शिक्षकों की कमी से पढ़ाई ठप और जंगलराज से थर्राया प्रदेश, दीपक बैज का सरकार पर तीखा प्रहार
रायपुर, 18 अगस्त 2026: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए राज्य सरकार पर करारा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदहाल हो चुकी है और कानून व्यवस्था की स्थिति अब असहनीय स्तर तक पहुंच गई है। स्कूलों में शिक्षकों व भवनों की कमी के कारण छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं, वहीं प्रदेश में आए दिन हो रहे जघन्य अपराधों से आम नागरिक खौफ के साये में जीने को मजबूर है।
- धमतरी, बालोद और धमधा में शिक्षक व स्कूल भवन की मांग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन।
- पूरे प्रदेश के स्कूलों में किताबों और पर्याप्त शिक्षकों के अभाव से पढ़ाई प्रभावित।
- राजधानी रायपुर में कमिश्नरी सिस्टम पूरी तरह विफल होने का आरोप।
- प्रदेश में रोजाना औसतन 6 हत्याएं और 8 बलात्कार की घटनाएं होने का दावा।
- गृह मंत्री और मुख्यमंत्री पर प्रशासनिक असफलता और फोटोसेशन में व्यस्त रहने का आरोप।
शिक्षकों और भवनों की कमी: आंदोलन करने को मजबूर नौनिहाल
दीपक बैज ने कहा कि राज्य के स्कूलों में शिक्षकों और बुनियादी ढांचे की भारी कमी है। धमतरी के बारना स्कूल में पांच विषयों के शिक्षक न होने से छात्राओं ने स्कूल में ताला जड़कर प्रदर्शन किया। इसी तरह बालोद के झिरिया टोला में बच्चे शिक्षकों की मांग को लेकर सड़कों पर आए और धमधा में भवन निर्माण की मांग को लेकर छात्र विरोध जता रहे हैं। किताबों और शिक्षकों की कमी ने पूरे प्रदेश में बच्चों के भविष्य को अंधकारमय बना दिया है।
प्रदेश में कानून व्यवस्था ध्वस्त, रोजाना हो रहे संगीन अपराध
कानून व्यवस्था पर बोलते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अपराध का ग्राफ बेकाबू हो चुका है। राजधानी में महिला की हत्या कर शव के साथ दुराचार की दिल दहला देने वाली घटना और एक महिला के साथ एक ही दिन में दो बार गैंगरेप जैसी वारदातें कानून-व्यवस्था की पोल खोलती हैं। राजनांदगांव के चिखली में घर में घुसकर हत्या की गई। रायपुर में पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है।
गृह मंत्री और मुख्यमंत्री को जनता की सुरक्षा की चिंता नहीं
बैज ने आरोप लगाया कि प्रदेश में हर दिन औसतन 6 हत्याएं और 8 दुष्कर्म की घटनाएं हो रही हैं। इसके बावजूद मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को केवल फोटोसेशन कराने से फुर्सत नहीं है। सरकार की प्राथमिकताओं में आम जनता की सुरक्षा और बच्चों का भविष्य शामिल ही नहीं है।
















