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शुक्र प्रदोष व्रत आज: जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, पंचांग और राशि अनुसार अचूक उपाय






प्रदेश खबर – व्रत एवं त्योहार महा-विशेषांक | शुक्र प्रदोष व्रत, पंचांग एवं धार्मिक समाचार


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धार्मिक विशेषांक | दैनिक पंचांग, व्रत-त्योहार, ज्योतिष एवं सनातन संस्कृति की विस्तृत रिपोर्ट

दिनांक: 23 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार)
स्थान: नई दिल्ली / मध्य प्रदेश / छत्तीसगढ़
श्रेणी: धर्म, पंचांग एवं संस्कृति

आश्विन शुक्ल त्रयोदशी विशेषांक: शुक्र प्रदोष व्रत और पापांकुशा एकादशी पारण का दुर्लभ महासंयोग

नई दिल्ली / प्रदेश खबर ब्यूरो: सनातन पंचांग और वैदिक काल गणना के अनुसार आज 23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार का दिन अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष फलदायी सिद्ध हो रहा है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का पावन अवसर है और आज ही भगवान आशुतोष महादेव को समर्पित शुक्र प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। इसके अतिरिक्त, बीते दिवस रखे गए अति फलदायी पापांकुशा एकादशी व्रत का पारण भी आज ही के दिन विधि-विधान के साथ संपन्न हो रहा है। शरद ऋतु के इस सुहाने वातावरण में देश भर के प्रमुख देवालयों, शिवालयों और वैष्णव तीर्थों में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ रहा है।

आज के इस विस्तृत समाचार बुलेटिन में हम अपने सम्मानित पाठकों के लिए लाए हैं पंचांग की बारीक गणनाएं, प्रदोष काल का सटीक शुभ मुहूर्त, शुक्र प्रदोष व्रत के कथा-महात्म्य, पूजा की प्रामाणिक विधियां, वैदिक मंत्र जाप, और साथ ही आगामी त्योहारों जैसे शरद पूर्णिमा, करवा चौथ और धनतेरस की पूर्व तैयारियों का संपूर्ण आध्यात्मिक ब्योरा।

📌 आज के मुख्य बिंदु एक नज़र में:

  • मुख्य व्रत: शुक्र प्रदोष व्रत (आश्विन शुक्ल त्रयोदशी)
  • विशेष अनुष्ठान: पापांकुशा एकादशी व्रत पारण (प्रातः काल)
  • प्रमुख पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल सायं 05:44 PM से रात्रि 08:16 PM तक
  • विशेष योग: ध्रुव योग और रवि योग का शुभ संयोग
  • राशि स्थिति: चंद्रमा कुंभ राशि में, सूर्य तुला राशि में संचरणरत

1. आज का सम्पूर्ण वैदिक पंचांग (23 अक्टूबर 2026)

ज्योतिषीय गणना और पंचांग सिद्धान्तों के अनुसार, समय की सूक्ष्म इकाइयों का विवरण इस प्रकार है:

पंचांग घटक समय / विवरण
विक्रम संवत 2083 (कील नाम संवत्सर)
शक संवत 1948 (क्रोधन)
मास आश्विन (शुक्ल पक्ष)
तिथि द्वादशी तिथि दोपहर 02:36 PM तक, तत्पश्चात त्रयोदशी तिथि आरंभ
दिन शुक्रवार (भगवान विष्णु, लक्ष्मीजी और शुक्र देव का दिन)
नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र रात्रि 09:03 PM तक, उपरांत उत्तराभाद्रपद
योग ध्रुव योग रात्रि 10:09 PM तक, तत्पश्चात व्याघात योग
करण बव करण दोपहर 02:36 PM तक, बालव करण तदोपरांत
सूर्य और चंद्रमा स्थिति सूर्य तुला राशि में, चंद्रमा कुंभ राशि में विराजमान
ऋतु शरद ऋतु

2. शुभ एवं अशुभ समय सारणी (मुहूर्त विचार)

शास्त्रों के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य, नए उद्यम, संपत्ति क्रय या धार्मिक अनुष्ठान के लिए शुभ मुहूर्त का चयन अत्यंत आवश्यक माना जाता है। वहीं दूसरी ओर, अशुभ समय में कोई भी मंगल कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।

शुभ मुहूर्त समय:

