“राज्य की जमीन बचाना और धामी सरकार को हटाना ही हमारा मुख्य लक्ष्य”: उत्तराखंड में भू-हस्तांतरण पर कुमारी सैलजा का करारा प्रहार
नई दिल्ली: देवभूमि उत्तराखंड की राजनीति में भू-कानून, भूमि हस्तांतरण और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को लेकर एक बार फिर बड़ा सियासी तूफान खड़ा हो गया है। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा ने नई दिल्ली में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश की पुष्कर सिंह धामी सरकार के खिलाफ तीखा हमला बोला। कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी बयान के अनुसार, पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड की जल, जंगल और जमीन की रक्षा करना तथा मौजूदा सरकार को सत्ता से हटाना है।
कुमारी सैलजा ने आरोप लगाया कि अंग्रेजों के जमाने से संरक्षित और देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के प्रयासों से जुटाई गई सार्वजनिक संपत्तियों तक को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा चुकी है। उन्होंने सिलसिलेवार तरीके से राज्य भर के कई चर्चित भूमि हस्तांतरण मामलों का ब्योरा मीडिया के समक्ष रखा।
कांग्रेस द्वारा उठाए गए भूमि हस्तांतरण के प्रमुख मामले
कांग्रेस पार्टी ने उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में हुए भूमि आवंटन एवं स्थानांतरण निर्णयों पर सवाल उठाए हैं:
| स्थान / क्षेत्र | जमीन का क्षेत्रफल / संपत्ति | आरोप का मुख्य बिंदु |
|---|---|---|
| ऋषिकेश (IDPL) | 633 एकड़ | आईडीपीएल (IDPL) की 633 एकड़ बेशकीमती जमीन UIIDB (उत्तराखंड इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट बोर्ड) को सौंप दी गई। |
| मसूरी | 142 एकड़ | ऐतिहासिक क्षेत्र की 142 एकड़ जमीन निजी हाथों में हस्तांतरित करने का आरोप। |
| प्रदेश भर में इंस्पेक्शन बंगले | 25 ब्रिटिशकालीन बंगले | ब्रिटिश हुकूमत के समय बने विभिन्न स्थानों के 25 ऐतिहासिक निरीक्षण गृह (Inspection Bungalows) सौंपे गए। |
| नैनीताल | सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) | निजी होटल निर्माण/विकास की सुविधा के लिए मौजूदा सीवेज प्लांट को स्थानांतरित कर दिया गया। |
| रामगढ़ (नैनीताल) | सुरक्षित फ़ॉरेस्ट लैंड | ऐसी वन भूमि सौंप दी गई जिसे नियमानुसार किसी भी गैर-वानिकी कार्य हेतु नहीं दिया जा सकता। |
| पटवा डांगर (नैनीताल) | संस्थान की सरकारी जमीन | महज ₹5 प्रति वर्ग मीटर प्रति वर्ष की नाममात्र दर पर देश के एक बड़े कॉरपोरेट समूह को देने की तैयारी। |
| डाकपत्थर (विकासनगर) | 190 एकड़ भूमि | पंडित जवाहरलाल नेहरू के आग्रह पर जनता द्वारा दी गई जमीन को मूल मालिकों/स्थानीय लोगों को लौटाने के बजाय निजी पक्षों को देना। |
1. ऋषिकेश IDPL की 633 एकड़ जमीन UIIDB के हवाले
प्रेस वार्ता के दौरान कुमारी सैलजा ने ऋषिकेश स्थित इंडियन ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (IDPL) की 633 एकड़ जमीन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश की यह भूमि राज्य की बहुमूल्य सार्वजनिक संपत्ति है, जिसे उत्तराखंड इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB) को ट्रांसफर कर दिया गया है। कांग्रेस का आरोप है कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के नाम पर यह जमीन बाद में बड़े निजी निवेशकों को कौड़ियों के भाव लीज पर दी जाएगी।
2. मसूरी में 142 एकड़ धरोहर जमीन और 25 ब्रिटिशकालीन बंगले
