भोपाल में दौड़ेंगी ई-बसें… जानिए क्या है खासियत: दिव्यांगों के चढ़ने-उतरने के लिए हाईड्रोलिक डोर और सुरक्षा के लिए 6 सीसीटीवी कैमरे
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के नागरिकों के लिए आधुनिक और प्रदूषण मुक्त सार्वजनिक परिवहन की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया है। भोपाल में पहली बार इलेक्ट्रिक बसों (E-Buses) का ट्रायल रन आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुका है। जनप्रतिनिधियों ने भी ट्रायल रन के दौरान बस संचालन का बारीकी से जायजा लिया। राजधानी के पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए लाई गई इन बसों का अगले 5 दिनों तक अलग-अलग रूटों पर परीक्षण किया जा रहा है, ताकि संचालन में आने वाली किसी भी तकनीकी खामी का समय रहते पता लगाया जा सके।
खास बातें: ट्रायल रन के पहले दिन कोई तकनीकी दिक्कत सामने नहीं आई। बसें 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ीं और शहर की घाटियों पर भी आसानी से चढ़ गईं। अगस्त महीने से यह सेवा आम जनता के लिए सुलभ हो जाएगी!
शहर के कई निकायों तक विस्तार
इन अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसों को केवल भोपाल शहर तक ही सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसका दायरा आसपास के कई अन्य क्षेत्रों तक बढ़ाया जाएगा। इन बसों को भोपाल के अलावा फंदा, औबेदुल्लागंज, सीहोर, मंडीदीप, भोजपुर और बिलखिरिया समेत कई प्रमुख निकायों तक संचालित किए जाने की योजना है, जिससे ग्रामीण और शहरी इलाकों के बीच आवागमन बेहद सुगम हो जाएगा।
अत्याधुनिक खूबियां: दिव्यांगजनों के लिए विशेष हाईड्रोलिक डोर
महापौर मालती राय और अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने पार्षदों के साथ इन नई बसों का निरीक्षण किया और इनकी खासियतों को परखा। इन बसों की सबसे प्रमुख विशेषता दिव्यांगजनों की सुगमता के लिए तैयार किए गए हाईड्रोलिक डोर हैं।
- हाईड्रोलिक डोर और व्हीलचेयर स्पेस: इन द्वारों के जरिए दिव्यांगजन अपनी ट्रायसिकल और व्हीलचेयर सहित आसानी से बस के अंदर आ-जा सकेंगे। बस के भीतर हाईड्रोलिक डोर के ठीक सामने इतनी पर्याप्त जगह छोड़ी गई है कि एक साथ दो व्हीलचेयर या ट्रायसिकल पार्क की जा सकें। सार्वजनिक परिवहन के इतिहास में पहली बार भोपाल में इस तरह की विशेष सुविधा दी जा रही है।
- सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम: यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए प्रत्येक बस के अंदर कुल 6 हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिससे हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा सकेगी।
- कॉम्पैक्ट साइज और ट्रैफिक फ्रेंडली: इन ई-बसों की लंबाई 9 मीटर और चौड़ाई करीब साढ़े 3 मीटर है। वर्तमान में शहर में चल रही पुरानी सिटी बसों की लंबाई 12 मीटर तक होती है, जिसके कारण कई बार वे संकीर्ण सड़कों और भारी ट्रैफिक में फंस जाती हैं। छोटी साइज होने के कारण ये बसें तंग रास्तों पर भी आसानी से निकल सकेंगी।
कैबिनेट बैठक में भी हुआ था उपयोग
हाल ही में, ट्रायल रन से एक दिन पहले जगदीशपुर में आयोजित कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने इन्हीं ई-बसों के जरिए सफर कर ऐतिहासिक स्थल तक पहुंच दर्ज कराई थी। मंत्रियों और अधिकारियों द्वारा खुद इन बसों में सफर करने से प्रशासनिक स्तर पर भी इस हरित पहल को बड़ा प्रोत्साहन मिला है।
संचालन का समय और निर्धारित रूट
ट्रायल अवधि के दौरान बसों का संचालन प्रतिदिन दो प्रमुख शिफ्टों में किया जा रहा है:
- प्रथम शिफ्ट: सुबह 8:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक।
- द्वितीय शिफ्ट: दोपहर 2:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक।
पुराने भोपाल से कोलार तक जुड़ेगा रूट: इलेक्ट्रिक बसों को बैरागढ़ डिपो से निकालकर पुराने भोपाल के विभिन्न क्षेत्रों से होते हुए बोर्ड ऑफिस तक ले जाया जा रहा है। इसके बाद ये बसें भोपाल रेलवे स्टेशन (प्लेटफॉर्म नंबर-1) और कोलार के बैरागढ़ चीचली रूट तक चलाई जाएंगी। ट्रायल के दौरान इन सभी मार्गों पर यातायात के दबाव और संचालन में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों का सूक्ष्म आकलन किया जा रहा है।
बेड़े में शामिल हुई 21 बसें, 20 और नई बसों का इंतजार
एमआईसी मेंबर मनोज राठौर ने जानकारी दी है कि भोपाल को अब तक कुल 21 इलेक्ट्रिक बसें मिल चुकी हैं। इसके अलावा, अगले 10 से 12 दिनों के भीतर लगभग 20 और नई ई-बसों के शहर में पहुंचने की पूरी उम्मीद है। इसके बाद राजधानी में इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा और अधिक मजबूत हो जाएगा।
बसों के सुचारू रखरखाव और चार्जिंग के लिए बैरागढ़ डिपो में आधुनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया गया है। यहां कुल 11 हाई-पावर चार्जर पॉइंट स्थापित किए गए हैं, ताकि नियमित संचालन शुरू होने पर किसी भी बस को ऊर्जा या चार्जिंग संबंधी समस्याओं का सामना न करना पड़े।
ट्रायल के दौरान जनप्रतिनिधियों ने लिया जायजा
ट्रायल रन के पहले दिन मेयर और अध्यक्ष सहित कई पार्षदों ने बसों में सफर कर व्यवस्थाओं का मुआयना किया। लिंक रोड नंबर-2 स्थित निगम मुख्यालय से शुरू होकर वीआईपी रोड, लालघाटी और कोहेफिजा होते हुए बसें लगभग एक घंटे में वापस मुख्यालय पहुंचीं। इस दौरान रास्ते में जनप्रतिनिधियों ने वीआईपी रोड पर पारंपरिक व्यंजनों जैसे ‘चना जोर गरम’ और भुट्टे का भी आनंद उठाया।
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, 5 दिनों के इस ड्राई रन के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद अगस्त के महीने से आम यात्रियों के लिए इन पर्यावरण-अनुकूल इलेक्ट्रिक बसों का व्यावसायिक संचालन विधिवत शुरू कर दिया जाएगा।
Praveen
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