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NEET पेपर लीक विवाद: जंतर-मंतर पर कॉजपा का विरोध प्रदर्शन, सोनम वांगचुक के अनशन को मिला टीएमसी का समर्थन






जंतर-मंतर पर 12वें दिन भी जारी रहा कॉजपा का विरोध प्रदर्शन, सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का चौथा दिन: सागरिका घोष, योगेंद्र यादव और अंजलि भारद्वाज ने जताया समर्थन


प्रदेश खबर नेटवर्क

NEET पेपर लीक विवाद: जंतर-मंतर पर 12वें दिन भी डटी कॉकरोच जनता पार्टी, सोनम वांगचुक के अनशन को मिला टीएमसी और नागरिक समाज का बड़ा समर्थन

स्थान: नई दिल्ली | दिनांक: 1 जुलाई, 2026 | अपडेटेड: 11:15 PM IST

देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था में सुधार और अकादमिक पारदर्शिता की मांग को लेकर जारी आंदोलन अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक मोड़ पर पहुंच गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में चल रहा विरोध प्रदर्शन बुधवार को अपने 12वें दिन भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहा। वहीं, इस आंदोलन को धार देने के लिए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रख्यात नागरिक अधिकार व जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन का आज चौथा दिन था। आंदोलनकारियों के बिगड़ते स्वास्थ्य के बीच बुधवार को देश की प्रमुख राजनीतिक हस्तियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने धरना स्थल का दौरा कर आंदोलन को अपना खुला समर्थन दिया।

प्रदर्शन स्थल पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष, जाने-माने सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और प्रख्यात सूचना अधिकार (RTI) कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने पहुंचकर आंदोलनकारियों से मुलाकात की। इन नेताओं ने न केवल अनशन पर बैठे छात्रों और वांगचुक के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की, बल्कि देश की मौजूदा परीक्षा प्रणाली और केंद्र सरकार के रवैये पर तीखे सवाल भी उठाए।

अंजलि भारद्वाज का संबोधन: “बुनियादी मांगों के लिए भूख हड़ताल पर बैठना शर्मनाक”

धरना स्थल पर मौजूद छात्रों, युवाओं और देश के विभिन्न हिस्सों से आए नागरिक समाज संस्थाओं के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए अंजलि भारद्वाज ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और “शर्मनाक” है कि देश के भविष्य यानी युवाओं को परीक्षा प्रश्न पत्र लीक जैसी गंभीर और बुनियादी समस्याओं को खत्म करने की मांग के लिए भूख हड़ताल जैसे कठोर कदम का सहारा लेना पड़ रहा है।

उन्होंने आगे कहा, “एक ऐसे देश में जहां शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की नींव माना जाता है, वहां बार-बार होने वाले पेपर लीक ने करोड़ों छात्रों के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है। छात्र केवल अपनी मेहनत का हक मांग रहे हैं। परीक्षा की शुचिता बनाए रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन जब तंत्र पूरी तरह विफल हो जाता है, तो देश के सबसे सम्मानित नागरिकों और युवा पीढ़ी को इस भीषण गर्मी में सड़कों पर बैठना पड़ता है। यह सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।”

“परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही कोई ऐसी मांग नहीं है जिसके लिए किसी को अपने जीवन को दांव पर लगाना पड़े। यह एक लोकतांत्रिक देश के नागरिकों का बुनियादी अधिकार है। सोनम वांगचुक और इन युवा छात्रों का यह संघर्ष केवल एक परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश की प्रशासनिक ईमानदारी को बचाने की लड़ाई है।” – अंजलि भारद्वाज, सामाजिक कार्यकर्ता

आंदोलन की मुख्य मांगें और राजनीतिक दबाव

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और आंदोलनकारी छात्रों की मांगें बेहद स्पष्ट हैं। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के बड़े घोटाले के सामने आने के बाद से ही युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा है। आंदोलन के प्रमुख रणनीतिकारों और कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके का कहना है कि जब तक इस पूरे तंत्र की कमियों को दूर नहीं किया जाता और इसके शीर्ष जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक यह लड़ाई थमने वाली नहीं है।

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प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों को निम्नलिखित रूप से रेखांकित किया जा सकता है:

  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।
  • परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली की न्यायिक जांच हो और भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए सख्त और पारदर्शी कानून लागू किया जाए।
  • पीड़ित छात्रों को न्याय: परीक्षा में हुई धांधली के कारण मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेल रहे करोड़ों छात्रों को उचित मुआवजा और मानसिक संबल प्रदान किया जाए।
  • जवाबदेही तय हो: पेपर लीक रैकेट के पीछे शामिल बड़े शिक्षा माफियाओं और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ समयबद्ध और कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत ने बढ़ाई चिंता

