भूपेश बघेल का केंद्र सरकार पर तीखा हमला: सीमा सुरक्षा, ITBP डीजी के बयान और गलवान मुद्दे पर घेरा; कहा—’चीन के मामले में देश को गुमराह कर रही सरकार’
खबर के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- सीमा सुरक्षा पर खरी-खरी: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा कर केंद्र सरकार की विदेश और सुरक्षा नीति पर उठाए गंभीर सवाल।
- चीन विवाद और गलवान घाटी: गलवान घाटी संघर्ष में 20 वीर जवानों की शहादत का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री के पुराने बयानों पर साधा निशाना।
- ITBP डीजी के बयान का उल्लेख: भारत-चीन सीमा पर लगातार जारी झड़पों को लेकर ITBP के महानिदेशक (DG) के हालिया बयानों का संदर्भ देते हुए तथ्य छिपाने का लगाया आरोप।
- आंतरिक बनाम बाह्य सुरक्षा: सरकार का ध्यान सीमाओं की रक्षा करने की बजाय अपनी जायज मांगों के लिए आवाज उठाने वाले बच्चों और युवाओं पर कार्रवाई करने पर होने की कही बात।
- राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर बहस: पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन सीमा के संदर्भ में अखंड भारत की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
सीमा सुरक्षा और चीन नीति पर भूपेश बघेल का बड़ा बयान
रायपुर/नई दिल्ली। भारत की सीमाओं पर बढ़ रहे तनाव और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य के बीच देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार की सीमा सुरक्षा और विदेश नीति पर अत्यंत तीखा हमला बोला है। अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल X पर एक पोस्ट जारी करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश की सीमाओं पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए, चाहे वह पाकिस्तान की ओर से हो, बांग्लादेश की तरफ से हो या फिर चीन द्वारा किया गया हो।
भूपेश बघेल ने अपने बयान में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार चीन के सीमा विवाद के संवेदनशील मुद्दे पर देश की जनता को लगातार गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे सर्वोच्च प्राथमिकता वाले विषय पर पारदर्शिता बरती जानी चाहिए, लेकिन वर्तमान सरकार सच्चाई को उजागर करने के स्थान पर उसे दबाने के प्रयासों में जुटी हुई है।
— भूपेश बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
ITBP डीजी के बयान से सामने आई चीन सीमा की हकीकत
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (ITBP) के महानिदेशक (DG) के हालिया बयान का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा बल के शीर्ष अधिकारियों की ओर से आ रही जानकारियां यह स्पष्ट करती हैं कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति उतनी सामान्य नहीं है जितनी दिखाई जा रही है। ITBP प्रमुख के बयानों से सीमा पर चीन के साथ लगातार हो रही झड़पों और तनाव की गंभीर स्थितियां उजागर हुई हैं।
भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि जब सीमा पर तैनात बलों के प्रमुख स्वयं झड़पों और सुरक्षा चुनौतियों की बात कर रहे हैं, तब सरकार संसद और जनता के सामने वास्तविक स्थिति क्यों प्रस्तुत नहीं कर रही है? उन्होंने कहा कि जानकारी को दबाने की यह नीति राष्ट्रीय हित में नहीं है। देशवासियों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनकी सीमाओं पर क्या स्थिति है और देश के वीर जवान किन परिस्थितियों में सीमा की रक्षा कर रहे हैं।
गलवान घाटी संघर्ष और ‘न कोई आया, न कोई घुसा’ बयान पर फिर उठा सवाल
वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प की याद दिलाते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि देश ने अपने 20 वीर जवानों को खोया था। पूरा देश उन शहीदों की वीरता को नमन करता है। हालांकि, घटना के बाद प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए इस बयान—”न कोई हमारी सीमा में घुसा है, न ही कोई घुसा हुआ है”—पर उन्होंने कड़ा ऐतराज जताया।