  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:45 AM से प्रातः 05:36 AM तक (ईश्वर ध्यान और योग हेतु सर्वोत्तम)
  • प्रातः संध्या: प्रातः 05:10 AM से प्रातः 06:27 AM तक
  • अभिजित मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:43 AM से दोपहर 12:28 PM तक (सर्वश्रेष्ठ कार्य सिद्धि मुहूर्त)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 01:58 PM से दोपहर 02:43 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त: सायं 05:44 PM से सायं 06:09 PM तक
  • अमृत काल: दोपहर 12:58 PM से दोपहर 02:35 PM तक
  • रवि योग: रात्रि 09:03 PM से अगली सुबह 06:28 AM तक

अशुभ मुहूर्त (वर्जित समय):

राहुकाल की स्थिति में नए या शुभ कार्यों का आरंभ वर्जित माना जाता है। आज विभिन्न नगरों में राहुकाल का समय इस प्रकार है:

  • दिल्ली: सुबह 10:41 AM से दोपहर 12:05 PM तक
  • मुंबई: सुबह 10:56 AM से दोपहर 12:23 PM तक
  • कोलकाता: सुबह 09:55 AM से सुबह 11:23 AM तक
  • चेन्नई: सुबह 10:25 AM से दोपहर 11:53 AM तक
  • रायपुर / भोपाल: सुबह 10:35 AM से दोपहर 12:00 PM तक
  • यमगण्ड: दोपहर 02:52 PM से सायं 04:16 PM तक
  • गुलिक काल: प्रातः 07:54 AM से प्रातः 09:17 AM तक

3. शुक्र प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व एवं पौराणिक कथा

प्रत्येक मास की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को भगवान आशुतोष भोलेनाथ और माता पार्वती की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए प्रदोष व्रत रखा जाता है। जब त्रयोदशी तिथि शुक्रवार के दिन पड़ती है, तो इसे ‘शुक्र प्रदोष व्रत’ कहा जाता है। यह व्रत धार्मिक एवं ज्योतिषीय दोनों ही दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण माना गया है।

शुक्र प्रदोष व्रत का आध्यात्मिक एवं ज्योतिषीय लाभ:

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुक्र ग्रह को भौतिक सुख, सौंदर्य, कला, दांपत्य प्रेम, आकर्षण, समृद्धि और वैभव का कारक ग्रह माना गया है। जिन जातकों की जन्मकुंडली में शुक्र ग्रह कमजोर स्थिति में होता है या विवाह में रुकावटें आती हैं, उनके लिए शुक्र प्रदोष का व्रत रखना अमोघ फलदायी सिद्ध होता है। इसके अतिरिक्त, इस व्रत के प्रभाव से पारिवारिक जीवन में चल रहे मनमुटाव समाप्त होते हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।

“प्रदोष काले शिवपूजां ये कुर्वन्ति नरा भुवि। न तेषां दुर्लभं किंचित् इह लोके परत्र च॥”
अर्थात: जो मनुष्य प्रदोष काल में पृथ्वी पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं, उनके लिए इस लोक और परलोक में कुछ भी दुर्लभ नहीं रह जाता।

शुक्र प्रदोष व्रत कथा:

पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में एक नगर में एक अत्यंत निर्धन वैश्य (व्यापारी) रहता था। वह भगवान शिव का अनन्य भक्त था, परंतु उसकी कोई संतान नहीं थी और न ही उसके पास पर्याप्त धन था। एक दिन उसने एक सिद्ध संत के उपदेश से प्रेरित होकर अपनी पत्नी के साथ नियमित रूप से शुक्र प्रदोष व्रत रखने का दृढ़ संकल्प लिया।

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दोनों पति-पत्नी पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक त्रयोदशी तिथि को दिन भर उपवास रखते और प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव की आराधना करते। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर देवाधिदेव महादेव और माता जगदम्बा ने उन्हें दर्शन दिए और उन्हें अखंड धन-धान्य तथा गुणवान पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया। कुछ ही समय में वैश्य का व्यापार उन्नति करने लगा और उसके घर में एक सुंदर पुत्र का जन्म हुआ। तभी से समाज में शुक्र प्रदोष व्रत की महिमा स्थापित हुई।

