
पति की दीर्घायु के लिए सुहागिनों ने सोमवती अमावस्या को पीपल का पूजा की
पति की दीर्घायु के लिए सुहागिनों ने सोमवती अमावस्या को पीपल का पूजा की
नगर में पीपल, आम, नीम ,आंवला बरगद का टोटा महिलाएं पूजा के लिए भटकती रही
गोपाल सिंह विद्रोही विश्रामपुर -पति की लंबी उम्र की कामना के लिए आज सुहागिन महिलाओं ने सोमवती अमावस्या को पीपल की पूजा अर्चना की
जानकारी के अनुसार आज सोमवती अमावस्या है आज प्रातः 5 बजे से सुहागिन महिलाओं ने पीपल की परिक्रमा कार 108 बार परिक्रमा कार कच्चे धागा बांधकर भगवान शंकर से अपने पति की लंबी दीर्घायु की कामना की। नगर की विभिन्न कालोनियों एवं मुख्य बाजार की महिलाओं ने प्रातः 5 से संत 6:30 बजे तक पीपल के पेड़ में कई धार्मिक अनुष्ठान किए साथ ही कच्चा सूत से 108 बार परिक्रमा कर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति परिवार की समृद्धि दीर्घायु की कामना की।
उल्लेखनीय है कि हिंदू धर्म में प्रत्येक दिन व त्योहार का अपना एक विशेष महत्व होता है। इसी तरह सोमवती अमावस्या का भी खास महत्व माना गया है।हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह अमावस्या आती है लेकिन सोमवती अमावस्या साल में केवल 2 या 3 बार ही पड़ती है।इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा का महत्व होता है और सोमवती अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है. साथ ही सुहागिन महिलाओं के लिए यह दिन बहुत खास है और इस दिन वह व्रत रखती हैं। महिलाओं के लिए खास है सोमवती अमावस्या का व्रत सुहागिनें
सोमवती अमावस्या का व्रत अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना के लिए करती हैं। इस दिन सुहागिनें व्रत रखकर पीपल के वृक्ष की दूध, पुष्प, अक्षत, चन्दन एवं अगरबत्ती से पूजा-अर्चना करती हैं और उसके चारों ओर 108 धागा लपेटकर परिक्रमा करती हैं तथाभगवान शिव से पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती ।
नगर में पीपल पेड़ का टोटा
आज सोमवती अमावस्या है आज के दिन 24 घंटे ऑक्सीजन प्रदान करने वाला संजीवनी वृक्ष पीपल का टोटा है। नगर में कहीं कहीं ही पीपल का पेड़ देखने को मिलता है। जिस कारण सुहागिन महिलाओं को पूजा अर्चना करने में भारी दिक्कत होती है। पर्यावरणविद बताते हैं कि वायुमंडल में संतुलन बनाए रखने मे पीपल , बरगद , नीम ,अशोक एवं आंवला का महत्वपूर्ण योगदान है। पीपल 24 घंटे ऑक्सीजन प्रदान करता है, इसी कारण से इसे संजीवनी वृक्ष भी कहा जाता है। पूर्वजों ने इन्हें सुरक्षित रखने हेतु धार्मिक मान्यताओं से जोड़ दिया। परंपराओं के कारण पीपल ,नीम, बरगद,आंवला की पूजा कर इसे सुरक्षित रखने का प्रयास करते हैं, परंतु नई पीढ़ियों को इससे कोई लेना-देना नहीं है ।आज यही कारण है कि नगर में बरगद, पीपल , नीम, आंवला पेड़ का टोटा है











