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कुसमी ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष विजय पैकरा ने दी विश्व आदिवासी दिवस की भव्य शुभकामनाएं






कुसमी के ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष विजय पैकरा ने क्षेत्रवासियों को दी विश्व आदिवासी दिवस की ऐतिहासिक और भव्य शुभकामनाएं


कुसमी के ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष विजय पैकरा ने क्षेत्रवासियों को दी विश्व आदिवासी दिवस की ऐतिहासिक और भव्य शुभकामनाएं

स्थान: बलरामपुर, छत्तीसगढ़ | जारीकर्ता: प्रदेश खबर डेस्क

बलरामपुर, छत्तीसगढ़: विश्व आदिवासी दिवस (International Day of the World’s Indigenous Peoples) के पावन और ऐतिहासिक अवसर पर बलरामपुर जिले के कुसमी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय पैकरा ने संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य, बलरामपुर जिले और विशेष तौर पर कुसमी विकासखंड के समस्त आदिवासी भाइयों-बहनों, माताओं, युवाओं एवं क्षेत्रवासियों को हार्दिक बधाई, आत्मीय शुभकामनाएं और जोहार प्रेषित किया है।

अपने शुभकामना संदेश में पैकरा ने आदिवासी समाज की महान संस्कृति, उनकी समृद्ध परंपराओं, जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए उनके ऐतिहासिक संघर्षों और देश के निर्माण में उनके अतुलनीय योगदान को रेखांकित किया है। उन्होंने इस विशेष दिन को समाज के स्वाभिमान, अस्मिता और अधिकारों के पुनर्जागरण का दिन बताया है।

विश्व आदिवासी दिवस का ऐतिहासिक महत्व और प्रासंगिकता

अपने विस्तृत संदेश में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष विजय पैकरा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) द्वारा हर वर्ष 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के रूप में मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के मूल निवासियों (Indigenous Peoples) के अधिकारों की रक्षा करना, उनकी संस्कृति को संरक्षित करना और उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज केवल एक समुदाय नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व (Co-existence) का सबसे अनूठा और जीवंत उदाहरण है। सदियों से आदिवासियों ने पर्यावरण, वनों और वन्यजीवों को अपनी संतान की तरह पाला है और उनकी रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया है। आज जब पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संकट से जूझ रही है, तब आदिवासी समाज की जीवन शैली और उनके पारंपरिक मूल्य पूरी मानवता के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं.

छत्तीसगढ़ की संस्कृति और पहचान का आधार है आदिवासी समाज

पैकरा ने अपने संदेश में छत्तीसगढ़ राज्य की संस्कृति का जिक्र करते हुए कहा कि हमारा यह प्रदेश आदिवासी संस्कृति और उसकी गौरवशाली परंपराओं की धनी भूमि है। यहाँ के कण-कण में आदिवासी संस्कृति रमी हुई है।

  • संस्कृति और कला: सरगुजा से लेकर बस्तर तक, यहाँ के लोक नृत्य (जैसे कर्मा, सरहुल, गड़वा बाजा), लोक गीत, पारंपरिक पर्व और कला-शिल्प पूरी दुनिया में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कर रहे हैं।
  • साहस और बलिदान: छत्तीसगढ़ का इतिहास वीर आदिवासी सेनानियों के बलिदान के बिना अधूरा है। चाहे वह ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ हुआ परलकोट विद्रोह, बस्तर का महान विद्रोह, या फिर महान स्वतंत्रता सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह और गुण्डाधूर का संघर्ष रहा हो, आदिवासियों ने हमेशा देश की स्वतंत्रता और अपनी माटी की आन-बान-शान के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दी है।

कांग्रेस पार्टी हमेशा आदिवासियों के अधिकारों के लिए समर्पित: विजय पैकरा

कांग्रेस पार्टी की विचारधारा और नीतियों पर प्रकाश डालते हुए ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष विजय पैकरा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और आदिवासी समाज का रिश्ता बहुत पुराना और अटूट है। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर, भारत रत्न इंदिरा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने हमेशा आदिवासियों के उत्थान को अपनी प्राथमिकताओं में रखा है।

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उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में जब-जब कांग्रेस की सरकार रही है, तब-तब आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों को मजबूत करने का काम किया गया है:

