ पारंपरिक धातु जैसे पीतल और तांबे के बर्तनों की मांग में जोरदार वापसी देखी गई, क्योंकि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ता पारंपरिक बर्तनों को अपने घर में वापस ला रहे हैं।
इसके साथ ही:
- शुभ आकृतियां और मूर्तियां: घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में सुख-समृद्धि और मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए मछली, कछुए और हाथी की आकृति वाली धातु व सजावटी वस्तुओं की भारी मांग रही।
- झाड़ू की पारंपरिक खरीद: धनतेरस पर दरिद्रता दूर करने के प्रतीक के रूप में झाड़ू खरीदने की प्राचीन परंपरा का निर्वहन देश के हर छोटे-बड़े शहर में पूरी श्रद्धा के साथ किया गया, जिससे लाखों छोटे स्थानीय रेहड़ी-पटरी और हस्तशिल्प विक्रेताओं को सीधा लाभ मिला।
- वोकल फॉर लोकल (Vocal for Local): प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी अभियानों का असर इस धनतेरस पर पूरी तरह दिखाई दिया। बाजार में बिकने वाली अधिकांश सजावटी लाइटें, मूर्तियां, दीये और पूजा सामग्री मेड-इन-इंडिया (Made in India) थीं, जिससे देश के कुटीर उद्योगों, स्थानीय कारीगरों और मूर्तिकारों की दीवाली इस बार वाकई रोशन हो गई।
टियर-2 और टियर-3 शहरों का बढ़ता आर्थिक प्रभाव
इस वर्ष की धनतेरस व्यापार रिपोर्ट की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि केवल मेट्रो शहर (जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता या चेन्नई) ही नहीं, बल्कि देश के मझोले और छोटे शहर जैसे कि पटना, रांची, लखनऊ, इंदौर, जयपुर, भोपाल, रायपुर, वाराणसी, और गोरखपुर जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों ने खरीदारी के मामले में महानगरों को कड़ी टक्कर दी।
इन क्षेत्रों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) से आए पैसों और कृषि क्षेत्र की बेहतर स्थिति के कारण नकदी का प्रवाह सुचारू रहा है। छोटे शहरों में सोने-चांदी के छोटे आभूषणों, दोपहिया वाहनों, ट्रैक्टरों और कृषि उपकरणों की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत की आर्थिक वृद्धि अब केवल बड़े कॉर्पोरेट्स या महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कोने-कोने तक इसका विस्तार हो चुका है।
सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्थाएं और बाजार प्रबंधन
इतने बड़े पैमाने पर उमड़ी भीड़ और खरबों रुपये के कारोबार के मद्देनजर देश के सभी प्रमुख व्यापारिक केंद्रों, बाजारों और सर्राफा बाजारों में सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रहीं। स्थानीय पुलिस प्रशासन, नगर निगमों और व्यापार मंडलों ने मिलकर यातायात नियंत्रण, सीसीटीवी निगरानी, और अग्निशमन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। हालांकि, कुछेक जगहों पर भारी भीड़ के कारण जाम की स्थिति जरूर बनी, लेकिन त्योहारी उमंग और उत्साह के आगे जनता ने हर छोटी-सी असुविधा को खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया।
धनतेरस 2026 के ये शानदार और ऐतिहासिक आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि भारतीय उपभोक्ता बाजार में एक अदम्य सकारात्मक ऊर्जा मौजूद है। वैश्विक उथल-पुथल और घरेलू स्तर पर जिंसों (Commodities) की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, भारतीय मानस का अपनी परंपराओं, आस्था और उत्सवधर्मिता के प्रति प्रेम कम नहीं हुआ है। ₹1.25 लाख करोड़ का यह महा-व्यापार न केवल व्यापारियों के चेहरों पर मुस्कان लेकर आया है, बल्कि इसने आने वाले दीपोत्सव और पूरे त्यौहारी सीजन के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था को एक बेहद मजबूत और तेज़ी से दौड़ती हुई शुरुआत प्रदान की है। यह धनतेरस आने वाले समय में देश के आर्थिक विकास के नए और ऊंचे शिखरों को छूने का स्पष्ट संदेश दे रही है।