पिछले चार दिनों से अन्न का एक दाना भी न लेने के कारण सोनम वांगचुक की शारीरिक स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। धरना स्थल पर मौजूद डॉक्टरों की एक विशेष मेडिकल टीम लगातार उनके स्वास्थ्य मापदंडों की निगरानी कर रही है। बुधवार को जारी मेडिकल अपडेट के अनुसार, इस भीषण गर्मी के बीच लगातार अनशन करने से उनके शरीर में पानी की कमी (Dehydration) देखी गई है।

डॉक्टरों के मुताबिक, पिछले 96 घंटों में उनका वजन लगभग 2 किलोग्राम तक कम हो गया है। इसके साथ ही उनके रक्तचाप (Blood Pressure) और ब्लड शुगर के स्तर में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी इन चुनौतियों के बावजूद वांगचुक का हौसला डिगा नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया और प्रेस के माध्यम से संदेश दिया है कि देश के युवाओं के भविष्य को बचाने के लिए उनका यह शांतिपूर्ण सत्याग्रह तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार कोई ठोस और संवेदनशील कदम नहीं उठाती।

आंदोलन का विवरण वर्तमान स्थिति (बुधवार, 12वां दिन)
कॉजपा का कुल प्रदर्शन काल 12 दिन (20 जून से निरंतर जारी)
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 04 दिन (28 जून से शुरू)
प्रमुख मांग पेपर लीक का खात्मा, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और NTA में सुधार
स्वास्थ्य स्थिति (वांगचुक) वजन में 2 किलो की गिरावट, रक्तचाप और शुगर लेवल कम
समर्थक दल और संगठन तृणमूल कांग्रेस (TMC), नागरिक समाज, किसान यूनियन और छात्र संगठन

सागरिका घोष और योगेंद्र यादव ने साधा सरकार पर निशाना

धरना स्थल पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने कहा कि ममता बनर्जी और उनकी पूरी पार्टी इस न्यायसंगत लड़ाई में देश के छात्रों के साथ खड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संसद से लेकर सड़क तक युवाओं की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। विपक्षी दल आगामी दिनों में इस मुद्दे को संसद के भीतर भी पूरी प्रखरता के साथ उठाएंगे और सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर करेंगे।

वहीं, सामाजिक-राजनीतिक विश्लेषक और स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने आंदोलन की रूपरेखा पर बात करते हुए कहा कि जब युवा जाग जाता है, तो बड़े से बड़े साम्राज्य को झुकना पड़ता है। उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि देश का मुख्यधारा का मीडिया और प्रशासनिक तंत्र इस गंभीर मानवीय और शैक्षणिक संकट को नजरअंदाज करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने देश के अन्य हिस्सों के नागरिक समाजों, किसान संगठनों और मजदूर यूनियनों से भी अपील की कि वे इस ऐतिहासिक छात्र आंदोलन को अपना समर्थन दें, क्योंकि यह देश के भविष्य के निर्माण का सवाल है।

शांतिपूर्ण प्रतिरोध और पुलिसिया अवरोध के आरोप

आंदोलन के शांतिपूर्ण स्वरूप की प्रशंसा करते हुए कॉजपा के कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन और स्थानीय पुलिस उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को बाधित करने का प्रयास कर रही है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आ रहे कई छात्र और किसान नेताओं को दिल्ली सीमा पर रोकने की कोशिश की गई। इसके अतिरिक्त, धरना स्थल पर बुनियादी सुविधाएं जैसे साफ-सफाई और पानी की निर्बाध आपूर्ति को लेकर भी प्रशासनिक असहयोग का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इन सबके बावजूद, प्रदर्शनकारी पूरी तरह से गांधीवादी और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।

आगे की राह: आंदोलन के राष्ट्रव्यापी होने के आसार

जंतर-मंतर पर विपक्षी नेताओं और नागरिक समाज के दिग्गजों के इस संयुक्त दौरे के बाद अब इस आंदोलन के दिल्ली से निकलकर देश के अन्य राज्यों में भी फैलने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों के भीतर केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल अनशनकारियों से वार्ता करने नहीं आता है, तो देशव्यापी चक्का जाम और जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे।

फिलहाल, जंतर-मंतर पर देशभक्ति के गीतों, नारों और तख्तियों के साथ युवाओं का हुजूम डटा हुआ है। डॉक्टरों की टीम पल-पल अनशनकारियों की सेहत पर नजर रखे हुए है, और पूरे देश की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या केंद्र सरकार इस गंभीर होते जा रहे संकट पर अपनी चुप्पी तोड़ेगी या युवाओं का यह संघर्ष और उग्र रूप अख्तियार करेगा।

संपादकीय प्रभाग

प्रदेश खबर न्यूज नेटवर्क के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्ट


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