बैजनपुरी में जैविक खेती एवं फसल चक्र अपनाने हेतु कृषि पखवाड़ा आयोजित’

उत्तर बस्तर कांकेर : बैजनपुरी में जैविक खेती एवं फसल चक्र अपनाने हेतु कृषि पखवाड़ा आयोजित’

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भानुप्रतापपुर विकासखण्ड के बैजनपुरी लेम्पस के अंतर्गत बैजनपुरी, जामपारा, कनेचुर, भैंसाकान्हर-डु नरसिंगपुर, हवरकोंदल, डुमरकोट, बयानार, उच्चपानी के किसानों की उपस्थिति में, कृषि, उद्यानिकी एवं सहकारिता विभाग के संयुक्त आयोजन के तहत बैजनपुरी के बाजार स्थल में फसल चक्र परिवर्तन एवं जैविक खेती विषय पर विशेष कृषि पखवाड़ा आयोजित की गई।
कृषि विभाग के अधिकारी एन. आर. नेताम ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आगामी खरीफ वर्ष में फसल चक्र अपनाते हुए धान के बदले अन्य लाभकारी फसलें लगाने पर जोर दिया। किसान भाइयों को धान के अलावा, कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाले फसलें जैसे- मक्का, मड़िया, दलहन, तिलहन फसल लगाना चाहिए। किसान भाई लंबे समय से लगातार एक ही प्रकार की फसल धान लेने की वजह से भूमि की उपजाऊ क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ रही है, मिट्टी की संरचना को संतुलित बनाये रखने के लिए फसलों को अदल-बदल कर बुवाई करना चाहिए। उन्होंने किसानों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, राजीव गांधी न्याय योजना, पीएम फसल बीमा योजना, गोधन न्याय योजना, पीएम किसान निधि ई-केवाएसी करवाने, वर्मी कॉम्पोस्ट खाद का अग्रिम उठाव करने जानकारी दी।
ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी प्रवीण कवाची ने किसानों को फसल अवशेष को जैविक खाद में बदलने की विधि की जानकारी देते हुए बताया किसान भाई फसलों को हार्वेस्टिंग एवं मिंजाई के बाद दूसरी फसल लेने की जल्दबाजी में धान के बचे हुए अवशेष पैरा को खेत मे ही जला देते हैं, धान के बचे हुए अवशेषों यानी पराली को न जलाएं, क्योंकि इससे वातावरण प्रदूषण होने के साथ-साथ मिट्टी की उपजाऊ क्षमता कम होती है, जब धान अवशेष को जलाया जाता है तो मिट्टी में मौजूद कई सूक्ष्म जीव जो खेती में सहायक की भूमिका निभाते हैं, वे नष्ट हो जाते हैंं। मिट्टी में आग लग जाने से यह मिश्रण असंतुलित हो जाता है जिसका फसलों पर कई नकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। उन्होंने किसानों को सलाह देते हुए कहा कि धान के बचे अवशेषों को खेत में एक स्थान पर इकट्ठा कर वेस्ट डीकंपोजर घोल का खिड़काव करें। वेस्ट डिकंपोजर घोल के उपयोग से 21 दिनों में अम्लीय एवं क्षारीय भूमि में सुधार होने लगता है, इसका उपयोग से 40 से 45 दिनों में फसल अवशेष अपघटित होकर जैविक खाद में बदल जाती है, इससे 6 माह के भीतर एक एकड़ भूमि में 4 लाख से अधिक केंचुवा वर्मी कीड़ा पैदा हो जाते हैं। वेस्ट डिकम्पोजर का उपयोग करके किसान बिना रसायन, कीटनाशक के फसल उगा सकते हैं, इससे यूरिया, डीएपी, एमओपी की आवश्यकता नहीं पड़ती। कृषि पखवाड़ा कार्यक्रम को उद्यानिकी विभाग से टी.एस. ध्रुव, सचिव बीरेंद्र कुरेटी, कनेचुर के सरपंच मोहन मारगीया ने भी किसानों को संबोधित किया। इस अवसर पर भूतपूर्व जनपद सदस्य विजय नेताम, उप सरपंच महेश भारती, कृषि अधिकारी शंभूलाल नरेटी, लेम्पस प्रबंधक नीलेश नाग, जीवन कैमरो, हरेश कुमेटी, हर्ष साहू, किसान मित्र ललतू उइके, रमन कोसमा, प्रेमलाल जैन एवं क्षेत्र के किसान भाई उपस्थित थे।