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Ambikapur : गुरु घासीदास जयंती व शहीदों की शहादत पर तुलसी साहित्य समिति की काव्यगोष्ठी………………..

‘जिएं-मरें जो देश पर, वे होते हैं वीर, पीछे हटते हैं नहीं, चलें गोलियां, तीर‘

गुरु घासीदास जयंती व शहीदों की शहादत पर तुलसी साहित्य समिति की काव्यगोष्ठी………………..

पी0एस0यादव/ब्यूरो चीफ/सरगुजा// गुरु घासीदास जयंती और देश के महान स्वतंत्रता सेनानी पं. रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी व ठाकुर रोशन सिंह के शहादत दिवस पर तुलसी साहित्य समिति द्वारा शायर-ए-शहर यादव विकास की अध्यक्षता में केशरवानी भवन में ओजमयी काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व बीईओ व वरिष्ठ कवि एसपी जायसवाल, विशिष्ट अतिथि पं. रामनारायण शर्मा, रंजीत सारथी, गीता द्विवेदी व चंद्रभूषण मिश्र थे।  गोष्ठी का शुभारंभ विद्या व ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पारंपरिक पूजा-अर्चना से हुआ। विद्वान वक्ता पं. रामनारायण शर्मा ने कहा कि काकोरी कांड 09 अगस्त,1925 को हुआ था। क्रांतिकारी गतिविधियों व शस्त्र-संघर्ष के लिए पं. रामप्रसाद विस्मिल के नेतृत्व में क्रांतिकारी दल ने सरकारी ख़ज़ाना लूटने के लिए लखनऊ आ रही गाड़ी को रात्रि 08 बजे काकोरी के पास रोककर उसकी तिजोरी निकाल ली।

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यद्यपि सरकारी ख़ज़ाने को लूटने की योजना पूरी सूझ-बूझ के साथ बनाई गई थी, फिर भी बिस्मिल सहित उनके सभी साथी, जिनमें अशफाक उल्ला खां, राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी, ठाकुर रोशन सिंह भी शामिल थे- पकडे गए और उन्हें 17 से 19 दिसंबर, 1927 के बीच अग्रेज़ों ने फांसी पर चढ़ा दिया। इनके बलिदानों से देश के युवाओं में क्रांति की ज्वाला और भी भड़क उठी और देश की आज़ादी का मार्ग प्रशस्त हुआ। अशफाक उल्ला खां ने फांसी का फंदा गले में डालने से पूर्व कहा था- ‘‘मैं हिन्दुस्तान की ज़मीन पर पैदा हुआ हूं। हिन्दुस्तान ही मेरा घर, मेरा धर्म और ईमान है। मैं हिन्दुस्तान के लिए मर-मिटूंगा और इसकी मिट्टी में मिलकर फ़ख्ऱ महसूस करुंगा।’’ अशफाक का यह उदगार आज भी सभी देशवासियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक, संाप्रदायिक सद्भाव व देशभक्ति को बढ़ानेवाला है। पूर्व बीईओ और वरिष्ठ कवि एसपी जायसवाल ने छत्तीसगढ़ के महान संत गुरु घासीदास के अवदानों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने अपने समय की सामाजिक, आर्थिक विषमताओं, कुरीतियों, शोषण व जातिवाद को समाप्त करके मानव-मानव एक समान का नारा बुलंद किया और सतनाम धर्म की स्थापना के लिए सात सिद्धांत-सत्य, अहिंसा, धैर्य, लगन, करुणा, कर्म, सरलता-व्यवहार का प्रतिपादन किया। उन्होंने मानवसेवा की असाधारण मिसाल कायम की।

