नामांकन पत्रों की जांच के बाद राष्ट्रपति चुनाव में मुर्मू और सिन्हा के बीच मुकाबला

नामांकन पत्रों की जांच के बाद राष्ट्रपति चुनाव में मुर्मू और सिन्हा के बीच मुकाबला

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नयी दिल्ली, 30 जून राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच के बाद अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू और विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा के रूप में सिर्फ दो उम्मीदवार मुकाबले में रह गए हैं। राज्यसभा सचिवालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

राष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचन अधिकारी एवं राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी ने कहा कि बुधवार तक 94 व्यक्तियों के कुल 115 नामांकन पत्र प्राप्त हुए थे, जिनमें से 28 को प्रस्तुत करते वक्त ही खारिज कर दिया गया था।

उन्होंने बताया कि मानदंड पूरा नहीं करने को लेकर 107 नामांकन पत्र खारिज कर दिये गए।

निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि मुर्मू और सिन्हा के चार-चार सेट नामांकन पत्रों ने वैध नामांकन की सभी अर्हताओं को पूरा किया और उन्हें स्वीकार कर लिया गया।

उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों की अंतिम सूची 2 जुलाई को दोपहर 3 बजे के बाद राजपत्र में प्रकाशित की जायेगी जो नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि है।

राष्ट्रपति चुनाव 18 जुलाई को होगा।

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नामांकन पत्र दाखिल करने वालों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू और संयुक्त विपक्ष के प्रत्याशी यशवंत सिन्हा शामिल हैं।

उनके अलावा, कई आम लोगों ने भी देश के शीर्ष संवैधानिक पद के लिए अपने नामांकन पत्र दाखिल किए थे। इनमें मुंबई के एक झुग्गी निवासी, राष्ट्रीय जनता दल के संस्थापक लालू प्रसाद यादव के एक हमनाम, तमिलनाडु के एक सामाजिक कार्यकर्ता और दिल्ली के एक प्राध्यापक शामिल हैं।

निर्वाचन आयोग ने नामांकन पत्र दाखिल करने वाले व्यक्तियों के लिए कम से कम 50 प्रस्तावक और 50 अनुमोदक अनिवार्य कर दिया है। प्रस्तावक और अनुमोदक निर्वाचक मंडल के सदस्य होंगे।

वर्ष 1997 में, 11वें राष्ट्रपति चुनाव से पहले प्रस्तावकों और अनुमोदकों की संख्या 10 से बढ़ाकर 50 कर दी गई थी, वहीं जमानत राशि भी बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दी गई थी।

कानून के तहत कोई भी भारतीय नागरिक, जिन्होंने 35 वर्ष आयु पूरी कर ली हो तथा लोकसभा सदस्य बनने की पात्रता रखते हों, वे राष्ट्रपति पद के लिये चुनाव लड़ सकते हैं। ऐसे उम्मीदवार को केंद्र या राज्य सरकार अथवा सरकार के नियंत्रण वाले किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकार के तहत किसी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए।