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ED ने 51.57 करोड़ की संपत्तियां कुर्क की, OSBPL के फर्जी हाउसिंग प्रोजेक्ट में धोखाधड़ी का खुलासा

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मेसर्स ओशन सेवन बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड (OSBPL) के मामले में 51.57 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को कुर्क किया। जांच में पता चला कि प्रमोटर स्वराज सिंह यादव ने निवेशकों और घर खरीदारों के पैसे का गैरकानूनी इस्तेमाल किया।

नई दिल्ली, 07 जनवरी 2026: प्रवर्तन निदेशालय (ED), हरियाणा कार्यालय ने मेसर्स ओशन सेवन बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड (OSBPL) के खिलाफ 51.57 करोड़ रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत अनंतिम रूप से कुर्क कर दिया।

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ED की इस कार्रवाई के तहत कुल 49.79 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां शामिल हैं, जिनमें विला, होटल और रिसॉर्ट, कार्यालय भवन, और विभिन्न भूमि पट्टे शामिल हैं। ये संपत्तियां गुरुग्राम, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र में स्थित हैं। इसके अतिरिक्त, 1.78 करोड़ रुपये की चल संपत्ति, जिसमें कैश और विभिन्न बैंक खातों में जमा बैलेंस शामिल हैं, को भी कुर्क किया गया। ये बैंक खाते OSBPL, इसके प्रमोटर स्वराज सिंह यादव, और उससे जुड़े अन्य संस्थाओं के नाम पर थे।

ED ने इकोनॉमिक ऑफेंस विंग, दिल्ली पुलिस और हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। ये एफआईआर OSBPL द्वारा संचालित सस्ते हाउसिंग प्रोजेक्ट्स से जुड़े हैं। इन प्रोजेक्ट्स में निवेशकों और घर खरीदारों को समय पर निर्माण और कानूनी डिलीवरी का भरोसा देकर बड़ी रकम वसूली गई, लेकिन वास्तविकता में प्रोजेक्ट अधूरे रह गए।

जांच में यह सामने आया कि OSBPL द्वारा घर खरीदारों और निवेशकों के पैसे का गलत इस्तेमाल किया गया। वादा किए गए घर, कार्यालय और अन्य इकाइयों का निर्माण नहीं हुआ और आवंटन मनमाने ढंग से रद्द कर दिया गया। इसके परिणामस्वरूप निवेशकों और घर खरीदारों को लंबे समय तक वित्तीय नुकसान और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

ED की जांच में यह भी पता चला कि OSBPL के प्रमोटर स्वराज सिंह यादव ने फंड के गलत इस्तेमाल में केंद्रीय भूमिका निभाई। खरीदारों से मिले पैसे का इस्तेमाल परियोजनाओं के लिए किए जाने के बजाय अन्य निजी खर्च, संपत्ति खरीद, और अन्य गैर-कानूनी कार्यों में किया गया।

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जांच में यह खुलासा हुआ कि OSBPL के घर खरीदारों और निवेशकों के पैसे को सीधे प्रोजेक्ट के लिए सुरक्षित एस्क्रो फंड में रखने के बजाय फ्री अकाउंट्स और संबद्ध कंपनियों के माध्यम से घुमाया गया। इस प्रक्रिया में कानूनी सुरक्षा उपायों को अनदेखा किया गया और असली आवंटियों को बार-बार कीमत बढ़ाकर पुनः बेचा गया

  • पार्किंग स्पेस और कैंसिल हुई यूनिट्स को तय सीमा से कहीं अधिक कीमत पर बेचा गया।
  • गैर-कानूनी कैंसलेशन को सही ठहराने के लिए जाली और बनावटी दस्तावेज़ों का इस्तेमाल किया गया।
  • दूसरे निवेशों और निजी खर्चों के लिए फंड को और अधिक लेयर में बांटा गया, जिससे धोखाधड़ी और भी जटिल हुई।

इस पूरी योजना से यह स्पष्ट होता है कि OSBPL और उसके प्रमोटर ने घर खरीदारों के भरोसे का जानबूझकर गलत इस्तेमाल किया।

ED द्वारा की गई यह कार्रवाई देश में वित्तीय धोखाधड़ी और हाउसिंग स्कैम पर कड़ा संदेश है। इस कदम से स्पष्ट होता है कि

  • घर खरीदारों और निवेशकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
  • PMLA, 2002 के तहत आर्थिक अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
  • संपत्ति कुर्क करने से भविष्य में अन्य कंपनियों और प्रमोटरों के लिए धोखाधड़ी रोकने का उदाहरण बनेगा।

ED ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है और आवश्यकतानुसार अधिक चालान और आरोप पत्र दायर किए जाएंगे। स्वराज सिंह यादव और OSBPL के अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ अपराधों की पूरी श्रृंखला का खुलासा किया जाएगा।

यह मामला यह भी दिखाता है कि सस्ते हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के माध्यम से निवेशकों को ठगने की प्रवृत्ति कितनी गंभीर है और इसकी रोकथाम के लिए कड़ी निगरानी और कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।

Ashish Sinha

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