4. प्रदोष काल पूजा विधि एवं महत्वपूर्ण नियम

प्रदोष व्रत में सबसे महत्वपूर्ण समय ‘प्रदोष काल’ माना जाता है। प्रदोष काल सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पूर्व शुरू होकर सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक रहता है। आज 23 अक्टूबर को प्रदोष काल की पूजा का सबसे शुभ समय **सायं 05:44 PM से रात्रि 08:16 PM** के मध्य रहेगा।

चरणबद्ध पूजा विधि:

  1. प्रातः स्नान एवं संकल्प: प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त हों। तत्पश्चात हाथों में जल और पुष्प लेकर भगवान शिव के समक्ष व्रत का संकल्प लें: “मम सर्वपापक्षयपूर्वक – पुत्रपौत्राद्यभिवृद्धये शुक्रप्रदोषव्रतमहं करिष्ये।”
  2. दिन भर संयम: दिन भर फलाहार रहें और क्रोध, असत्य वाचन तथा तामसिक विचारों से दूर रहें।
  3. प्रदोष काल तैयारी: संध्या समय दोबारा स्नान करें या हाथ-पैर धोकर स्वच्छ (सफेद या हल्के गुलाबी) वस्त्र धारण करें।
  4. शिवलिंग का अभिषेक: ईशान कोण में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। तांबे या पीतल के पात्र में जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शुद्ध देसी घी, शहद और शक्कर मिलाकर पंचामृत बनाएं और शिवलिंग का विधिपूर्वक अभिषेक करें।
  5. पवित्र सामग्री समर्पण: भगवान शिव को त्रिपुंड चंदन लगाएं। तदुपरांत 11 या 21 अखंडित (बिना कटे-फटे) बेलपत्र पर ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर अर्पित करें। इसके साथ ही शमी के पत्ते, धतूरा, आंकड़े के पुष्प, कनेर के फूल और भस्म अर्पित करें।
  6. माता पार्वती एवं शुक्र पूजन: माता पार्वती को लाल चुनरी, सिंदूर और सुहाग की सामग्री भेंट करें। चूंकि आज शुक्रवार है, इसलिए भगवान शिव के साथ-साथ धनलक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए सफेद मिठाई (मखाने की खीर या छेना) का भोग लगाएं।
  7. कथा एवं आरती: धूप, दीप प्रज्वलित कर शुक्र प्रदोष व्रत कथा का श्रवण या वाचन करें। इसके बाद शिव चालीसा, रुद्राष्टकम और भगवान शिव की आरती उतारें।

5. पापांकुशा एकादशी व्रत पारण (23 अक्टूबर)

कल यानी 22 अक्टूबर को आश्विन शुक्ल एकादशी तिथि पर श्रद्धालुओं ने भगवान पद्मनाभ की प्रसन्नता के लिए पापांकुशा एकादशी का कठिन उपवास रखा था। शास्त्रों के नियमानुसार एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के समाप्त होने से पूर्व और सूर्योदय के पश्चात किया जाना अनिवार्य होता है।

पारण का शुभ समय: आज 23 अक्टूबर को प्रातः 06:28 AM से प्रातः 08:42 AM तक पारण का अति उत्तम मुहूर्त है। व्रतियों को चाहिए कि वे प्रातः स्नान करके भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें, किसी योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र व तिल का दान दें और तत्पश्चात तुलसी दल युक्त चरणामृत या सात्विक भोजन ग्रहण करके व्रत संपन्न करें।

6. आगामी प्रमुख त्योहारों की कैलेंडर रिपोर्ट (अक्टूबर-नवंबर 2026)

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी के साथ ही सनातन धर्म के सबसे बड़े एवं भव्य पर्वोत्सव श्रृंखला का प्राकट्य होने जा रहा है। आने वाले दिनों में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों की प्रामाणिक तिथियां इस प्रकार हैं:

