छत्तीसगढ़ में गैस सिलेंडर और अडानी पाइपलाइन के बहाने भूपेश बघेल का केंद्र सरकार पर तीखा हमला, स्मृति ईरानी के दौरे पर उठाए सवाल
छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर से घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों, रोजगार और कॉर्पोरेट घरानों की एंट्री को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार और भाजपा की वरिष्ठ नेत्री स्मृति ईरानी के छत्तीसगढ़ दौरे को लेकर तीखे सवाल खड़े किए हैं। बघेल ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ की जनता के साथ महंगाई और रोजगार के नाम पर छलावा किया जा रहा है।
₹500 के सिलेंडर के वादे पर जनता की उम्मीदें और निराशा
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने बयान में मुख्य रूप से उस जन-असंतोष को उजागर किया है, जो चुनाव के दौरान और बाद में जनता के मन में गैस सिलेंडर के दामों को लेकर उपजा था। छत्तीसगढ़ की आम गृहणियों और आम परिवारों को यह उम्मीद थी कि उन्हें राहत देते हुए घरेलू गैस सिलेंडर मात्र ₹500 की किफायती कीमत पर उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि, ज़मीनी हालात और बढ़ती कीमतों के चलते जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।
बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा नेताओं के दौरों के दौरान जनता इनसे सीधा सवाल पूछ रही है कि आखिर महंगाई पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही है और चुनावी वादे कागजों तक ही क्यों सीमित रह गए हैं?
अडानी गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट: स्थानीय गैस एजेंसियों और रोज़गार पर संकट
विवाद का दूसरा और सबसे बड़ा पहलू राज्य में अडानी समूह द्वारा गैस पाइपलाइन बिछाए जाने की परियोजना से जुड़ा है। भूपेश बघेल ने आशंका जताई है कि पीएनजी (PNG) और सीएनजी (CNG) नेटवर्क के तहत आने वाली इन प्रोजेक्ट्स से पारंपरिक एलपीजी गैस एजेंसियों का वजूद खतरे में पड़ जाएगा।
- स्थानीय व्यवसायों पर मार: शहर-शहर और गांवों तक गैस सिलेंडर पहुंचाने वाली स्थानीय गैस एजेंसियों और वितरकों का कारोबार चौपट हो सकता है।
- रोजगार का संकट: इन गैस एजेंसियों, गोदामों और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से जुड़े हज़ारों युवाओं और कामगारों की आजीविका पर सीधा संकट आ जाएगा।
- एकाधिकार की आशंका: कांग्रेस का आरोप है कि इस तरह के बड़े प्रोजेक्ट्स के ज़रिए चुनिंदा कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाया जा रहा है, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा खत्म होती है।
‘जिओ मॉडल’ का उदाहरण: कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी की आशंका
अपने तीखे राजनीतिक हमले को आगे बढ़ाते हुए भूपेश बघेल ने टेलीकॉम सेक्टर में आए बदलाव का उदाहरण दिया। उन्होंने ‘जिओ मॉडल’ का हवाला देते हुए चेताया कि जिस प्रकार शुरुआत में मोबाइल डेटा और कॉलिंग सेवाएं बेहद सस्ती या मुफ्त देकर बाज़ार पर कब्ज़ा किया गया और बाद में कीमतें कई गुना बढ़ा दी गईं, ठीक यही रणनीति गैस आपूर्ति के क्षेत्र में भी अपनाई जा रही है।
बघेल के अनुसार, शुरुआत में सस्ते या लुभावने विकल्प दिखाकर लोगों को आदत डलवाई जाएगी और एक बार स्थानीय व पारंपरिक विकल्प खत्म होने के बाद गैस की कीमतें भी मनमाने ढंग से बढ़ा दी जाएंगी, जिसका सीधा बोझ आम जनता की जेब पर पड़ेगा।
राजनीतिक हलचल और आगे की सुगबुगाहट
स्मृति ईरानी के छत्तीसगढ़ दौरे के ठीक पहले आए इस बयान ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है। एक तरफ जहां भाजपा अपने संगठन को मजबूत करने और आगामी रणनीतियों पर मंथन करने में जुटी है, वहीं कांग्रेस ने महंगाई, स्थानीय रोज़गार और उद्योग-व्यापार के मुद्दों को लेकर आक्रामक तेवर अपना लिए हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा छत्तीसगढ़ की सियासत में और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि इसका सीधा संबंध आम जनता के दैनिक जीवन और खर्चों से जुड़ा हुआ है।















