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वेयरहाउस व गोदाम पर पुनः सब्सिडी प्रारम्भ : सीए निहाल जैन

रायपुर ।  छत्तीसगढ़ राज्य स्थायी पूंजी अनुदान नियम-2019″ योजना को संशोधित किया गया है। जिससे छत्तीसगढ़ शाशन की औद्योगिक नीति 2019 -24 में कुछ संशोधन किया गया है I

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इस सम्बन्ध में सब्सिडी मामलो के एक्सपर्ट  सी ए निहाल जैन ने जैसा की हमें बताया की औद्योगिक/वाणिज्यिक हेतु व्यपवर्तित भूमि पर लाजिस्टिक हब एवं वेयर हाउसिंग (गोदाम) की नवीन स्थापना/पूर्व स्थापित लाजिस्टिक हब एवं वेयर हाउसिंग (गोदाम) के विस्तार करने पर सामान्य श्रेणी के उद्योगों की भांति अनुदान की पात्रता होगी। लॉजिस्टिक हब एवं वेयर हाउसिंग (गोदाम) की स्थापना के संबंध में राज्य शासन द्वारा लागू किये गए मापदण्डों का पालन अनुदान के प्रयोजन से अनिवार्य होगा।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के विद्यमान कार्यरत/उत्पादनरत उद्योगों के विस्तार/प्रतिस्थापन/शवलीकरण के फलस्वरूप यदि औद्योगिक इकाई की श्रेणी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग से भिन्न श्रेणी अर्थात् वृहद, मेगा अथवा अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट्स की श्रेणी में परिवर्तित होती है तो अनुदान की पात्रता नहीं होगी। एमएसएमई सेवा श्रेणी उद्यमों के मामले में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम सेवा उद्यमों को निर्धारित न्यूनतम स्थायी पूंजी निवेश करने पर निर्धारित मात्रा अनुसार सामान्य श्रेणी के उद्योगों की भांति अनुदान की पात्रता होंगी।

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सूक्ष्म एवं लघु उद्योग के लिए “स” श्रेणी के विकासखण्डों में प्राथमिकता श्रेणी उद्योग हेतु 35 प्रतिशत अनुदान को 40 प्रतिशत किया गया है। सूक्ष्म एवं लघु उद्योग के लिए “स” श्रेणी के विकासखण्डों में उच्च प्राथमिकता श्रेणी उद्योग हेतु 40 प्रतिशत अनुदान को 45 प्रतिशत किया गया है। लघु एवं मध्यम उद्योगों को यह विकल्प की सुविधा होगी कि वे या तो स्थायी पूंजी निवेश अनुदान प्राप्त करें अथवा नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) प्रतिपूर्ति प्राप्त कर सकते है।

नवीन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों/सेवा उद्यम के प्रकरणों में स्थायी पूंजी निवेश की गणना उद्यम आकांक्षा जारी दिनांक से स्थल पर परियोजना का कार्य प्रारम्भ करते हुए वाणिज्यिक उत्पादन/सेवा गतिविधि प्रारम्भ करने के दिनांक तथा वाणिज्यिक उत्पादन/ सेवा गतिविधि प्रारम्भ करने के दिनांक से सूक्ष्म एवं लघु उद्योग/सेवा उद्यमों के प्रकरण में 06 माह की कालावधि में योजना के मदों में किया गया स्थायी पूंजी निवेश को शामिल किया जावेगा, मध्यम उद्योग/मध्यम सेवा उद्यम के प्रकरणो में यह अवधि 12 माह होगी। विद्यमान उद्योगों/सेवा उद्यमों के विस्तार/ शवलीकरण/ प्रतिस्थापन के प्रकरणों में सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों/सेवा उद्यमों के प्रकरण में 06 माह, मध्यम उद्योग/मध्यम सेवा उद्यम के प्रकरणों में यह अवधि 12 माह की कालावधि में योजना के मदों में किया गया स्थायी पूंजी निवेश को शामिल किया जावेगा।

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