पहाड़ों की रानी मसूरी में जॉर्ज एवरेस्ट और आसपास के इलाकों से जुड़ी 142 एकड़ ऐतिहासिक भूमि को निजी समूह को सौंपने पर कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया है। सैलजा ने कहा कि केवल जमीन ही नहीं, बल्कि राज्य भर में फैले अंग्रेजों के जमाने के 25 ऐतिहासिक इंस्पेक्शन बंगलों को भी निजी प्रबंधन के हवाले किया जा रहा है। ये बंगले राज्य की विरासत और वन विभाग की प्रशासनिक संपत्ति रहे हैं।
— कुमारी सैलजा, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी महासचिव व उत्तराखंड प्रभारी
3. पर्यावरण नियमों की अनदेखी: नैनीताल और रामगढ़ का मुद्दा
पर्यावरण और पारिस्थितिकी की दृष्टि से संवेदनशील नैनीताल जिले के दो प्रमुख मामलों को उजागर करते हुए कांग्रेस प्रभारी ने कहा:
- नैनीताल सीवेज प्लांट शिफ्टिंग: नैनीताल शहर में एक निजी होटल परियोजना को फायदा पहुंचाने के लिए पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) को ही दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया।
- रामगढ़ में फ़ॉरेस्ट लैंड आवंटन: फलपट्टी के रूप में प्रसिद्ध रामगढ़ क्षेत्र में उस आरक्षित वन भूमि (Forest Land) को वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए दे दिया गया, जिसे सर्वोच्च न्यायालय और पर्यावरण कानूनों के तहत किसी को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।
4. पटवा डांगर: ₹5 प्रति वर्ग मीटर में कॉरपोरेट घराने को देने का आरोप
नैनीताल के पास स्थित ऐतिहासिक ‘पटवा डांगर’ (जहां पहले वैक्सीन संस्थानयहाँ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) द्वारा उत्तराखंड की धामी सरकार पर लगाए गए ज़मीन हस्तांतरण आरोपों और कुमारी शैलजा के बयान पर आधारित विस्तृत समाचार रिपोर्ट दी गई है।
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उत्तराखंड: कांग्रेस का धामी सरकार पर ‘भू-हस्तांतरण’ को लेकर बड़ा हमला, कुमारी शैलजा बोलीं- “धामी को हटाना और राज्य की जमीन बचाना ही मुख्य उद्देश्य”
उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर भू-हस्तांतरण और सरकारी संपत्तियों के निजीकरण का मुद्दा गरमा गया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर राज्य की बहुमूल्य सरकारी, वन और ऐतिहासिक जमीनों को निजी हाथों तथा उद्योगपतियों को सौंपने का गंभीर आरोप लगाया है।
नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस की ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) की महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी कुमारी शैलजा ने धामी सरकार के फैसलों पर तीखा प्रहार करते हुए कई बड़े खुलासे किए।
“उत्तराखंड में ऋषिकेश से लेकर मसूरी, नैनीताल, रामगढ़ और विकासनगर तक बहुमूल्य जमीनों और ऐतिहासिक संपत्तियों का बंदरबांट किया जा रहा है। हमारा स्पष्ट उद्देश्य उत्तराखंड से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को हटाना और राज्य की पवित्र जमीन को बचाना है।”
— कुमारी शैलजा, कांग्रेस महासचिव व उत्तराखंड प्रभारी
1. ऋषिकेश IDPL की 633 एकड़ जमीन का मुद्दा
कांग्रेस ने सबसे बड़ा आरोप ऋषिकेश स्थित इंडियन ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (IDPL) की जमीन को लेकर लगाया है। कुमारी शैलजा के अनुसार:
- ऋषिकेश स्थित IDPL परिसर की 633 एकड़ प्राइम लैंड को उत्तराखंड इंफ्रास्ट्रक्चर एंड अर्बन डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB) को सौंप दिया गया है।
- यह जमीन दशकों तक औषधीय और औद्योगिक पहचान की प्रतीक रही है, लेकिन अब इसे वाणिज्यिक और निजी विकास के नाम पर हस्तांतरित किया जा रहा है।
- कांग्रेस का आरोप है कि सार्वजनिक संपत्ति का यह हस्तांतरण स्थानीय लोगों के हितों के खिलाफ है।
