धर्म एवं धर्मशास्त्र
आज का पंचांग: 8 सितंबर 2026, मंगलवार | भाद्रपद कृष्ण द्वादशी एवं भौम प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग
शुभ मुहूर्त, राहुकाल, चौघड़िया, पुष्य नक्षत्र, ग्रह स्थिति एवं पूजन विधि की संपूर्ण प्रामाणिक जानकारी
नई दिल्ली: आज विक्रम संवत 2083 के भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है। आज मंगलवार का दिन होने के साथ-साथ दोपहर पश्चात् त्रयोदशी तिथि का प्रवेश हो रहा है, जिससे भौम प्रदोष व्रत और वत्स द्वादशी (गोवत्स द्वादशी) का अत्यंत पवित्र एवं कल्याणकारी संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार आज शाम तक महापुष्य नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जिसके उपरांत आश्लेषा नक्षत्र प्रारंभ होगा। दैनिक कार्यों की सफलता, शुभ कार्यों के शुभारंभ तथा भगवान शिव व हनुमान जी की कृपा प्राप्ति के लिए आज का दिन अत्यंत फलदायी है।
8 सितंबर 2026: एक नज़र में आज का पंचांग
- विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थी)
- शक संवत: 1948 (पराभव)
- मास & पक्ष: भाद्रपद (पूर्णिमान्त) / श्रावण (अमान्त), कृष्ण पक्ष
- आज की तिथि: द्वादशी (दोपहर 02:42 बजे तक), उपरांत त्रयोदशी
- नक्षत्र: पुष्य (शाम 04:39 बजे तक), उपरांत आश्लेषा
- मुख्य व्रत & पर्व: भौम प्रदोष व्रत, गोवत्स द्वादशी
- प्रमुख शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त (दोपहर 11:53 से 12:44)
- अशुभ समय (राहुकाल): दोपहर 03:27 से सायं 05:01 बजे तक
सूर्योदय, सूर्यास्त एवं चंद्र स्थिति
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दैनिक पंचांग में सूर्य और चंद्रमा की गति का विशेष स्थान होता है। आज सूर्य देव सिंह राशि में स्वगृही विराजमान हैं, जबकि चंद्र देव संपूर्ण दिन-रात कर्क राशि में संचार करेंगे।
| ग्रह एवं काल घटक | समय / स्थिति | विशेष विवरण |
|---|---|---|
| सूर्योदय (Sunrise) | प्रातः 06:02 बजे | सूर्य देव सिंह राशि में स्थित |
| सूर्यास्त (Sunset) | सायं 06:35 बजे | शरद / वर्षा ऋतु का प्रभाव |
| चंद्रोदय (Moonrise) | रात 03:58 बजे (9 सितंबर) | कृष्ण पक्ष की चंद्र कलाएं |
| चंद्रास्त (Moonset) | दोपहर 04:45 बजे (8 सितंबर) | चंद्रमा कर्क राशि में |
| सूर्य राशि & नक्षत्र | सिंह राशि (पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र) | दक्षिणायन स्थिति |
तिथि, नक्षत्र, योग एवं करण का विस्तृत विवरण
पंचांग के पांच मुख्य अंग—तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण होते हैं। आज मंगलवार का दिन धार्मिक कार्यों, साधना, भूमि-भवन संबंधी चर्चा और हनुमान जी की उपासना के लिए अत्यंत उत्तम माना गया है।
| पंचांग अंग | नाम | समय अवधि |
|---|---|---|
| तिथि | कृष्ण पक्ष द्वादशी | दोपहर 02:42 बजे तक |
| तिथि (उत्तरार्द्ध) | कृष्ण पक्ष त्रयोदशी | दोपहर 02:42 से अगले दिन दोपहर तक |
| नक्षत्र | पुष्य नक्षत्र | शाम 04:39 बजे तक |
| नक्षत्र (उत्तरार्द्ध) | आश्लेषा नक्षत्र | शाम 04:39 बजे के बाद |
| योग | परिघ योग | मध्यरात्रि 12:40 बजे तक (9 सित) |
| योग (उत्तरार्द्ध) | शिव योग | मध्यरात्रि 12:40 बजे के बाद |
| करण | तैतिल करण | दोपहर 02:42 बजे तक |
| करण (उत्तरार्द्ध) | गर करण | दोपहर 02:42 से रात 01:35 बजे तक |
आज के शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)
शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य बिना किसी विघ्न-बाधा के संपन्न होते हैं। आज अभिजीत मुहूर्त और अमृत काल विशेष रूप से मांगलिक कार्यों के संचालन के लिए उत्तम हैं।
| शुभ मुहूर्त का नाम | प्रारंभ समय | समाप्ति समय |
|---|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त | प्रातः 04:31 बजे | प्रातः 05:17 बजे |
| अभिजीत मुहूर्त | दोपहर 11:53 बजे | दोपहर 12:44 बजे |
| अमृत काल | प्रातः 10:40 बजे | दोपहर 12:10 बजे |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 02:24 बजे | दोपहर 03:14 बजे |
| गोधूलि मुहूर्त | सायं 06:35 बजे | सायं 06:58 बजे |
| सर्वार्थ सिद्धि योग | शाम 04:39 बजे | अगले दिन प्रातः 06:03 बजे |
अशुभ समय एवं वर्ज्य काल (Inauspicious Timings)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल व यमगंड काल के दौरान कोई भी नया या शुभ कार्य प्रारंभ नहीं करना चाहिए।
| अशुभ काल | प्रारंभ समय | समाप्ति समय |
|---|---|---|
| राहुकाल (Rahukaal) | दोपहर 03:27 बजे | सायं 05:01 बजे |
| यमगण्ड | प्रातः 09:11 बजे | प्रातः 10:45 बजे |
| गुलिक काल | दोपहर 12:19 बजे | दोपहर 01:53 बजे |
| दुर्मुहूर्त | प्रातः 08:33 बजे | प्रातः 09:23 बजे |
दिन का चौघड़िया (Day Choghadiya)
यात्रा, व्यापारिक लेनदेन और नवीन कार्यों के लिए चौघड़िया मुहूर्त का विचार किया जाता है।
| चौघड़िया प्रकार | समय अवधि | प्रकृति / फल |
|---|---|---|
| रोग (सामान्य) | प्रातः 06:02 से 07:36 बजे | अशुभ |
| उद्वेग | प्रातः 07:36 से 09:10 बजे | अशुभ |
| चर (सामान्य) | प्रातः 09:10 से 10:45 बजे | शुभ (यात्रा हेतु) |
| लाभ (उन्नति) | प्रातः 10:45 से 12:19 बजे | अति शुभ |
| अमृत | दोपहर 12:19 से 01:53 बजे | सर्वोत्तम |
| काल | दोपहर 03:27 से सायं 05:01 बजे | अशुभ |
भौम प्रदोष व्रत एवं पूजा विधान
आज भौम प्रदोष व्रत का पावन अवसर है। मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष कहा जाता है, जो कर्ज मुक्ति, भूमि संबंधी बाधाओं के निवारण और स्वास्थ्य लाभ के लिए अचूक माना जाता है। सायं काल प्रदोष समय में भगवान शिव का जलाभिषेक करें, बेलपत्र अर्पित करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें।












