Advertisement

उत्तर प्रदेश में योगी-अखिलेश के बीच की लड़ाई अब सारस के मुद्दे पर गर्मायी

उत्तर प्रदेश की राजनीति को एक सारस ने हिला कर रख दिया है। इस सारस को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गया है।

एक तरफ सारस और उसके पालक के पक्ष में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा खड़ी हैं तो दूसरी ओर योगी सरकार इस सारस को संरक्षित पक्षी बताते हुए उसे चिड़ियाघर लेकर चली गई है। मामला कुछ इस प्रकार है। करीब एक वर्ष पूर्व अमेठी निवासी मोहम्मद आरिफ़ के यहां एक सारस (पक्षी) घायल अवस्था में उड़कर आ गया था। आरिफ ने इस सारस की देखभाल की। वह बिल्कुल ठीक हो गया, लेकिन तब तक सारस पालतू बन चुका था।

स्वस्थ होने के बाद भी वह आरिफ के इर्दगिर्द ही मंडराता रहता था। आरिफ को भी सारस से मोह हो गया था। वो आरिफ़ के साथ ही खाना खाता और घूमता था। आरिफ़ ने सारस को कभी क़ैद में नहीं रखा क्योंकि वह एक आज़ाद पंछी था। सारस और आरिफ के बीच की दोस्ती धीरे-धीरे सुर्खियां बटोरने लगी। वन विभाग के ‘कानों’ में भी यह बात पहुंच गई थी, लेकिन वन विभाग का कोई अधिकारी इस बारे में उससे जानकारी लेने नहीं आया।

उधर, सारस और आरिफ़ की कहानी मीडिया में देखने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी आरिफ़ और उस सारस से मिलने अमेठी गए और उनके साथ ली गई तस्वीर भी साझा की। बस इसी के बाद आरिफ और सारस के बीच ‘सरकार’ आ गई। वन विभाग कर्मी आरिफ के यहां पहुंचे और सारस को संरक्षित पक्षी बताते हुए अपने साथ ले गए।

वन विभाग की कार्रवाई के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव मीडिया से रूबरू हुए तो उनके साथ आरिफ भी मौजूद थे। आरिफ की मौजूदगी में ही अखिलेश ने आरोप लगाया कि वन विभाग सारस को इसलिए ले गया क्योंकि उन्होंने आरिफ़ और सारस से मुलाक़ात की थी। अखिलेश ने यहां तक कहा कि कोई सारस किसी इंसान के साथ रहे और उसका व्यवहार बदल जाए। यह तो शोध का विषय है कि सारस इनके पास कैसे रुक गया।

अखिलेश ने आरोप लगाया कि इनसे सारस इसलिए छीन लिया गया क्योंकि मैं मिलने चला गया था। क्या यही लोकतंत्र है? अगर सरकार सारस को छीन रही है, तो सरकार को उनसे भी मोर छीन लेना चाहिए जो मोर को दाना खिला रहे थे। अखिलेश का इशारा प्रधानमंत्री मोदी के लिए था।

Gemini_Generated_Image_fohysbfohysbfohy
WhatsApp-Image-2026-03-12-at-6.48.17-PM-1-298x300 (1)
sjjj

अखिलेश ने कहा कि वहां पहुँच जाने की, किसी अधिकारी की हिम्मत है कि वहां जाए और मोर को ले आए वहां से ? यह सिर्फ़ इसलिए किया सरकार ने क्योंकि सारस से और सारस को पालने वाले आरिफ़ से मैं मिल कर आ गया। अखिलेश ने कहा कि यदि आरिफ की जगह कोई और होता तो भाजपा वाले उसे पशु प्रेमी बताकर सम्मानित करने लगते।

मीडिया ने जब आरिफ़ से पूछा कि क्या उन्होंने कभी वन विभाग से संपर्क कर सारस के बारे में जानकारी दी थी, तो उन्होंने ने कहा कि मुझे वाइल्ड लाइफ़ के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। मैं खेती किसानी करता हूँ तो उस विषय में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है। पर इतना जानता हूं कि जब हम इसको क़ैद करेंगे, बाँध के रखेंगे, जकड़ कर रखेंगे, तब तो वन विभाग का वो सवाल उठता है। वो स्वयं अपनी इच्छा से आता था। आरिफ़ कहते हैं कि सारस को वन विभाग के कर्मी पास के समसपुर पक्षी विहार ले गए हैं। आरिफ़ का दावा था कि वन विभाग के अधिकारियों ने उनसे कहा कि वो समसपुर पक्षी विहार के पास 20 से 25 दिन दिखाई न दें।

उधर, अखिलेश की तेजी के बाद इस मामले पर राज्य में सियासत तेज़ हो गई है तो बाद में इसमें कांग्रेस नेत्री प्रियंका वाड्रा भी कूद पड़ीं, क्योंकि मामला अमेठी से जुड़ा हुआ था, जो कभी गांधी परिवार का पुश्तैनी संसदीय क्षेत्र हुआ करता था। राहुल गांधी भी यहां से सांसद हुआ करते थे। कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा ने भी वन विभाग की इस कार्रवाई के बारे में फ़ेसबुक पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा कि अमेठी के रहने वाले आरिफ़ और एक सारस पक्षी की दोस्ती, जय-वीरू की तरह थी। साथ-साथ रहना, साथ खाना, साथ आना-जाना। उनकी दोस्ती इंसान की जीवों से दोस्ती की मिसाल है। आरिफ़ ने उनके प्रिय सारस को घर के सदस्य की तरह पाला, उसकी देखभाल की, उससे प्यार किया। ऐसा करके उन्होंने पशु-पक्षियों के प्रति इंसानी फ़र्ज़ की नज़ीर पेश की है जो कि काबिल-ए-तारीफ़ है। उन्होंने ऑस्कर अवार्ड पाने वाली भारत की डॉक्यूमेंट्री एलिफैंट व्हिस्पर्स का हवाला देते हुए लिखा, ‘द एलिफैंट व्हिस्पर्स को ऑस्कर मिला जो एक हाथी और इंसान की संवेदनशील कहानी पर आधारित है। ये कहानियां हमें इसलिए भावुक करती हैं क्योंकि मनुष्य का जीवन और पर्यावरण में पाए जाने वाले जितने भी सहजीवन हैं दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। सरकारों का भी यही काम है कि ऐसी कहानियों से प्रेरणा लें और वन्य जीवों व इंसानों के बीच मोहब्बत भरे रिश्ते से संवेदना के मोती चुनें।

file_0000000093d882119d122d54d9d757b5
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.12.06
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.38
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39 (1)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40 (1)
WhatsApp-Image-2026-08-15-at-00.21.47