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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जनपद पंचायत मस्तूरी के बेलटूकरी स्थित रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में आजीविका गतिविधियों का अवलोकन किया

रायपुर : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जनपद पंचायत मस्तूरी के बेलटूकरी स्थित रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में आजीविका गतिविधियों का अवलोकन किया

जनपद पंचायत मस्तूरी के बेलटूकरी स्थित रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में आजीविका गतिविधियों का अवलोकन किया

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जनपद पंचायत मस्तूरी के बेलटूकरी स्थित रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में आजीविका गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने इस अवसर पर समूह की महिलाओं से विभिन्न आजीविका गतिविधियों की जानकारी भी ली।

मुख्यमंत्री ने बेकरी उत्पादन यूनिट का अवलोकन किया और यहां उत्पादन के कार्य में लगी सदस्य से बात भी की।

आदर्श स्व-सहायता समूह की सदस्य निर्मला पटेल बताया कि यहां पर 1 महीने पूर्व शासन की मदद से 03 लाख की लागत से बेकरी यूनिट स्थापित किया गया है। निर्मला ने बताया कि इस यूनिट के माध्यम से ब्रेड, केक और कुकीज़ का निर्माण कर आसपास के होटल और गांव में बिक्री करते हैं पिछले 15 दिनों में लगभग 10 हजार के बेकरी उत्पाद की बिक्री कर चुके हैं जिससे 5 हजार का फायदा हुआ है। निर्मला ने बताया कि समूह में 10 सदस्य हैं। बिलासपुर के सी-मार्ट और आसपास के होटलों से 80 हजार का आर्डर मिला है।

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बोरी सिलाई यूनिट में कार्य कर रही जय मां वैष्णवी स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती शांति कैवर्त ने बताया कि 1 महीने पहले शासन की मदद से 4.5 लाख की लागत से बोरी सिलाई यूनिट स्थापित किया गया है। लगभग 12 सौ बोरी की बिक्री आसपास के गौठान में कर चुके हैं जिससे 3000 रुपये का फायदा हुआ है। श्रीमती शांति ने बताया कि आसपास के गौठानो से 61 हजार 760 रुपये के लगभग 6 हजार बोरी का आर्डर मिल चुका है।

दोना पत्तल यूनिट में कार्य कर रही वैष्णवी स्व-सहायता समूह की सदस्य ममता ने बताया कि समूह में 8 सदस्य हैं। शासन द्वारा ढाई लाख रुपए की लागत से दोना पत्तल मशीन इकाई स्थापित की गई है। अब तक 150 बंडल दोना तथा 150 बंडल पत्तल का निर्माण कर 15 हजार रुपये के दोना पत्तल की बिक्री कर चुके हैं जिससे हम महिलाओं को 5 हजार रुपये का फायदा हुआ है।

स्व-सहायता समूह की सदस्य आशा ने बताया कि रूरल इंडस्ट्रियल पार्क एसएचजी में हम 7 महिलाएं सूट, ब्लाउज, बैग, पेटीकोट तथा रुमाल की सिलाई कर रही हैं।

अब तक आसपास के गांव से आर्डर मिलने पर 25 हजार की बिक्री कर चुके हैं जिससे हमें 15 हजार रुपये का फायदा हुआ है।
सदस्य संतोषी कैवर्त ने बताया कि पहले घर में खाली बैठे रहते थे, काम नहीं था अब सिलाई कार्य से आमदनी भी हो रही है और परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है।

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