बलरामपुर में मातृ-शिशु स्वास्थ्य, बाल विवाह रोकथाम और गैर-संचारी रोगों पर जिला स्तरीय जागरूकता अभियान

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बलरामपुर में मातृ-शिशु स्वास्थ्य, बाल विवाह रोकथाम और गैर-संचारी रोगों पर जिला स्तरीय जागरूकता अभियान

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बलरामपुर में मातृ-शिशु स्वास्थ्य, बाल विवाह रोकथाम और बच्चों में गैर-संचारी रोगों की रोकथाम को लेकर चला व्यापक जनजागरूकता अभियान, स्व-सहायता समूहों और पंचायत प्रतिनिधियों ने लिया संकल्प

बलरामपुर। जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने, बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों पर प्रभावी रोक लगाने, किशोर-किशोरियों के स्वास्थ्य एवं शिक्षा को बढ़ावा देने तथा बच्चों में बढ़ रहे गैर-संचारी रोगों के प्रति व्यापक जनजागरूकता फैलाने के उद्देश्य से जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा दो महत्वपूर्ण जिला स्तरीय कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के निर्देशन तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित इन कार्यक्रमों में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं एवं पंचायत प्रतिनिधियों को स्वास्थ्य, पोषण, बाल संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समुदाय के भीतर ऐसे स्थानीय नेतृत्व को तैयार करना था जो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी पहुंचाकर लोगों को जागरूक करे तथा सरकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाए। जिला प्रशासन का मानना है कि जब समुदाय स्वयं स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुधार की जिम्मेदारी उठाता है, तभी स्थायी परिवर्तन संभव हो पाता है।

मुख्य उद्देश्य

  • मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना
  • बाल विवाह पर प्रभावी रोक लगाना
  • किशोर स्वास्थ्य को बढ़ावा देना
  • गैर-संचारी रोगों की समय पर पहचान
  • महिलाओं को स्वास्थ्य जागरूकता का माध्यम बनाना
  • सरकारी योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाना

स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को बनाया जाएगा बदलाव का माध्यम

जिला स्तरीय स्व-सहायता समूह संवेदीकरण कार्यशाला में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आई महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी की। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि महिलाओं का समाज में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है और यदि उन्हें सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए तो वे पूरे गांव में स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती हैं।

कार्यशाला के दौरान महिलाओं को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, सुरक्षित गर्भावस्था, संस्थागत प्रसव, नवजात शिशु की देखभाल, स्तनपान, पोषण, एनीमिया नियंत्रण, किशोर स्वास्थ्य तथा बच्चों में गैर-संचारी रोगों के विषय में विस्तार से जानकारी दी गई।

बाल विवाह के दुष्परिणामों पर विशेष चर्चा

विशेषज्ञों ने बताया कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुरीति नहीं बल्कि यह मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा भी है। कम उम्र में विवाह और गर्भधारण के कारण माताओं में प्रसव संबंधी जटिलताएं बढ़ जाती हैं तथा नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

प्रतिभागियों को बताया गया कि बाल विवाह के कारण किशोरियों की शिक्षा बाधित होती है, कुपोषण और एनीमिया की समस्या बढ़ती है तथा मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में वृद्धि होती है। इसलिए प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह बाल विवाह की सूचना प्रशासन को दे और इसे रोकने में सहयोग करे।

किशोरावस्था में गर्भधारण के स्वास्थ्य जोखिम

कार्यशाला में किशोरावस्था में गर्भधारण से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि कम उम्र में गर्भधारण करने वाली किशोरियों में उच्च रक्तचाप, अत्यधिक रक्तस्राव, समय से पहले प्रसव तथा कम वजन वाले बच्चों के जन्म की संभावना अधिक रहती है।

इसके अलावा किशोरियों के मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा तथा भविष्य पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस कारण समुदाय को जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है।

असुरक्षित गर्भपात एवं भ्रूण हत्या पर कानूनी जानकारी

कार्यक्रम में असुरक्षित गर्भपात के दुष्परिणामों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही प्रतिभागियों को लिंग चयन जांच निषेध अधिनियम (पीसीपीएनडीटी एक्ट) के बारे में जानकारी दी गई। स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भ्रूण हत्या एक गंभीर दंडनीय अपराध है तथा इसमें दोषी पाए जाने पर कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

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प्रतिभागियों से अपील की गई कि समाज में बेटी और बेटे के बीच किसी भी प्रकार का भेदभाव न किया जाए तथा कन्या भ्रूण हत्या जैसी अमानवीय प्रवृत्तियों को समाप्त करने में सहयोग दिया जाए।