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गोष्ठी में संस्था के अध्यक्ष मुकुन्दलाल साहू ने देश के महान शहीदों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए अपने दोहों में देश के वीरों के विषय मंे सही फरमाया कि- जिएं-मरें जो देश पर, वे होते हैं वीर, पीछे हटते हैं नही, चलें गोलियां, तीर। शीश समर्पित कर दिए, रहे किंतु गुमनाम। वीर शहीदों को करें, बारंबार प्रणाम। कवयित्री गीता द्विवेदी ने युवाओं को अपनी शक्तियों की पहचान कर, भारत माता की सेवा मंे लग जाने का आह्वान किया- हे भारत के वीर युवाओं ! तुमसे यह अभिलाषा है। भारत माता की सेवा ही आदर की परिभाषा है। शायरा शिरीन खान ने भी अपनी शायरी से वतनपरस्ती का पाठ पठाया- मेरी आंखों से मेरे वतन को देखो, मेरे आशियंा, मेरे चमन को देखो, हरी-भरी धरती और नीले गगन को देखो, तीन रंगाों मंे लहराते अमन को देखो। समिति की उपाध्यक्ष आशा पाण्डेय ने लोागों को मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने की प्रेरणा दी-करते प्यार हम सरज़मीं से, जां निसार है सरज़मीं पे। मर जाएंगेे, मिट जाएंगे, सर कभी न झुकने देंगे, सरज़मीं की शान में।

अपनी वीर रस की कविताओं से धमाल मचानेवाले युवाकवि अम्बरीष कश्यप ने भारतीय नागरिेेकों व भारतभूमि की महानता का ज़ोरदार गौरव-गान किया- भगत सिंह की हिम्मत हैं हम, शेखर की कुर्बानी हैं, गांधी और सुभाष के जैसे, हम विवेक की वाणी हैं। हम मीरा की भक्ति हैं और कबीर का ज्ञान हैं। साधु-संत, योगी और महापुरुषों की संतान हैं। एक बार देखो हमे, हम ही हिन्दुस्तान हैं। संस्था की कार्यकारी अध्यक्ष माधुरी जायसवाल ने अपनी ओजस्वी कविता से श्रोताओं मंे जोश भर दिया- वह ख़ून है किस काम का, जिसमंे आज़ादी की चाहत न हो, जो देश की ख़ातिर खौलता न हो। गुरु घासीदास जयंती को मद्यनिषेध दिवस के रूप मंे मनाए जाने का स्वागत करते हुए अभिनेत्री व कवयित्री अर्चना पाठक ने अपने कुंडलियां छंद मंे सुखी जीवन के लिए नशामुक्ति का संदेश दिया-ठानो नव अभियान, नशा उन्मूलन-नारा। छोड़ो मदिरापान, सुखी जीवन सारा। इस संबंध मंे वरिष्ठ कवयित्री गीता दुबे ने भी नेक सलाह दी-नशा मुक्त हो देश हमारा, रामराज्य हो भारत सारा। प्रतिष्ठित गीताकार व मधुर आवाज़ की मलिका पूनम दुबे ने भारतीय नारी के मान व विवशता का मार्मिक चित्रण किया-रिश्तों की मर्यादा ओढ़ी, नारी-जीवन तन लगाए। तुरपन करती आगे बढ़ती, पैबंद कितने किसे बताए ?

गोष्ठी में शायर-ए-शहर यादव विकास ने अपनी ओजस्वी ग़ज़ल में युवकों की हौसला आफजाई की-हर मुसीबत को संभाला जाएगा, एक नया सूरज निकाला जाएगा। तुम दीपक में पसीना डालकर देखो, दूर तलक उसका उजाला जाएगा। वरिष्ठ कवि एसपी जायसवाल ने कई सरगुजिहा कविताओं की प्रस्तुति देकर समा बांध दिया। उन्होंने पूस माह में पड़ रही भयानक ठंड का भी चित्रण किया-पूस कर महिना गजब जड़ाथे, पाला परथे भाई रे। काव्यगोष्ठी में रंजीत सारथी, चंद्रभूषण मिश्र, अजय श्रीवास्तव व आशुतोष उपाध्याय ने भी अपने प्रतिनिधि कविताओं का पाठ किया। संचालन अर्चना पाठक व निशा गुप्ता ने और आभार आशा पाण्डेय ने जताया। इस अवसर पर लीला यादव, ओमप्रकाश दुबे और लगन दास उपस्थित रहे।

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