राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन: जिला पंचायत सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने वाड्रफनगर में स्वयं सहायता समूहों की आजीविका गतिविधियों का किया सघन निरीक्षण
छत्तीसगढ़ शासन के महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में गठित स्वयं सहायता समूहों (SHG) की आजीविका गतिविधियों को अधिक सुदृढ़, टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने के लिए प्रशासन द्वारा निरंतर जमीनी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने मैदानी स्तर पर पहुंचकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की स्थिति का जायजा लिया। अपने इस दौरे के दौरान उन्होंने जनपद पंचायत वाड्रफनगर के विभिन्न ग्रामों का सघन दौरा किया और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा संचालित विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों का बारीकी से अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने समूहों को उनकी आय में वृद्धि करने, उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने और उनके व्यवसाय का दायरा बढ़ाने के संबंध में बहुमूल्य मार्गदर्शन भी प्रदान किया।
ग्राम अलका में संस्कार महिला स्वयं सहायता समूह के तेल मिल का अवलोकन
दौरे के शुरुआती चरण में जिला पंचायत सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने ग्राम पंचायत अलका का दौरा किया। यहां उन्होंने ‘संस्कार महिला स्वयं सहायता समूह’ की महिलाओं द्वारा संचालित लघु तेल मिल इकाई का विशेष रूप से निरीक्षण किया। ग्रामीण महिलाओं द्वारा इस प्रकार के तकनीकी और उत्पादन आधारित रोजगार को अपनाए जाने पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने मिल के संचालन की संपूर्ण प्रक्रिया की एक-एक बारीकी की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने समूह की सदस्यों से कच्चे माल की स्थानीय स्तर पर उपलब्धता, तेल उत्पादन की दैनिक व मासिक क्षमता तथा इकाई के कुल आय-व्यय (बैलेंस शीट) के संबंध में विस्तृत चर्चा की। डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि ग्रामीण उद्योगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्थानीय संसाधनों का अधिकतम उपयोग बेहद जरूरी है।
ग्राम मानपुर में एकता महिला स्वयं सहायता समूह की किराना दुकान का निरीक्षण
ग्राम अलका के बाद जिला पंचायत सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने ग्राम मानपुर का रुख किया। वहां उन्होंने ‘एकता महिला स्वयं सहायता समूह’ की सदस्य ललिता द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से प्राप्त ऋण (लोन) की सहायता से सफलतापूर्वक संचालित की जा रही किराना दुकान का मुआयना किया। उन्होंने दुकान के भीतर जाकर दैनिक बिक्री के आंकड़ों, स्टॉक प्रबंधन (स्टॉक मैनेजमेंट) और दुकान की वार्षिक आय-व्यय के बारे में जानकारी ली।
ललिता द्वारा चलाए जा रहे इस छोटे से उपक्रम की सराहना करते हुए सीईओ ने व्यवसाय को भविष्य में और अधिक ऊंचाई पर ले जाने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि ग्राहकों की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दुकान के उत्पादों में विविधता लाई जानी चाहिए। इसके अलावा, ग्राहकों को अधिक संख्या में आकर्षित करने के लिए दुकान के आंतरिक और बाहरी हिस्से का जीर्णोद्धार करने तथा दुकान के सुव्यवस्थित एवं पेशेवर संचालन के तौर-तरीकों पर जोर दिया।
ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना मुख्य ध्येय
इस पूरे दौरे के दौरान जिला पंचायत सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने ग्रामीण आजीविका मिशन के मूल उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मिशन का मुख्य उद्देश्य केवल महिलाओं को समूहों से जोड़ना भर नहीं है, बल्कि उन्हें पूर्ण रूप से आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाना है।
उन्होंने बताया कि:
- स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित छोटे-बड़े व्यवसायों को केवल स्थानीय हाट-बाजारों या गांवों तक ही सीमित नहीं रखा जाएगा।
- इन ग्रामीण उद्यमियों के उत्पादों को व्यापक बाजार, डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक व्यावसायिक नेटवर्क से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन स्तर पर लगातार सतत प्रयास किए जा रहे हैं।
- व्यवसायों के विस्तार से न केवल व्यक्तिगत तौर पर समूहों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, बल्कि संपूर्ण ग्रामीण आंचल की आर्थिक स्थिति और अधिक मजबूत और सुदृढ़ हो सकेगी।
भ्रमण के अंत में स्थानीय ग्रामीण महिलाओं और समूह की सदस्यों ने जिला पंचायत सीईओ द्वारा खुद मैदान में उतरकर उनका मार्गदर्शन करने तथा उनकी समस्याओं को सुनकर उनका समाधान सुझाने के लिए आभार व्यक्त किया। इस प्रकार के निरंतर प्रशासनिक दौरों से ग्रामीण स्तर पर संचालित आजीविका गतिविधियों को एक नई गति और दिशा मिल रही है।













