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दुर्ग : कोरोना की वजह से हुआ लर्निंग लास, इधर के छह महीने स्लाग ओवर्स की तरह, अतिरिक्त प्रयास करें ताकि बच्चे पूरी तरह रिकवर कर सकें

दुर्ग : कोरोना की वजह से हुआ लर्निंग लास, इधर के छह महीने स्लाग ओवर्स की तरह, अतिरिक्त प्रयास करें ताकि बच्चे पूरी तरह रिकवर कर सकें

प्राचार्यों की बैठक में कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने अनूठे तरीके से प्राचार्यों से रखी अपनी बात

दुर्ग 01 नवंबर 2021कोरोना की वजह से आफलाइन पढ़ाई प्रभावित होने के चलते बच्चों में लर्निंग लास देखा गया है। अब आफलाइन कक्षाएं आरंभ हो गई हैं लेकिन समय सीमित बचा है अतएव इसमें अतिरिक्त पढ़ाई करा बच्चो की कमजोरियों को पूरी तरह दूर करना है। इस विषय पर कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने प्राचार्यों की बैठक में अपनी बात विशेष तरीके से रखी। उन्होंने कहा कि मान लीजिए कोई ट्वेंटी-ट्वेंटी मैच है और काफी ओवर निकल चुके हैं। अब रन रेट मेंटेन करना है तो स्लाग ओवर्स में अच्छा स्कोर करना होगा तभी प्रदर्शन बेहतर हो पाएगा। यही बात आपके लिए भी लागू होती है। आप अपने स्कूल के कैप्टन की तरह हैं, आपके ऊपर बच्चों के बेहतरीन प्रदर्शन की बड़ी जिम्मेदारी है। कोरोना की वजह से लर्निंग लास हुए हैं। आप इसे ठीक करने के लिए कार्ययोजना बनाइये और इसे क्रियान्वित कीजिए। कलेक्टर ने कहा कि आपका प्रोफेशन नोबल है। लोग हमेशा अपने शिक्षकों को याद रखते हैं। उन्होंने कहा कि मेरे पिता भी रिटायर्ड शिक्षक हैं और जहां भी मैं उनके साथ जाता हूँ तो देखता हूँ कि लोग उनका सम्मान करते हैं। यह नोबल प्रोफेशन आपको कड़ी चुनौती भी देता है कि साबित करें कि आप इसके लिए पूरी तौर पर खरे उतरते हैं। आप सबके बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए कि किस स्कूल का रिजल्ट सबसे बेहतर होगा। इस दौरान डीईओ श्री प्रवास सिंह बघेल सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
मेरे बच्चों ने भी आनलाइन क्लास अटेंड की, इसलिए समझ सकता हूँ कि आफलाइन कितना कारगर है- कलेक्टर ने कहा कि मैंने पेरेंट्स के रूप में भी देखा है कि आनलाइन क्लासेज कभी आफलाइन क्लास की बराबरी नहीं कर सकती। जब बच्चों का प्रत्यक्ष संवाद शिक्षकों से होता है तो यह हमेशा कारगर होता है। हमारे जिले में कोरोना के केसेज में कमी आई है और अब हम बच्चों की आफलाइन पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे सकते हैं।

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तीन अपेक्षाएं बताईं- कलेक्टर ने कहा कि प्राचार्य अपनी विधा को सबसे अच्छी तरह से समझते हैं। कलेक्टर के नाते मैं तीन चीजों की अपेक्षा करता हूँ। पहले बच्चे तेजी से पढ़ पाएं। उन्हें समझ पाएं और इसे अपने जीवन में अमल में लाएं। उदाहरण के लिए यदि गांधी जी या बुद्ध का कोई पाठ पढ़ रहे हैं तो बच्चे न केवल उसे समझे अपितु अपने जीवन में भी उसे उतारे। यदि स्वच्छता का कोई पाठ है कि नाखुन साफ करना चाहिए तो इसके लाभ भी समझें और दैनंदिनी में इसे प्रैक्टिस में भी लाएं। गांधी जी या बुद्ध का कोई पाठ है तो न केवल उसे समझ पाएं अपितु उसे अमल में भी लाएं जो असल में शिक्षा का हमारा मकसद है।
1100 स्कूल और एक लाख 70 हजार बच्चे हैं जिले में- जिले में 1100 स्कूल हैं और एक लाख 70 हजार बच्चे हैं। इस तरह प्राचार्यों पर बड़ी जिम्मेदारी है कि कैप्टन के रूप में अपने स्कूल का नेतृत्व करें और शानदार रिजल्ट दें। कलेक्टर ने प्राचार्यों से इस संबंध में चर्चा भी की।

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