प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया जी की जयंती पर अर्पित की श्रद्धांजलि, राष्ट्रसेवा के उनके योगदान को किया नमन
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारतीय राजनीति की प्रखर पुरोधा, त्याग और समर्पण की प्रतिमूर्ति तथा जनसेवा की मिसाल रहीं राजमाता विजयाराजे सिंधिया जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। इस अवसर पर प्रधान मंत्री ने राष्ट्र के प्रति उनके अतुलनीय योगदान को याद किया और इस बात पर विशेष बल दिया कि उनके आदर्श और विचार देश के विकसित भारत के संकल्प को नई ऊर्जा और गति प्रदान कर रहे हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए विचार
देश के यशस्वी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विशेष संदेश साझा करते हुए राजमाता विजयाराजे सिंधिया के जीवन और कृतित्व को याद किया। उन्होंने अपने आधिकारिक हैंडल से पोस्ट करते हुए लिखा:
“राजमाता विजयाराजे सिंधिया जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन। राष्ट्रसेवा के प्रति उनका त्याग और समर्पण हर किसी के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके आदर्श और विचार विकसित भारत के संकल्प को भी नई ऊर्जा प्रदान करने वाले हैं।”
राष्ट्र निर्माण और त्याग का एक अद्वितीय अध्याय
राजमाता विजयाराजे सिंधिया का जीवन भारतीय लोकतंत्र और स्वतंत्रता के बाद के राजनीतिक इतिहास में उस स्वर्णिम अध्याय की तरह है, जिसने सत्ता के सुख और वैभव को त्यागकर जनहित और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। उनका संपूर्ण जीवन सेवा, सादगी और राष्ट्र के प्रति अगाध निष्ठा का पर्याय रहा है। आपातकाल के काले दौर के दौरान उन्होंने जिस प्रकार लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए साहसिक संघर्ष किया और दमनकारी नीतियों के सामने डटकर खड़ी रहीं, वह भारतीय इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
प्रधान मंत्री मोदी द्वारा उनके स्मरण को विकसित भारत के संकल्प से जोड़ना इस बात का परिचायक है कि आधुनिक भारत के निर्माण में हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्र निर्माताओं के मूल्य आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने कल थे। राजमाता के विचार आज की युवा पीढ़ी और राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं को राष्ट्र सेवा के लिए निरंतर प्रेरित करते हैं।
“राजमाता विजयाराजे सिंधिया का तपस्वी जीवन साहस, दया, और संरक्षण का ऐसा प्रतीक है, जो हर नागरिक को राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ काम करने की प्रेरणा देता है।”
विकसित भारत के संकल्प और राजमाता की प्रेरणा
आज जब भारत वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, तब देश के दूरदर्शी नेतृत्व द्वारा ऐसे महान व्यक्तित्वों के आदर्शों को स्मरण करना अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। प्रधान मंत्री मोदी ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत का निर्माण केवल बुनियादी ढांचे या आर्थिक प्रगति से संभव नहीं है, इसके लिए मजबूत नैतिक मूल्यों, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र-समर्पण की आवश्यकता होती है, जो राजमाता विजयाराजे सिंधिया के जीवन का मूल मंत्र था।
राजमाता विजयाराजे सिंधिया के जीवन के प्रमुख पहलू:
- भारतीय जनता पार्टी की सह-संस्थापक: जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विस्तार और सुदृढ़ीकरण में उनका ऐतिहासिक योगदान रहा।
- मूल्यों की राजनीति: उन्होंने हमेशा सत्ता की लालसा से दूर रहकर जनसेवा और गरीबों के उत्थान को प्राथमिकता दी।
- आपातकाल का विरोध: लोकतंत्र की रक्षा के लिए उन्होंने तानाशाही रवैये के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया और कई कठिनाइयों का सामना किया।
- सामाजिक सरोकार: शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण के कार्यों में उनका योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा।
देशभर में दी जा रही हैं श्रद्धांजलि
राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जयंती के अवसर पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा देश के कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और गणमान्य नागरिकों ने भी उन्हें याद किया। विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि सभाओं और गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें उनके जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला जा रहा है।
यह दिन केवल एक महान हस्ती की जयंती का स्मरण मात्र नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्लेषण करने का भी अवसर है कि हम राष्ट्र सेवा के मार्ग पर चलकर उनके सपनों के भारत को साकार करने में अपना क्या योगदान दे सकते हैं।