  1. पैसा कानून (PESA Act) का प्रभावी क्रियान्वयन: आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को उनके अधिकारों का सर्वोच्च मालिक बनाना।
  2. वन अधिकार पत्र (Forest Rights Act): पारंपरिक वनवासियों को उनकी उपजाऊ और काश्तकारी भूमि के पट्टे प्रदान करना ताकि उन्हें कोई बेदखल न कर सके।
  3. लघु वनोपज की समर्थन मूल्य पर खरीदी: आदिवासियों की आजीविका को मजबूत करने के लिए महुआ, इमली, चार, तेंदूपत्ता सहित दर्जनों लघु वनोपजों को समर्थन मूल्य के दायरे में लाना और उनका बेहतर मूल्य दिलाना।
  4. रामायण गद्दी और आदिवासी पर्व सम्मान: छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, देवगुड़ी और घोटूल संस्कृति का संरक्षण और सौंदर्यीकरण करना।
  5. शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं: दुरंत और अंचल के आदिवासी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए एकलव्य विद्यालयों और आश्रम-छात्रावासों का सुदृढ़ीकरण।

कुसमी क्षेत्र के विकास और आदिवासी कल्याण के लिए प्रतिबद्धता

कुसमी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए विजय पैकरा ने कहा कि कुसमी और समग्र बलरामपुर जिला आदिवासी बहुल क्षेत्र है। यहाँ की भौगोलिक परिस्थितियाँ और चुनौतियाँ अलग हैं, लेकिन क्षेत्र के विकास के लिए हमारी नीयत और नीति बिल्कुल साफ है।

“हमारा यह संकल्प है कि कुसमी ब्लॉक का कोई भी आदिवासी परिवार विकास की रोशनी से अछूता न रहे। क्षेत्र के हर गांव तक सड़क, बिजली, शुद्ध पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना हमारा मुख्य लक्ष्य है। हम आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों, उनकी जमीन की सुरक्षा और उनके रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष करते रहेंगे।” – विजय पैकरा

पैकरा ने कुसमी क्षेत्र के युवाओं से अपील करते हुए कहा कि आज के इस प्रतिस्पर्धात्मक युग में शिक्षा ही सबसे बड़ा हथियार है। हमारी युवा पीढ़ी को अपनी परंपराओं और संस्कृति से जुड़े रहते हुए आधुनिक शिक्षा, तकनीक और कौशल विकास (Skill Development) के क्षेत्र में आगे आना चाहिए ताकि वे अपने समाज और देश का नाम रोशन कर सकें.

नशा मुक्ति और सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान

इस पावन अवसर पर विजय पैकरा ने आदिवासी समाज के नाम एक संदेश जारी करते हुए समाज के भीतर फैली कुछ कुप्रथाओं और नशीले पदार्थों के सेवन के खिलाफ भी मुखर होकर बात की। उन्होंने कहा कि नशा समाज, परिवार और युवा पीढ़ी की सबसे बड़ी बर्बादी का कारण बन रहा है।

उन्होंने समाज के बुजुर्गों, बुद्धिजीवियों, महिलाओं और युवाओं से आग्रह किया कि वे मिलकर समाज को नशा मुक्त बनाने का संकल्प लें। शिक्षा के प्रसार और कुप्रथाओं के खात्मे के बिना एक सशक्त और समृद्ध समाज की कल्पना नहीं की जा सकती।

भव्य आयोजनों और उत्सवों की अपील

विश्व आदिवासी दिवस के दिन कुसमी विकासखंड के विभिन्न ग्राम पंचायतों, मेलों और सभाओं में होने वाले आयोजनों की सराहना करते हुए पैकरा ने सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं और क्षेत्रवासियों से अपील की कि वे इन आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। उन्होंने कहा कि यह दिन जश्न मनाने के साथ-साथ अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने और समाज के हर व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लाने का संकल्प लेने का दिन है।

अंत में, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष विजय पैकरा ने एक बार फिर समस्त क्षेत्रवासियों को विश्व आदिवासी दिवस की अनंत बधाइयां देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, उज्ज्वल भविष्य और खुशहाली की कामना की।

“जय जोहार! जय छत्तीसगढ़! जय आदिवासी!”


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