नंदकुमार का कांग्रेस में आना मतलब मोदी की फेस वेल्यू गिर रही : मरकाम

रायपुर । वरिष्ठ आदिवासी नेता नंदकुमार साय के कांग्रेस प्रवेश पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि नंदकुमार साय के कांग्रेस प्रवेश से यह साबित हो गया कि प्रधानमंत्री मोदी की फेस वेल्यू देश में अब गिर रही है। यही कारण है कि नंदकुमार साय जैसा वरिष्ठ नेता जो भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक है भाजपा छोड़कर कांग्रेस प्रवेश कर लिये। भाजपा आदतन आदिवासी विरोधी है। भाजपा के अंदर आदिवासी नेताओं को प्रताड़ित और शोषित किया जाता है। विश्व आदिवासी दिवस के दिन आदिवासी प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय को पद से हटा कर भाजपा ने आदिवासी समाज के प्रति अपने रवैय्ये को प्रदर्शित किया था। नंदकुमार साय वरिष्ठतम आदिवासी नेताओं में से एक है उन्होंने भाजपा छोड़ा है तो यह भाजपा की आदिवासी विरोधी सोच का ही परिणाम है।

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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस ने आदिवासी समाज का न सिर्फ सम्मान किया आदिवासी समाज को उनके संवैधानिक अधिकारों को बहाल करने का भी काम किया है। यही कारण है कि नंदकुमार साय जैसे वरिष्ठ और विद्वान आदिवासी नेता कांग्रेस नेता ने कांग्रेस में शामिल हुये।

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मोहन मरकाम ने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद बीते साढ़े चार वर्ष में आदिवासी जनजाति वर्ग के लिये सरकार ने अनेक कल्याणकारी योजना बनाकर काम किया है। जिसके चलते आदिवासी वर्ग की जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है इससे पूरा आदिवासी समाज प्रभावित हुआ। भाजपा से जुड़े आदिवासी नेता भी कांग्रेस सरकार की कामों की तारीफ कर रहे है। आदिवासी वर्ग के हित के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजना बनाई गई। आदिवासियों के शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, जल, जंगल, जमीन, उनके कानूनी अधिकारों के लिए काम किया गया है। कांग्रेस की सरकार ने आदिवासी वर्ग के चहुंमुखी विकास के लिए रोजगार मूलक योजनाएं बनाई। बस्तर क्षेत्र में आदिवासी के वर्ग शिक्षा के लिए 300 से अधिक बंद स्कूलों को शुरू किया गया। नक्सलवाद को खत्म करने के लिए विश्वास, विकास और सुरक्षा के नीतियों के तहत काम किया गया। रमन सरकार के दौरान लौहंडीगुडा दस गांवों के 1707 आदिवासी परिवार से छीनी गई 4200 एकड़ जमीन को लौटाई गई। जेलो में बंद निर्दोष आदिवासियो की रिहाई के लिये जस्टिस पटनायक की अध्यक्षता में कमेटी बनाया गया उनकी अनुशंसा पर जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों को जेल से मुक्त कराया गया। 870 मामलो में बंद निर्दोषो की रिहाई हुयी।

उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता का मानक दर 2500 रु से बढ़ाकर 4000 रु प्रति बोरा किया गया। 65 वनोपज की समर्थन मूल्य में खरीदी की गई, चरणपादुका खरीदने नगद राशि दी गई। बस्तर में मक्का प्रोसेसिंग प्लांट लगाया गया। 24827 व्यक्तिगत 20,000 से अधिक सामुदायिक व 2200 वन संसाधन पट्टे वितरित किए गए, 16 लाख से अधिक हेक्टर भूमि आदिवासी वर्ग को वितरित किया गया है। 4,38,000 से अधिक व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र वितरित करने का शुरू किया गया। 44,300 से अधिक सामुदायिक वन अधिकार पत्र वितरित किया गया। 2175 से अधिक वन संसाधन अधिकार ग्राम सभा को प्रदान की गई। मिलेट मिशन शुरू किया गया और बस्तर के वनोपज को देश-विदेश तक पहुँचाया गया।