बिजली के बकायादारों में तमिलनाडु पहले और झारखंड दूसरे नंबर पर

केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण ने जारी की अक्टूबर से दिसंबर तक की रिपोर्ट
सीईए(केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण) द्वारा हर तीन महीने में बिजली खरीदने के बाद भुगतान में 45 दिन और उससे अधिक देरी करने वाले राज्यों की सूची जारी की जाती है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 20 हजार करोड़ से अधिक की देनदारी राज्यों के डिस्कॉम पर है। इसमें हर महीने इजाफा हो रहा है। सीईए ने अक्टूबर से दिसंबर तक की रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी पर यह देनदारी जीरो है। जबकि अन्य राज्य की कंपनियां करोड़ों की देनदारी में डूबे हुए हैं। गौरतलब है कि बिजली खरीदने के बाद उसका भुगतान 45 दिन के भीतर हर हाल में करना होता है, लेकिन कंपनियां इसके भुगतान में देरी कर रहे हैं।

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इसका असर सीधे उपभोक्ताओं पर
समय पर पैसे नहीं मिलने की वजह से इसका असर पॉवर कंपनियों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। पॉवर कंपनियां घाटे में जा रही है। इसके अलावा कंपनियां लगातार करार भी तोड़ रहे हैं। दूसरी पॉवर कंपनियां महंगी दर पर बिजली बेच रही हैं। इससे बिजली की दर और महंगी हो रही है।
0 कोयले के लिए कर्ज भी नहीं लेना पड़ा
वर्ष 2022 में बिजली की डिमांड बढ़ी थी तब राज्यों की बिजली उत्पादन कंपनियों को कोयले की आपूर्ति बनाए रखने के लिए मशक्कत करनी पड़ी थी। विदेश से आयतित कोयले पर निर्भरता बढ़ गई थी। महंगे कोयले की वजह से सरकारी बिजली कंपनियों पर वित्तीय लोड बढ़ गया है। वर्तमान स्थिति में महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक की सरकारी बिजली कंपनियों को कोयला खरीदने के लिए लोन लेना पड़ रहा है।बिजली कंपनियों को कार्यशील पूंजी कम होने पर कोयले के लिए रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कारपोरेशन लिमिटेड(आरईसी) से कुल 37 सौ करोड़ का लोन लेना लिया है।
तेलंगाना पर 36 सौ करोड़ की देनदारी
छत्तीसगढ़ राज्य उत्पादन कंपनी करीब 13 हजार करोड़ की लागत से नया प्लांट बनाने जा रही है, सीएम ने तीन महीने पहले की इसकी घोषणा की है। वहीं तेलंगाना पर बिजली का करीब 36 सौ करोड़ की देनदारी है। इस स्थिति में भी कंपनी की वित्तीय स्थिति बेहतर बनी हुई है।
गिनती के राज्य जिन पर बकाया जीरो
गिनती के ही राज्य हैं जिन पर बिजली का बकाया जीरो है। इसमें ओडिसा, गुजरात, गोवा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, असम और नागालैंड का बकाया लगातार जीरो है।