Ambikapur : महाकवि कालिदास व संत नामदेव की जयंती पर तुलसी साहित्य समिति की काव्यगोष्ठी…………….

महाकवि कालिदास व संत नामदेव की जयंती पर तुलसी साहित्य समिति की काव्यगोष्ठी…………….

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पी0एस0यादवlब्यूरो चीफlसरगुजाll महाकवि कालिदास और संत नामदेव की जयंती पर तुलसी साहित्य समिति द्वारा विवेकानंद विद्यानिकेतन में शायरे शहर यादव विकास की अध्यक्षता में सरस काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उमाकांत पाण्डेय, विशिष्ट अतिथि प्रताप पाण्डेय, विनोद हर्ष और आनंद सिंह यादव थे। मां वागीशा के पूजन पश्चात् कवयित्री अर्चना पाठक ने सुरीले स्वरों में सरस्वती-वंदना की सुंदर प्रस्तुति दी। विद्वान वक्ता पं. रामनारायण शर्मा ने कहा कि कालिदास महान् कवि और नाटककार थे। उन्होंने भारत की पौराणिक कथाओं और दर्शन को आधार बनाकर अभिज्ञान शाकुंतलम, मेघदूतम्, कुमार संभवम्, रघुवंशम् आदि अनेक विश्वप्रसिद्ध रचनाओं के द्वारा न केवल साहित्य की अप्रतिम सेवा की बल्कि भारतीय मनीषा को सम्पूर्ण लोक में प्रतिष्ठित भी किया। यद्यपि वे प्रारंभ में निरा मूर्ख थे परन्तु अपनी विदुषी पत्नी तिलोत्तमा की उपेक्षा व मां काली के वरदान से विलक्षण विद्वता व सृजनशीलता हासिल की।

कवयित्री अर्चना पाठक ने कविवर कालिदास के विशिष्ट गुणों का काव्यात्मक परिचय दिया- कालिदास -जैसी उपमा न कोई दे सका है, शब्द योजना में आप सबसे महान हैं। प्रतिभा से युक्त, अभ्यास में भी हैं निपुण। बोधयुक्त, भावयुक्त आप गुणवान हैं। फिल्म अभिनेता व निर्देशक आनंद सिंह यादव ने भारत के सुप्रसिद्ध संत नामदेव के विषय में बताया कि वे भगवान विट्ठल के परमभक्त थे। उन्होंने हिन्दी व मराठी में अनेक भक्ति गीतों की रचना करके संपूर्ण भारत में भगवन्नाम का प्रचार-प्रसार किया। देश के विभिन्न समुदायों में शांति, सद्भाव, समानता, एकता व भाईचारा की स्थापना ही उनके जीवन का मूल उद्देश्य था। संस्था की कार्यकारी अध्यक्ष माधुरी जायसवाल ने दीपों के परमार्थी होने की बात कही- अंधियारे को दूर कर उजियारा फैलानेवाला, कोई विरला ही होता, दीपक-सा साथ निभानेवाला। दीपों की हर पंक्ति सिखाती है परमार्थी होना। जाने-माने गीतकार पूनम दुबे ‘वीणा’ ने अपने भोजपुरी गीत से समा बांध दिया- घरवा-दुअरवा रंगवाइब, अंगना लिपवाइब हम, उखियों के मड़वा बनाके मइया तुलसी के दुलहिन सजाइब। वरिष्ठ कवयित्री गीता दुबे ने मानवीय मुस्कान को वरदान बताया- मुस्कान का वरदान मानव मात्र तेरे पास है, सृष्टि का ना कोई प्राणी, मुस्कान जिसके पास है। प्रताप पाण्डेय ने जीवन निर्वाह के लिए अपनों का साथ होना बेहद ज़रूरी बताया- थमती नहीं है ज़िंदगी, कभी किसी के बिना, मगर गुज़रती भी नहीं अपनों के बिना।

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अपने ‘काव्याशा’ काव्य संकलन से काव्यलोक को सुरभित करनेवाली प्रतिष्ठित कवयित्री आशा पाण्डेय ने काव्य के माध्यम से नवनिर्माण का संकल्प दोहराया- अविरल बहती ही रहे, कविता की रसधार। रुके नहीं ये लेखनी, सपने हों साकार। कविता, दोहा, छंद से, करूं नवल निर्माण। अक्षर-अक्षर में बसे, आशा के हैं प्राण। आशुतोष उपाध्याय ने रिश्ते बनाने में सावधानी बरतने की सलाह दे डाली- रिश्ते जब नाम बदल के रहें, तो वह स्वयं के साथ धोखा है। वीर रस के ओजस्वी कवि अम्बरीष कश्यप ने छत्तीसगढ़ की माटी की महिमा व यहां के निवासियों के संबंध में बिलकुल सही फरमाया कि- हम महानदी, हम पैरी हैं, नहीं किसी के बैरी हैं। चावल की राजधानी है, यहां कबिरा की भी वाणी है। आदिवासी, कंवर, गोंड यहां के मूल निवासी हैं। हम छत्तीसगढ़ के वासी हैं। अजय श्रीवास्तव ने ज़माने की हक़ीक़तों से सबको रूबरू कराया- वक्त ने ज़माने को क्या-क्या दिखा डाला, कैसे-कैसे मंज़र को मिट्टी में मिला डाला। कल जो तनकर चलते थे अपनी शोहरत पर। फूल भी नसीब नहीं अब तो उन मज़ारों को। नेता व कवि विनोद हर्ष ने अना दुखड़ा सुनाया- कोई बात नहीं कि मुझे कोई नहीं जानता। ये बात कम नहीं कि मैं सबको जानता हूं।

शायरे शहर यादव विकास 83 वर्ष की आयु में भी निरंतर सृजनशील हैं। उनकी बेमिसाल ग़ज़लें संपूर्ण मानवता का मार्गदर्शन करती हैं। महफ़िल को उन्होंने अपनी कालजयी ग़ज़लों से रौशन कर दिया- राहगीरों को अंधेरों से निकलने दीजिए, आशिया मेरा जलता है, जलने दीजिए। मैं चमन से दूर तो क्या, दूर चमन मुझसे नहीं। आएगी खुशबू इधर, कलिया चटकने दीजिए। अंत में, काव्याकाश को अपने दोहों की दीप्ति से देदीप्यमान करनेवाले कवि व संस्था के ऊर्जावान अध्यक्ष मुकुंदलाल साहू ने अपने प्रेरक दोहों से संसार को सुखी बनाने के महामंत्र दिए- राम नाम जपते रहो, करते-करते काम। बन जाएं दोनों जहां, सहज सुखों का धाम। पीड़ा पी जो कर सके, जन-जन का कल्याण। शिवि, दधीचि, शिव-सा बने, जग में वहीं महान। गोष्ठी में उमाकांत पाण्डेय व आनंद सिंह यादव ने भी अपनी उम्दा कविताओं की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का काव्यमय संचालन अर्चना पाठक और आभार माधुरी जायसवाल ने जताया। इस अवसर पर प्रकाश कश्यप, लीला यादव, निशा गुप्ता और मुकेश सिंह उपस्थित थे।