विश्व राइनो दिवस: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया ‘प्रोजेक्ट राइनो’ की शुरुआत का ऐलान, कहा— ‘असम में दुनिया की 80% राइनो आबादी’
नई दिल्ली / गुवाहाटी: विश्व राइनो दिवस (World Rhino Day) के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के शानदार एक-सींग वाले गेंडे (Greater One-Horned Rhinoceros) की उपस्थिति पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की है। इसके साथ ही उन्होंने देश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘प्रोजेक्ट राइनो’ (Project Rhino) की शुरुआत करने की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए राइनो-रेंज वाले राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे पर्यावास प्रबंधन, आनुवंशिक सुधार और जनसंख्या गतिकी को समझने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले वन रक्षकों, स्थानीय समुदायों और पर्यावरणविदों की सराहना करते हुए बताया कि निरंतर प्रयासों के चलते आज असम दुनिया की लगभग 80 प्रतिशत राइनो आबादी का सुरक्षित आश्रय स्थल बन चुका है।
प्रधानमंत्री का एक्स (X) संदेश
“विश्व राइनो दिवस पर, हम शानदार एक-सींग वाले राइनो की उपस्थिति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हैं और इसके संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले सभी लोगों की सराहना करते हैं। असम में अब विश्व की लगभग 80 प्रतिशत राइनो की आबादी पाई जाती है और राइनो के अवैध शिकार को रोकने के लिए काजीरंगा के प्रयासों की व्यापक रूप से सराहना की गई है।”
“एक ओर, बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में राइनो या तो वापस आ गए हैं या उन्हें अच्छी तरह से संरक्षित किया जा रहा है। दूसरी ओर, दुधवा (उत्तर प्रदेश) में राइनो के पुनर्वास की सफलता इतिहास रच रही है। यह पशु संरक्षण और सीमावर्ती राज्यों में सक्रिय वन्यजीव प्रबंधन के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
“देश में प्रजाति संरक्षण को आगे बढ़ाते हुए, मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि सीमावर्ती राज्यों को संरक्षण, पर्यावास प्रबंधन, आनुवंशिक सुधार और जनसंख्या गतिकी को समझने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करने हेतु ‘प्रोजेक्ट राइनो’ की शुरुआत की गई है।”
काजीरंगा का बेमिसाल मॉडल और शून्य शिकार का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (Kaziranga National Park) के प्रयासों की विशेष प्रशंसा की, जहाँ सख्त निगरानी, आधुनिक तकनीक और स्थानीय असमिया समुदायों के सहयोग से अवैध शिकार (Poaching) पर प्रभावी लगाम लगाई गई है। काजीरंगा मॉडल ने यह साबित कर दिखाया है कि अगर प्रशासनिक इच्छाशक्ति और सामुदायिक भागीदारी एक साथ आ जाए, तो लुप्तप्राय प्रजातियों को विलुप्त होने की कगार से वापस लाया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि असम सरकार और वन विभाग के समन्वित प्रयासों के चलते हाल के वर्षों में कई मौकों पर राज्य में ‘ज़ीरो पोचिंग’ (Zero Poaching) का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। काजीरंगा के साथ-साथ मानस राष्ट्रीय उद्यान और ओरंग राष्ट्रीय उद्यान में भी राइनो की संख्या में निरंतर बढ़ोतरी देखी जा रही है।
उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में पुनर्वास की ऐतिहासिक सफलता
केवल असम ही नहीं, बल्कि भारत के अन्य राज्यों में भी एक-सींग वाले गेंडे के संरक्षण के शानदार परिणाम सामने आए हैं:
- उत्तर प्रदेश (दुधवा नेशनल पार्क): तराई क्षेत्र में स्थित दुधवा में 1980 के दशक में शुरू किया गया राइनो री-इंट्रोडक्शन (पुनर्वास) कार्यक्रम आज इतिहास रच रहा है। यहाँ गेंडों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है और यह भारत में सफल प्रजाति पुनर्वास का प्रमुख उदाहरण बन गया है।
- पश्चिम बंगाल (जलदापाड़ा और गोरुमारा): पश्चिम बंगाल के उत्तर-पूर्वी जंगलों (जलदापाड़ा और गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान) में राइनो की आबादी पूरी तरह सुरक्षित है और उनकी संख्या में संतोषजनक वृद्धि हो रही है।
- बिहार (वाल्मीकि टाइगर रिजर्व): बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में गेंडों की प्राकृतिक वापसी और उनके पुनर्वास के लिए विशेष कॉरिडोर और बाड़े तैयार किए गए हैं।
‘प्रोजेक्ट राइनो’: क्या है केंद्र सरकार का मास्टर प्लान?
‘प्रोजेक्ट टाइगर’ और ‘प्रोजेक्ट एलीफेंट’ की अपार सफलता के बाद केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया ‘प्रोजेक्ट राइनो’ भारत में वन्यजीव संरक्षण का अगला बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। इस प्रोजेक्ट के प्रमुख स्तंभ निम्नलिखित हैं:
- वित्तीय और तकनीकी सहायता: राइनो-रेंज राज्यों (असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार आदि) को अत्याधुनिक निगरानी उपकरण, ड्रोन, जीपीएस ट्रैकिंग और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सीधी वित्तीय मदद दी जाएगी।
- पर्यावास प्रबंधन (Habitat Management): गेंडों के प्राकृतिक आवास यानी आर्द्रभूमि (Wetlands) और घास के मैदानों (Grasslands) का वैज्ञानिक रखरखाव किया जाएगा, ताकि उन्हें भोजन और पानी की कमी न हो।
- आनुवंशिक सुधार (Genetic Diversity): एक ही क्षेत्र में सीमित रहने से होने वाले ‘इनब्रीडिंग’ (Inbreeding) के खतरे को टालने के लिए विभिन्न अभयारण्यों के बीच जेनेटिक एक्सचेंज और वैज्ञानिक ट्रांसलोकेशन (स्थानांतरण) को बढ़ावा दिया जाएगा।
- जनसंख्या गतिकी का अध्ययन (Population Dynamics): गेंडों के प्रजनन दर, मृत्यु दर, रोग संक्रमण और व्यवहार का गहन वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा।
एक-सींग वाला भारतीय गेंडा न केवल हमारी जैव विविधता का प्रतीक है, बल्कि यह पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का भी सूचक है। प्रधानमंत्री द्वारा घोषित ‘प्रोजेक्ट राइनो’ देश में वन्यजीवों के संरक्षण को एक संस्थागत और वैज्ञानिक मजबूती प्रदान करेगा। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत के इस धरोहर जीव को सुरक्षित रखने का मार्ग प्रशस्त करेगी।













