आज का पंचांग 21 जुलाई 2026: मासिक दुर्गाष्टमी, शुभ मुहूर्त और नक्षत्र विश्लेषण






आज का पंचांग – 21 जुलाई 2026 | मासिक दुर्गाष्टमी, शुभ मुहूर्त और ज्योतिषीय विश्लेषण

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आज का पंचांग – 21 जुलाई 2026: मासिक दुर्गाष्टमी, शुभ मुहूर्त और नक्षत्र विश्लेषण

दिनांक: 21 जुलाई 2026 | वार: मंगलवार | विक्रम संवत: 2083 | स्थान: भारत

सनातन संस्कृति में किसी भी नए कार्य, शुभ आयोजन, मांगलिक अनुष्ठान, व्यापारिक समझौते या यात्रा को आरंभ करने से पहले दैनिक पंचांग का विशेष महत्व माना गया है। पंचांग के माध्यम से हमें सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण तथा दिन के शुभ एवं अशुभ समय (राहुकाल) की सटीक जानकारी प्राप्त होती है। आज 21 जुलाई 2026 और दिन मंगलवार है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि और गुप्त नवरात्रि के पावन प्रसंग के अंतर्गत यह दिन आध्यात्मिक साधना, आत्मसंयम और विशेष ऊर्जा का प्रतीक है। आइए विस्तार से जानते हैं आज के संपूर्ण पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं को।

पंचांग के पांच मुख्य अंग: एक नजर में

हिंदू काल-गणना पांच प्रमुख अंगों से मिलकर बनती है: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इन सभी घटकों का संयोजन दैनिक जीवन की ऊर्जा और दिशा तय करता है:

  • तिथि: आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि, जो कि साधना और व्रत की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • वार: मंगलवार (मंगल ग्रह से शासित), जो साहस, ऊर्जा, पराक्रम और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।
  • नक्षत्र: चित्रा नक्षत्र, जो रचनात्मकता, डिजाइन, और उत्कृष्टता का कारक है।
  • योग: सिद्ध योग, जो कार्यों में सफलता और सकारात्मक परिणाम देने वाला माना गया है।
  • करण: विष्टि और बव करण का प्रभाव रहेगा।

21 जुलाई 2026: विस्तृत तालिका

पंचांग पैरामिटर्स विवरण एवं समय
विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थी संवत्सर)
शक संवत 1948 (प्रभाउ)
अयन दक्षिणायन
ऋतु वर्षा ऋतु
मास (अमांत एवं पूर्णिमांत) आषाढ़ मास
पक्ष शुक्ल पक्ष
तिथि अष्टमी तिथि (विशेष: मासिक दुर्गाष्टमी एवं पार्वती जयंती)
नक्षत्र चित्रा नक्षत्र (रात 08:49 PM तक, तदुपरांत स्वाती नक्षत्र)
योग सिद्ध योग (शाम 06:25 PM तक, तदुपरांत साध्य योग)
करण विष्टि (भद्रा) शाम 04:34 PM तक, उपरांत बव करण
चंद्र राशि कन्या राशि (सुबह 07:54 AM तक, तत्पश्चात तुला राशि में प्रवेश)
सूर्य राशि कर्क राशि

सूर्य और चंद्रमा से संबंधित समय

दिन और रात की कालावधि तथा खगोलीय स्थितियों के अनुसार सूर्य और चंद्रमा का गोचर निम्नलिखित है:

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  • सूर्योदय: प्रातः लगभग 05:36 AM से 05:56 AM के मध्य (क्षेत्रीय अंतर के अनुसार)।
  • सूर्यास्त: सायं लगभग 07:10 PM से 07:18 PM के मध्य।
  • चंद्रोदय: दोपहर 12:28 PM से 12:33 PM के बीच।
  • चन्द्रास्त: रात्रि 11:35 PM से 11:53 PM के बीच।
  • दिशाशूल: उत्तर दिशा में। आज उत्तर दिशा की यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो घर से दलिया या गुड़ खाकर निकलें।

आज के शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)

किसी भी आवश्यक या मांगलिक कार्य के संपादन के लिए शुभ मुहूर्तों का चयन करना बेहद लाभकारी होता है। आज के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 PM से 12:59 PM तक। यह समय किसी भी नए कार्य की शुरुआत, अनुबंध या महत्वपूर्ण निर्णय के लिए सर्वोत्कृष्ट माना गया है।
  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:14 AM से 05:08 AM तक। यह समय ध्यान, योगाभ्यास, पठन-पाठन और आध्यात्मिक साधना के लिए श्रेष्ठ है।
  • अमृत काल: दोपहर 12:54 PM से 02:34 PM तक।
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:22 PM से 03:10 PM तक।
  • गोधूलि मुहूर्त: सायं 07:17 PM से 07:37 PM तक।

आज के अशुभ मुहूर्त एवं राहुकाल (Inauspicious Timings)

ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल और अन्य अशुभ बेलाओं के दौरान नए कार्यों को शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है ताकि किसी प्रकार की बाधा से बचा जा सके:

  • राहुकाल: अपराह्न 03:53 PM से सायं 05:36 PM तक। इस दौरान महत्वपूर्ण व्यावसायिक लेन-देन या नए कार्यों की शुरुआत से बचें।
  • यमगण्ड काल: प्रातः 09:01 AM से 10:45 AM तक।
  • गुलिक काल: दोपहर 12:27 PM से 02:10 PM तक।
  • दुर्मुहूर्त: सुबह 08:20 AM से 09:16 AM तक।
  • वर्ज्यम् काल: रात्रि 02:56 AM (22 जुलाई) से प्रातः 04:41 AM तक।

विशेष पर्व एवं व्रत: मासिक दुर्गाष्टमी और पार्वती जयंती

आज आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि होने के कारण मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत रखा जाएगा। इसके साथ ही यह दिन माता पार्वती की उपासना (पार्वती जयंती) के लिए भी विशेष रूप से समर्पित है। इस दिन मां दुर्गा और देवी पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से घर में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है। साधक इस दिन विशेष रूप से दुर्गा चालीसा, सप्तशती का पाठ और हवन आदि अनुष्ठान संपन्न कर सकते हैं।

ज्योतिषीय विश्लेषण एवं पंचांग का व्यावहारिक संदेश

आज मंगलवार का दिन और आषाढ़ शुक्ल अष्टमी का यह मेल जीवन में अनुशासन, आंतरिक शक्ति और स्पष्टता की मांग करता है। चित्रा नक्षत्र का प्रभाव बौद्धिक तीक्ष्णता, रचनात्मकता, डिजाइनिंग, संपादन और अधूरे पड़े कार्यों को सुधारने में मदद करता है। चूँकि चंद्रमा सुबह कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करेगा, इसलिए दिन के पूर्वार्ध में वित्तीय हिसाब-किताब, दस्तावेज सुधारने और छोटी-मोटी विसंगतियों को दूर करने पर ध्यान दें। उत्तरार्ध का समय कूटनीति, सहयोगात्मक चर्चाओं और आपसी संबंधों में मधुरता लाने के लिए अनुकूल रहेगा।

नोट: यह पंचांग पारंपरिक ज्योतिषीय गणनाओं और मानक सूर्य-चंद्र स्थितियों पर आधारित है। विभिन्न स्थानीय देशांतर-अक्षांशों के कारण समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।