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छत्तीसगढ़ : सरकार ने बढ़ाया किसानों का मान धान खरीदी के महापर्व से खुशनुमा हुआ ग्रामीण वातावरण

छत्तीसगढ़ : सरकार ने बढ़ाया किसानों का मान धान खरीदी के महापर्व से खुशनुमा हुआ ग्रामीण वातावरण

रायपुर 09 दिसंबर 2021अक्सर यह देखा जाता है कि उत्पादनकर्ता किसान को उसके उपज के एवज में उचित मूल्य प्राप्त नहीं होता है इसके अलावा समाज में किसानी कार्य करने वाले लोगों को पर्याप्त सम्मान भी नसीब होता है जिसके कारण कोई भी किसान अपने बच्चों को कृषि कार्यों में नहीं लगाना चाहता। वे अपनी अगली पीढ़ी को पढ़ा-लिखाकर दूसरे व्यवसायों में लगाना चाहती है। ऐसे में खेतों में उत्पादन का कार्य कौन करेगा ? क्या यह उत्पादन कार्य सिर्फ गरीबों की मजबूरी ही बनी रहेगी ? क्या किसानी सिर्फ कमजोर वर्गों के किस्मत की लकीरों तक सीमित रह जायेगा ? ऐसे बहुत से सवाल जेहन में पैदा होते हैं, पर क्या इन सवालों के क्या जवाब इतने कठिन हैं कि जिनके उत्तर ढूंढे नहीें जा सकते, शायद  नहीं , बस जरूरत है दृढ़ राजनीतिक इच्छा शक्ति कि ताकि इस वर्ग हित में दृढ़ फैसले लिए जा सकें।