2. मसूरी और ऐतिहासिक ब्रिटिशकालीन इंस्पेक्शन बंगलों का हस्तांतरण
पहाड़ों की रानी मसूरी और राज्य के विभिन्न हिस्सों में मौजूद ऐतिहासिक संपत्तियों को लेकर भी कांग्रेस ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
- मसूरी में 142 एकड़ जमीन: राज्य सरकार द्वारा मसूरी की 142 एकड़ महत्वपूर्ण जमीन को विकास योजनाओं के नाम पर हस्तांतरित किया जा रहा है।
- अंग्रेजों के जमाने के 25 इंस्पेक्शन बंगले: उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में फैले अंग्रेजों के समय के 25 ऐतिहासिक निरीक्षण भवनों (Inspection Bungalows) को भी निजी विकास या अन्य संस्थाओं को सौंपा जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि यह राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के साथ खिलवाड़ है।
3. नैनीताल और रामगढ़: पर्यावरण नियमों की अनदेखी का आरोप
उत्तराखंड के संवेदनशील पर्वतीय और पर्यावरणीय क्षेत्रों में सरकारी निर्णयों पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने निम्नलिखित मुद्दे उठाए:
पर्यावरण और वन भूमि से जुड़े मुख्य आरोप:
- नैनीताल सीवेज प्लांट शिफ्टिंग: नैनीताल में एक निजी होटल परियोजना को फायदा पहुंचाने के लिए सार्वजनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) को ही दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया गया।
- रामगढ़ में फ़ॉरेस्ट लैंड (Forest Land) का हस्तांतरण: नैनीताल जिले के रामगढ़ क्षेत्र में संरक्षित वन भूमि (Forest Land) को हस्तांतरित कर दिया गया, जबकि नियमानुसार वन भूमि को किसी भी गैर-वानिकी या निजी गतिविधि के लिए नहीं दिया जा सकता।
4. पटवा डांगर: मात्र ₹5 प्रति स्क्वायर मीटर की लीज का आरोप
नैनीताल के पास स्थित पटवा डांगर की जमीन को लेकर कांग्रेस ने एक चौंकाने वाला दावा किया है:
कांग्रेस के अनुसार, पटवा डांगर की कीमती जमीन को मात्र ₹5 प्रति स्क्वायर मीटर प्रति वर्ष की दर से लीज पर दिया जा रहा है। पार्टी का आरोप है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी नहीं है और इसके पीछे देश के एक बहुत बड़े औद्योगिक घराने (Corporate Group) को जमीन सौंपने की तैयारी की जा रही है।
5. विकासनगर (डाकपत्थर) की 190 एकड़ ऐतिहासिक जमीन
देहरादून जिले के विकासनगर स्थित डाकपत्थर क्षेत्र की जमीन के इतिहास का जिक्र करते हुए कांग्रेस ने भावनात्मक और राजनीतिक हमला बोला:
- डाकपत्थर की 190 एकड़ जमीन देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के आह्वान और अनुरोध पर स्थानीय लोगों ने सार्वजनिक व राज्य हित में दी थी।
- कांग्रेस का आरोप है कि जिस जमीन को जनता ने राष्ट्र निर्माण के लिए दिया था, उसे मूल मालिकों या उनके परिवारों को वापस करने के बजाय दूसरे व्यावसायिक या निजी संस्थाओं को सौंपा जा रहा है।
कांग्रेस का संकल्प और भविष्य की रणनीति
प्रेस वार्ता के अंत में कुमारी शैलजा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को केवल बयानों तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि इसे एक जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा।
मुख्य मांगें और भावी रणनीति:
- राज्य की सभी जमीनों के हस्तांतरण के फैसलों की उच्चस्तरीय जांच की जाए।
- संवेदनशील वन क्षेत्रों और ऐतिहासिक धरोहरों के निजीकरण पर तुरंत रोक लगाई जाए।
- उत्तराखंड के जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के लिए राज्य स्तर पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
Ashish Sinha
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