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जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप पर कांग्रेस का हमला: तेलंगाना-बिहार की तर्ज पर ‘ड्रॉपडाउन सूची’ लागू करने की मांग | Pradesh Khabar






मोदी सरकार की नीयत में खोट, जातिगत जनगणना का मौजूदा प्रारूप दोषपूर्ण: नाना पटोले | Pradesh Khabar


जातिगत जनगणना का मौजूदा प्रारूप दोषपूर्ण, मोदी सरकार की नीयत में खोट: कांग्रेस का बड़ा हमला; तेलंगाना-बिहार की तर्ज पर ‘ड्रॉपडाउन सूची’ लागू करने की मांग

रायपुर (छत्तीसगढ़)

प्रमुख बिंदु (Key Highlights)

  • महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नाना भाऊ पटोले ने दीपक बैज और डॉ. चरणदास महंत की उपस्थिति में पत्रकार वार्ता को किया संबोधित।
  • केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित जातिगत जनगणना प्रश्नावली के प्रश्न क्रमांक 10 में ‘ओपन-एंडेड’ विकल्प को बताया बड़ी साजिश।
  • मांग: तेलंगाना और बिहार की तर्ज पर प्रमाणित जातियों की ‘ड्रॉपडाउन सूची’ के आधार पर नई प्रश्नावली तैयार की जाए।
  • ‘ओपन-एंडेड’ सवाल से एक ही जाति के लाखों अलग-अलग नाम दर्ज होंगे, जिससे ओबीसी और ईबीसी डेटा पूरी तरह अव्यवहारिक हो जाएगा।
  • गलत आंकड़ों से “जितनी आबादी, उतना हक” और सामाजिक न्याय का आधार होगा कमजोर; पिछड़े वर्ग के अधिकार होंगे प्रभावित।
  • कांग्रेस नेताओं ने कहा— पिछड़े, शोषित और वंचित समाज की हक की लड़ाई से पीछे नहीं हटेगी पार्टी; सरकार को सुधारना होगा प्रारूप।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष नाना भाऊ पटोले ने छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा घोषित जातिगत जनगणना का मौजूदा प्रारूप पूरी तरह से दोषपूर्ण और भ्रामक है, जिससे साफ पता चलता है कि देश में पारदर्शी और सही जातिगत जनगणना कराने को लेकर सरकार की नीयत साफ नहीं है।

कांग्रेस पार्टी ने मौजूदा प्रारूप और उसकी विवादित प्रश्नावली को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि तेलंगाना और बिहार में अपनाई गई सफल पद्धति की तर्ज पर जातियों की प्रमाणित सूची (ड्रॉपडाउन सूची) के आधार पर नई प्रश्नावली तैयार की जानी चाहिए। इसके साथ ही राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और आम जनता के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही नया खाका तैयार किया जाए ताकि देश में सामाजिक न्याय का वास्तविक आधार तैयार हो सके।

नाना भाऊ पटोले का केंद्र सरकार पर सीधा हमला:
“आगामी जनगणना के लिए अधिसूचित 40 प्रश्नों में से सवाल नंबर 10 ही यह साबित करने के लिए काफी है कि मोदी सरकार जातिगत जनगणना कराने से भाग रही है। इस सवाल में ‘ओपन-एंडेड’ (खुला प्रारूप) विकल्प रखा गया है, जबकि वहां प्रमाणित जातियों की पूर्व-निर्धारित ‘ड्रॉपडाउन सूची’ का होना बेहद अनिवार्य था। यह कोई साधारण चूक नहीं, बल्कि ओबीसी, ईबीसी और वंचित वर्गों के अधिकारों पर डाका डालने की सोची-समझी साजिश है।”

‘ओपन-एंडेड’ सवाल से क्यों निष्फल हो जाएगी पूरी गणना?

संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने विधिक और तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ड्रॉपडाउन सूची में सरकार द्वारा मान्य जातियों की एक तय सूची पहले से ही सिस्टम में दर्ज होती है, जहां गणनाकार नागरिक से पूछकर सही विकल्प चुनता है। इसके विपरीत, ओपन-एंडेड सवाल में कोई तय सूची नहीं होती; नागरिक अपनी जाति, उपजाति या क्षेत्रीय नाम जो भी बताएगा, गणनाकार उसे स्पेलिंग सहित फॉर्म में लिख लेगा।

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ओपन-एंडेड प्रारूप के घातक परिणाम:

  • लाखों फर्जी व अलग नाम: भारत में एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में कई उपनामों, बोलियों और स्पेलिंग के अंतर से जानी जाती है। सूची न होने से देश भर में एक ही जाति के लाखों नाम दर्ज हो जाएंगे।
  • आंकड़ों में भारी विसंगति: आंकड़ों का वर्गीकरण (Classification) असंभव हो जाएगा और पूरी गणना से प्राप्त डेटा पूरी तरह से अनुपयोगी और अव्यवहारिक सिद्ध होगा।
  • ओबीसी शब्द ही गायब: सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि केंद्र सरकार की इस पूरी प्रश्नावली में ‘पिछड़ा वर्ग’ (OBC) शब्द तक को शामिल नहीं किया गया है।

ओबीसी-ईबीसी और वंचित वर्गों को चुकानी होगी बड़ी कीमत

नाना भाऊ पटोले ने चेताया कि गलत तरीके से होने वाली इस जाति जनगणना का सबसे भारी खामियाजा देश के अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अति पिछड़े वर्ग (EBC) और शोषित-वंचित समुदायों को भुगतना पड़ेगा। यदि एक ही जाति दर्जनों टुकड़ों में बंट गई, तो ओबीसी की वास्तविक जनसंख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक वंचना दोनों ही कागजों पर अदृश्य हो जाएंगी।

इसके परिणामस्वरूप—

  • “जितनी आबादी, उतना हक” का सिद्धांत कमजोर होगा: आरक्षण की न्यायसंगत समीक्षा का कानूनी और संवैधानिक आधार ध्वस्त हो जाएगा।
  • वंचित जातियां छूट जाएंगी पीछे: कौन-सी ओबीसी जातियां आज भी आरक्षण और सरकारी लाभों से वंचित हैं, इसका सही आकलन कभी नहीं हो पाएगा।
  • कल्याणकारी योजनाओं में रुकावट: विश्वसनीय आंकड़े न होने पर शिक्षा, छात्रवृत्ति, कौशल विकास, सरकारी नौकरियों और बजटीय आवंटन में लक्षित हिस्सेदारी तय करना असंभव हो जाएगा।
  • संवैधानिक संस्थानों में प्रतिनिधित्व की कमी: लोकसभा, विधानसभा, नौकरशाही, उच्च न्यायपालिका और कॉर्पोरेट नेतृत्व में पिछड़े वर्गों की वास्तविक भागीदारी का प्रमाणिक डेटा रेखांकित नहीं हो सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर भी मुकरी सरकार:
कांग्रेस ने याद दिलाया कि 21 सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट में दायर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के हलफनामे में खुद केंद्र सरकार ने स्वीकार किया था कि जातिगत जनगणना के लिए पहले से जातियों की ड्रॉपडाउन सूची होना आवश्यक है। देश में करीब 4,200 जातियां हैं, जिनकी सूचियां केंद्र और राज्यों के पास उपलब्ध हैं। इसके बावजूद राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सूची को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया।

राहुल गांधी और खरगे की मांग पर दबाव में लिया था फैसला

पत्रकार वार्ता में बताया गया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार सही जातिगत जनगणना की मांग उठा रहे हैं। खरगे ने 16 अप्रैल 2023 और 5 मई 2025 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखे थे, जबकि 20 अगस्त को खरगे और राहुल गांधी ने संयुक्त पत्र भेजकर मौजूदा प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई थी।

शुरुआत में इस मांग को ‘अर्बन नक्सल सोच’ बताने वाली मोदी सरकार को चौतरफा दबाव के बाद मजबूरी में 30 अप्रैल 2025 को यू-टर्न लेते हुए 2027 से जातिगत जनगणना कराने का ऐलान करना पड़ा था। हालांकि, प्रक्रिया शुरू होते ही सरकार की नियत पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

कांग्रेस का अल्टीमेटम: सरकार के पास अभी भी सुधार का मौका

कांग्रेस नेताओं ने रेखांकित किया कि वर्तमान में जातिगत जनगणना की प्रक्रिया केवल जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में शुरू हुई है, जबकि देशव्यापी गणना फरवरी 2027 से प्रस्तावित है। ऐसे में मोदी सरकार के पास अभी भी प्रारूप में आवश्यक संशोधन करने का पर्याप्त समय है।

कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह पिछड़ों, दलितों, आदिवासियों और शोषित समाज के अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेगी। पार्टी पूरे देश में पारदर्शी, निष्पक्ष और ‘ड्रॉपडाउन आधारित’ सही जातिगत जनगणना कराने के लिए सरकार को बाध्य करने हेतु चरणबद्ध आंदोलन जारी रखेगी।


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