उन्होंने कहा कि जब हमारे 20 जांबाज जवान शहीद हुए और दर्जनों घायल हुए, तो ऐसे में ‘कोई नहीं आया’ का दावा करना शहादत के अपमान जैसा महसूस होता है। बघेल ने कहा कि सरकार का यह रवैया चीन के आक्रामक रुख को और बढ़ावा देता है, क्योंकि कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर जब तक अपनी स्पष्ट स्थिति और नुकसान को स्वीकार नहीं किया जाएगा, तब तक चीन जैसी विस्तारवादी ताकत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाना मुश्किल होगा।
सीमा सुरक्षा एवं प्रशासनिक जवाबदेही: एक नजर में
| क्र. | विषय / मुद्दा | भूपेश बघेल द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु | जनता/संसद के सामने लंबित सवाल |
|---|---|---|---|
| 1 | चीन सीमा विवाद (LAC) | चीन द्वारा लगातार सीमा पर घुसपैठ व झड़पों की खबरें, लेकिन सरकार की ओर से जानकारी छिपाने का आरोप। | गलवान संघर्ष के बाद वास्तविक स्थिति (Status Quo) क्या बहाल हुई है? |
| 2 | ITBP DG की रिपोर्ट/बयान | सुरक्षा बलों के अधिकारियों का बयान सीमा पर निरंतर जारी तनाव और झड़पों की पुष्टि करता है। | क्या सुरक्षा बलों को सीमा पर स्थिति स्पष्ट करने की पूरी छूट दी जा रही है? |
| 3 | पाक व बांग्लादेश सीमा | किसी भी पड़ोसी देश द्वारा सीमा उल्लंघन का मुंहतोड़ जवाब दिया जाना चाहिए। | सीमा पार से होने वाली गतिविधियों पर केंद्र की दीर्घकालिक रणनीति क्या है? |
| 4 | आंतरिक बनाम बाह्य प्राथमिकताएं | सरकार का ध्यान बाह्य सीमाओं की सुरक्षा पर होना चाहिए, न कि अधिकार मांग रहे बच्चों/युवाओं पर कार्रवाई करने पर। | छात्रों व युवाओं के आंदोलनों के प्रति दमनकारी नीति क्यों अपनाई जा रही है? |
युवाओं और छात्रों पर कार्रवाई पर भी घेरा
अपने सोशल मीडिया बयान के अंतिम हिस्से में भूपेश बघेल ने सरकार की प्राथमिकताओं पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आज सरकार की प्राथमिकताएं पूरी तरह से भटक चुकी हैं। देश की सीमाएं असुरक्षित हैं, चीन जैसी विस्तारवादी ताकतें भारतीय भूमि पर नजरें गड़ाए बैठी हैं, लेकिन केंद्र सरकार की ऊर्जा और तंत्र का इस्तेमाल देश के भीतर अपनी मांगों के लिए आवाज उठाने वाले निर्दोष बच्चों, छात्रों और युवाओं का दमन करने में किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जो बच्चे अपने भविष्य, शिक्षा, रोजगार और जायज हकों के लिए लोकतंत्र के दायरे में रहकर आवाज उठा रहे हैं, उन पर कठोर कार्रवाई की जा रही है, जबकि देश की रक्षा करने के मुख्य कर्तव्य से सरकार ध्यान भटका रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा का पहला नियम यह है कि बाह्य खतरों पर ध्यान केंद्रित किया जाए और आंतरिक लोकतांत्रिक आवाजों को सुनने और समाधान करने का प्रयास किया जाए, न कि उन्हें दबाने का।
क्षेत्रीय व राष्ट्रीय राजनीति पर इस बयान का प्रभाव
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में सुरक्षा, रक्षा बजट और विदेश नीति को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ी हुई है। एक ओर जहां सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ और मजबूत विदेश नीति का दावा करती है, वहीं विपक्ष लगातार चीन के मुद्दे पर सरकार की चुप्पी को कमजोरी बताकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भूपेश बघेल द्वारा X पर दिया गया यह बयान केवल एक प्रादेशिक नेता की टिप्पणी नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन द्वारा केंद्र सरकार को रक्षा मामलों में घेरने की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है। विशेषकर ITBP प्रमुख के बयानों को आधार बनाकर सरकार को कटघरे में खड़ा करने से रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय पर जवाबदेही तय करने का भारी दबाव बनेगा।
भूपेश बघेल के इस कड़े बयान ने एक बार फिर भारत-चीन सीमा पर जारी अनिश्चितता और केंद्र सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है। चीन की विस्तारवादी नीतियों से निपटने के लिए एक मजबूत और पारदर्शी रणनीति की मांग देश भर से उठ रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रक्षा मंत्रालय या सत्तारूढ़ दल की ओर से इन तीखे सवालों और ITBP के संदर्भ में दिए गए बयानों पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है।