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     छत्तीसगढ़ एक ऐसा ही राज्य है, यहां राज्य सरकार के दृढ़ इच्छा शक्ति से बनी नीतियों ने किसानों के मान-सम्मान को बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी नीतियों एवं उनके हक में लिए गए फैसलों से राज्य में खेती अब घाटे का सैादा नहीं रही है। वर्षों से कर्जे में डूबे किसानों को सरकार ने उनका कर्ज माफ कर उबार लिया है। किसानों की फसलों को उचित दाम मिलने से उन्हें एक नया संबल मिला है। सरकार ने दूरदर्शी सोच और दृढ़ इच्छाशक्ति से किसानों के विश्वास को जीता है और उन्हें सम्मान जनक जीवन जीने का अवसर सुलभ किया है। परंपरागत कृषि के साथ आधुनिकता का समावेश होने और सरकारी समर्थन मिलने से किसानों की आय में वृद्धि हुई है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ में खेती से विमुख हो चुके लोग भी अब गांवों का रूख कर खेती को अपनाने लगे हैं।
धान का कटोरा कहलाने वाले छत्तीसगढ़ राज्य के किसान आज धान के उत्पादन से बेहद खुश हैं। किसानों से समर्थन मूल्य पर धान तो खरीदी ही जा रही है साथ में राजीव गांधी किसान न्याय योजना के द्वारा नकद सब्सिडी राशि का अंतरण भी किसानों के खाते में किया जा रहा है। जिससे किसानों की खुशी दोगुनी हो गई है। किसानों के आय बढ़ाने के प्रयास में राज्य सरकार द्वारा धान के उन सुगंधित प्रजातियों को सहेजने का कार्य भी किया जा रहा है जिनके बीज मिलने बंद हो गए थे । सरकारी सहायता पाकर किसान फिर से उन विलुप्त हो रहे किस्मों के धान का उत्पादन कर रहे हैं। देवभोग सुगंधित, विष्णुभोग जेैसे किस्मों को देश-विदेश में बहुत पसंद किया जाता रहा है परंतु व्यापारियों और बिचौलियों की वजह से इसकी खेती सीमित हो गई थी।
सरकार द्वारा उद्यानिकी फसलों के उत्पादन को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जिससे उद्यानिकी फसलों का रकबा और उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। राज्य की जलवायु विविधता के कारण यहां उद्यानिकी फसलों की असीम संभावनाएं हैं, इन्हीं संभावनाओं को मूर्त देने उद्यानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। बीते कुछ वर्षों में उद्यानिकी फसलों के रकबे में चार गुना से अधिक की वृद्धि हुई है तथा उत्पादन भी बढ़कर पाँच गुना हो गया है। आज छत्तीसगढ़ उद्यानिकी फसलों के उत्पादन में देश में 13 वें क्रम में है।
राज्य मंे कृषि के साथ-साथ कृषि से जुड़े त्यौहारों को भी प्रर्याप्त महत्व दिया जा रहा है। कृषि संस्कृति से जुड़े सबसे बड़े लोक पर्व हरेली के दिन अवकाश घोषित कर राज्य सरकार ने इसकी महत्ता को बढ़ा दिया है। कृषि की महत्ता बढ़ने से राज्य में किसानों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। धान के पंजीकृत किसानों की संख्या देखें तो उनकी संख्या वर्ष 2018-19 में वर्ष 16 लाख 96 हजार थी जो बढ़कर वर्ष 2019-20 में 19 लाख 55 हजार, वर्ष 2020-21 में 21 लाख 29 हजार और वर्तमान वर्ष 2021-22 में बढ़कर 24 लाख 9 हजार हो गई है। इसके सामानांतर धान के रकबे में भी बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2018-19 में धान का रकबा 25 लाख 60 हजार हेक्टेयर जो वर्ष 2019-20  में बढ़कर 26 लाख 88 हजार हेक्टेयर, वर्ष 2020-21 में 27 लाख 59 हजार हेक्टेयर तथा वर्तमान वर्ष 2021-22 मंे 29 लाख 84 हजार हेक्टेयर हो गया है।
 राज्य मंे खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 के लिए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का महापर्व 1 दिसंबर से शुरू हो चुका है। पर्याप्त व्यवस्थाओं के बीच सरकार द्वारा किसानों से धान खरीदा जा रहा है। धान खरीदी को लेकर अन्नदाता किसान सुबह से ही उपार्जन केंद्रों पर आने लगे हैं। धान खरीदी होने से किसानों के चेहरे पर आई खुशी की चमक को देखा जा सकता है। सरकार के उचित देखरेख में सहकारी सोसायटी द्वारा धान खरीदी के लिए उपार्जन केंद्रों में बेहतर प्रबंधन किया गया  है। उपार्जन केंद्रों में धान खरीदी से लेकर धान उठाव तक किसी भी तरह की समस्या न हो इसके लिए सरकार द्वारा जरूरी कदम उठाये गये हैं। राज्य सरकार किसानों से भी बारदाने 25 रूपये की दर से खरीद रही है, जिससे किसान भी खुश नजर आ रहे हैं।
कृषि विकास के साथ-साथ कृषि से संबद्ध गतिविधियों के लिए सरकार द्वारा बनाई गई नीतियों ने राज्य के किसानों के लिए विकास के द्वार खोल दिए है। आज राज्य के किसानों में खुशी का माहौल है। उन्हें उनके उपज का अच्छा मूल्य मिल रहा है। कृषि संबद्ध कार्यो को प्रोत्साहन मिलने से गांवों में रोजगार के अवसरों में भी इजाफा हुआ। गोधन न्याय जैसे योजनाओं के योगदान से कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं। इन नीतियों का ही परिणाम है कि किसानों का जीवन स्तर अब ऊंचा उठ रहा है। रोटी, कपड़ा, मकान,शिक्षा ,स्वास्थ्य, पेयजल ,ऊर्जा जैसी बुनियादी आवश्यकताएं अब पूरी हो रही हैं। जिससे आज किसान वर्ग पूरे मान-सम्मान और समृद्धि के साथ जीवन यापन कर रहा है।

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