त्योहार / पर्व निर्धारित तिथि दिन महत्व
शरद पूर्णिमा (कोजागरी व्रत) 25 अक्टूबर 2026 रविवार अमृत वर्षा रात्रि, लक्ष्मी पूजन एवं खीर प्रसाद
कार्तिक मास प्रारंभ 26 अक्टूबर 2026 सोमवार पवित्र कार्तिक स्नान एवं दीपदान का शुभारंभ
करवा चौथ व्रत 29 अक्टूबर 2026 गुरुवार पति की दीर्घायु हेतु अखंड सौभाग्य व्रत
अहोई अष्टमी 2 नवंबर 2026 सोमवार संतान की दीर्घायु एवं रक्षा हेतु निर्जला व्रत
धनतेरस (धन्वंतरि जयंती) 6 नवंबर 2026 शुक्रवार स्वर्ण, बर्तन व वाहनों की खरीदारी, यम दीपदान
रूप चतुर्दशी (छोटी दीपावली) 7 नवंबर 2026 शनिवार अभ्यंग स्नान, सौंदर्य एवं स्वच्छता का पर्व
दीपावली (महालक्ष्मी पूजन) 8 नवंबर 2026 रविवार श्री महालक्ष्मी, गणेश व कुबेर पूजन, दीपमाला
गोवर्धन पूजा / अन्नकूट 9 नवंबर 2026 सोमवार प्रकृति पूजन, प्रकृति एवं गोवंश संरक्षण पर्व
भैया दूज (यम द्वितीया) 10 नवंबर 2026 मंगलवार भाई-बहन के पवित्र प्रेम एवं स्नेह का त्योहार
छठ पूजा (महापर्व) 14 – 15 नवंबर 2026 शनि-रविवार भगवान सूर्यदेव एवं छठी मइया की कठिन आराधना

7. ज्योतिषीय उपाय: आज शुक्र प्रदोष पर राशि अनुसार क्या करें?

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार आज के दिन अपनी-अपनी राशियों के अनुसार विशेष उपाय करने से जीवन की बड़ी से बड़ी रुकावटें दूर हो सकती हैं:

  • मेष राशि: शिवलिंग पर लाल चंदन और शहद मिलाकर जल चढ़ाएं। ‘ॐ नमः शिवाय’ का 108 बार जाप करें।
  • वृषभ राशि: कच्चा दूध और सफेद पुष्प चढ़ाएं। शुक्र देव के दोष दूर होंगे और धन लाभ होगा।
  • मिथुन राशि: बेलपत्र पर हरा चंदन लगाकर शिवजी को समर्पित करें। स्वास्थ्य में सुधार होगा।
  • कर्क राशि: पंचामृत से अभिषेक करें और मक्खन-मिश्री का भोग लगाएं। मानसिक शांति प्राप्त होगी।
  • सिंह राशि: जल में गुड़ और लाल कनेर के फूल डालकर चढ़ाएं। पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
  • कन्या राशि: शमी पत्र और भस्म से शिवजी का पूजन करें। व्यापारिक बाधाएं दूर होंगी।
  • तुला राशि: इत्र और दही से शिवलिंग का लेपन करें। दांपत्य जीवन में आ रही दूरियां समाप्त होंगी।
  • वृश्चिक राशि: शिवलिंग पर दूध और बेलपत्र अर्पित कर महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें।
  • धनु राशि: जल में पीला चंदन या केसर मिलाकर अभिषेक करें। करियर में तरक्की के योग बनेंगे।
  • मकर राशि: काले तिल और गंगाजल मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। शनि-कृत बाधाएं दूर होंगी।
  • कुंभ राशि: आज चंद्रमा आपकी ही राशि में है, अतः शमी के फूल और जल चढ़ाकर ओम नमः शिवाय का जाप करें।
  • मीन राशि: जल में चने की दाल और पीले फूल मिलाकर अर्पित करें। सुख-सौभाग्य बढ़ेगा।

आश्विन मास का यह शुक्ल पक्ष हमें भक्ति, संयम और अनुशासन की प्रेरणा देता है। शुक्र प्रदोष व्रत के माध्यम से न केवल भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है, बल्कि मानसिक एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का भी संचार होता है। बदलते मौसम (शरद ऋतु) में व्रत और उपवास रखना हमारे शारीरिक स्वास्थ्य और पाचन तंत्र के लिए भी अत्यंत लाभकारी वैज्ञानिक प्रक्रिया है। प्रदेश खबर अपने सभी पाठकों के सुखी, समृद्ध और आरोग्यमय जीवन की कामना करता है।

संपादकीय निवेदन: धार्मिक अनुष्ठानों और व्रतों के सम्पादन में अपनी आस्था और शारीरिक क्षमता का ध्यान अवश्य रखें। शुद्धता, सात्विकता और भाव भक्ति ही ईश्वर प्राप्ति का मूल मार्ग है।

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प्रधान संपादक एवं संस्थापक: आशीष सिन्हा | डिजिटल मीडिया डिवीजन


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