पेट्रोल और डीजल की किल्लत ने ईवी गाड़ियों की बिक्री दोगुना से भी ज्यादा बढ़ा दी है। पिछले वित्तीय साल 2025-26 में करीब 25 हजार ई-व्हीकल बिके थे, लेकिन अभी जनवरी से जून तक ही 12 हजार से ज्यादा गाड़ियां बिक चुकी हैं।
राज्य सरकार ने इस वित्तीय साल में ई-व्हीकल खरीदने पर 100 करोड़ की सब्सिडी देने का प्रावधान किया है। लेकिन पुराना बकाया और नई गाड़ियों की बिक्री को मिलाकर सब्सिडी 200 करोड़ के पार हो गई है।
गाड़ियां ज्यादा और सब्सिडी का बजट कम होने पर अफसर भी परेशान हो गए हैं। हालांकि उनका कहना है कि नियमों के अनुसार सभी को सब्सिडी दी जाएगी। गाड़ियों की संख्या और सब्सिडी के रकम की सूचना शासन तक पहुंचा दी जाएगी। जिन लोगों ने ईवी गाड़ियां खरीदी हैं उन्हें सब्सिडी की रकम हर हाल में मिलेगी। दैनिक भास्कर को मिली जानकारी के अनुसार जून 2025 में 2471 दोपहिया और 753 कार व ई-रिक्शों की बिक्री हुई थी।
लेकिन इस साल जून 2026 में ही 3849 दो पहिया, 1761 कार-ई-रिक्शों की बिक्री हो चुकी है। इतना ही नहीं ई-व्हीकल की डिमांड अभी भी बनी हुई है। अभी किसी भी कंपनी की गाड़ी ऑन डिमांड नहीं मिल रही है। इसके लिए लोगों को शो रूम में बुकिंग करानी पड़ रही है। बुकिंग कराने के 7 से 14 दिन बाद ही गाड़ियों की डिलिवरी हो पा रही है। खासतौर पर कारों की डिलिवरी के लिए एक महीने तक का समय भी लग जा रहा है।
बता दें कि नए वित्तीय साल 2026-27 में 100 करोड़ का प्रावधान किया गया है। लेकिन अभी जितनी तेजी से गाड़ियां बिक रही हैं सब्सिडी की रकम 200 करोड़ तक जा सकती है।
सदन में मंत्री ने दी जानकारी विधानसभा के मानसून में ई-वाहन नीति पर कुरूद विधानसभा से भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर के प्रश्न पर वन एवं परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि राज्य की इलेक्ट्रिक वाहन नीति के अनुसार 20 लाख तक की ईवी गाड़ियों पर 10 प्रतिशत या अधिकतम एक लाख प्रोत्साहन राशि का प्रावधान है।
अगस्त 2022 से वाहन नीति लागू होने से 15 जून 2026 तक कुल 1 लाख 22862 वाहनों के लिए 270.45 करोड़ की सब्सिडी दी जानी थी, इसमें 53308 वाहनों के लिए 115.77 करोड़ का भुगतान जारी किया जा चुका है।