बच्चों में गैर-संचारी रोगों की समय पर पहचान पर जोर

कार्यक्रम के दौरान बच्चों में बढ़ रहे गैर-संचारी रोगों की समय पर पहचान एवं उपचार पर विशेष बल दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि बदलती जीवनशैली और आनुवंशिक कारणों से कई बच्चों में गंभीर बीमारियां देखने को मिल रही हैं। यदि समय रहते इनकी पहचान कर उपचार शुरू कर दिया जाए तो जटिलताओं से बचा जा सकता है।

विशेष रूप से सिकल सेल रोग, बाल मधुमेह तथा जन्मजात हृदय रोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।

बाल मधुमेह के प्रमुख लक्षण

  • अत्यधिक प्यास लगना
  • बार-बार पेशाब आना
  • लगातार कमजोरी एवं थकान
  • अचानक वजन कम होना
  • भूख अधिक लगना

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि यदि किसी बच्चे में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल निकटतम स्वास्थ्य संस्थान में जांच करानी चाहिए।

पंचायत प्रतिनिधियों को भी दिया गया विशेष प्रशिक्षण

गांवों को स्वस्थ, जागरूक एवं बाल-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा यूनिसेफ एवं एमसीसीआर ट्रस्ट के सहयोग से पंचायत प्रतिनिधियों के लिए विशेष उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों से लगभग 94 पंचायत प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में बताया गया कि पंचायत प्रतिनिधि ग्राम सभाओं, पंचायत बैठकों तथा जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से स्वास्थ्य योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर सकते हैं तथा लोगों को समय पर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ सकते हैं।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर विस्तार से चर्चा

विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं की नियमित प्रसवपूर्व जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान, संस्थागत प्रसव, नवजात शिशु की देखभाल, पूर्ण टीकाकरण, आयरन एवं फोलिक एसिड सेवन तथा पोषण के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।

बताया गया कि यदि गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच हो और उन्हें समय पर आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हों तो मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

एनीमिया एवं कुपोषण के खिलाफ अभियान

कार्यक्रम में एनीमिया और कुपोषण को जिले की प्रमुख स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बताया गया। महिलाओं एवं किशोरियों को आयरन युक्त भोजन, संतुलित आहार, हरी सब्जियां, दालें, दूध तथा पौष्टिक खाद्य पदार्थों के नियमित सेवन की सलाह दी गई।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाकर आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ बनाया जा सकता है।

सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने का आह्वान

कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं एवं पंचायत प्रतिनिधियों से आग्रह किया गया कि वे शासन की स्वास्थ्य एवं महिला-बाल विकास विभाग की सभी योजनाओं की जानकारी प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचाएं। साथ ही पात्र हितग्राहियों को समय पर स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने में सहयोग करें।

यह भी कहा गया कि सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाकर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत किया जाएगा।

महिलाओं और जनप्रतिनिधियों ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम में जनपद पंचायत बलरामपुर अध्यक्ष सुश्री सुमित्रा चेरवा, जनपद सदस्य, पंचायत प्रतिनिधि, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा गांव-गांव में जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रतिभागियों ने कहा कि यदि पंचायत, स्वास्थ्य विभाग और समुदाय मिलकर कार्य करें तो बाल विवाह, कुपोषण, मातृ मृत्यु, शिशु मृत्यु तथा अन्य सामाजिक समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

सामूहिक संकल्प

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे अपने-अपने गांवों में बाल विवाह मुक्त समाज, स्वस्थ मातृ-शिशु, सशक्त किशोर-किशोरियों तथा बच्चों में गैर-संचारी रोगों की समय पर पहचान एवं उपचार सुनिश्चित करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाएंगे।

उन्होंने यह भी संकल्प लिया कि प्रत्येक गर्भवती महिला को समय पर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ेंगे, बच्चों का पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करेंगे, किशोरियों की शिक्षा एवं पोषण को बढ़ावा देंगे तथा प्रत्येक परिवार तक सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, यूनिसेफ, एमसीसीआर ट्रस्ट, पंचायत प्रतिनिधियों और स्व-सहायता समूहों की संयुक्त पहल जिले में स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। यदि इस प्रकार के जागरूकता अभियान लगातार संचालित होते रहे तो मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी, कुपोषण पर नियंत्रण, बाल विवाह उन्मूलन तथा बच्चों में गैर-संचारी रोगों की समय पर पहचान जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करने में निश्चित रूप से सफलता मिलेगी।



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