Advertisement

MP UCC Bill Passed: विधानसभा में भारी हंगामे के बीच समान नागरिक संहिता बिल पास, सेलेक्ट कमेटी की मांग खारिज






मध्य प्रदेश विधानसभा में भारी हंगामे और वॉकआउट के बीच UCC बिल पास, सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग खारिज


एमपी में UCC बिल पास: सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग खारिज; हंगामे के बीच विधानसभा की कार्यवाही 2 बार स्थगित

प्रवेश खबर विशेष रिपोर्ट | अपडेटेड: जुलाई 2026 | स्थान: भोपाल

भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को सदन में अभूतपूर्व हंगामा, तीखी नोक-झोंक और भारी विरोध के बीच समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़ा विधेयक पास हो गया। विपक्ष के तमाम विरोध प्रदर्शनों, वेल में आकर नारेबाजी और वॉकआउट के प्रयासों के बावजूद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन की कार्यवाही जारी रखते हुए इस महत्वपूर्ण विधेयक को पास घोषित कर दिया। सत्र की शुरुआत से ही राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर थी और सदन के भीतर तथा बाहर दोनों जगह गहमागहमी का माहौल देखने को मिला।

सत्र की शुरुआत से पहले कांग्रेस का सांकेतिक नाटक

सदन की कार्यवाही आधिकारिक रूप से शुरू होने से ठीक पहले, विधानसभा परिसर में कांग्रेस विधायकों ने यूसीसी के विरोध में एक अनोखा प्रदर्शन किया। विधायकों ने सांकेतिक नाटक का मंचन कर सरकार की नीतियों पर करारा प्रहार किया। इस नाटक के माध्यम से कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) देश के युवाओं, छात्रों, किसानों और आम जनता से जुड़े बुनियादी एवं जरूरी मुद्दों पर पूरी तरह निष्क्रिय रहते हैं। हालांकि, जब बात हिंदू-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद और भारत-पाकिस्तान जैसे सांप्रदायिक या ध्रुवीकरण वाले मुद्दों की आती है, तो ये संगठन तुरंत सक्रिय हो जाते हैं। नाटक के जरिए राजनीतिक एजेंडे को लेकर तीखा कटाक्ष किया गया, जो सदन के अंदर की गरमा-गरम बहस की एक मजबूत पृष्ठभूमि साबित हुआ।

सदन पटल पर बिल आते ही भड़का विपक्ष

जैसे ही सदन की कार्यवाही विधिवत शुरू हुई, सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) बिल को औपचारिक चर्चा के लिए सदन के पटल पर रखा। बिल के पेश होते ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस आक्रामक तेवर में आ गई और सरकार के खिलाफ हमलावर रुख अपना लिया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बिल का कड़े शब्दों में विरोध करते हुए मांग उठाई कि इस अत्यंत संवेदनशील और दूरगामी प्रभाव वाले विधेयक को बिना किसी जल्दबाजी के विस्तृत समीक्षा के लिए प्रवर समिति (सेलेक्ट कमेटी) के पास भेजा जाना चाहिए।

file_0000000093d882119d122d54d9d757b5
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40 (4)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.38
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39 (1)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39 (3)
sjjj
WhatsApp-Image-2026-03-12-at-6.48.17-PM-1-298x300 (1)

हालांकि, सरकार ने विपक्ष की इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया। सरकार के रुख से नाराज होकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सदन के भीतर तीखी नोक-झोंक शुरू हो गई, जिससे माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया.

“मांग न माने जाने पर कांग्रेस विधायक अपनी सीटों से उठकर विरोध जताते हुए सदन के वेल (बीचो-बीच) में पहुंच गए और सरकार विरोधी तीव्र नारेबाजी शुरू कर दी। दूसरी ओर, भाजपा विधायक और मंत्री बिल पर तत्काल चर्चा कराकर इसे उसी दिन पारित कराने पर पूरी तरह अड़े रहे।”

दो बार स्थगित करनी पड़ी सदन की कार्यवाही

सदन में लगातार बढ़ते हंगामे, शोर-शराबे और पूरी तरह से अव्यवस्था के माहौल को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सदन की कार्यवाही को पहले 10 मिनट और हालात में सुधार न होने पर दोबारा 15 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा। अध्यक्ष ने सभी दलों के नेताओं से शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन सदन का तापमान लगातार बढ़ता रहा।

संविधान और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर उठे गंभीर सवाल

कुछ देर के स्थगन के बाद जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर हमले और तेज कर दिए। विधायक बाला बच्चन ने सरकार की मंशा पर सीधे सवाल खड़े किए। इसके साथ ही नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक आतिफ अकील और आरिफ मसूद ने इस बिल को पूरी तरह से सत्ता पक्ष का राजनीतिक एजेंडा करार दिया।

कांग्रेस नेताओं ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29 का पुरजोर हवाला देते हुए देश के अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की रक्षा का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने दलील दी कि इस तरह के कानूनों से देश के सामाजिक ताने-बाने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। तमाम विरोध, आपत्तियों और हंगामे के बीच सरकार ने सदन में अपने स्पष्ट बहुमत के बल पर यूसीसी बिल को ध्वनिमत से पारित करा लिया।

अब राज्यपाल की मंजूरी का इंतजार, जल्द लागू होने की संभावना

मध्य प्रदेश विधानसभा से यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक के पारित होने के बाद अब इसे औपचारिक रूप से मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। राजभवन से स्वीकृति मिलते ही इसका राजपत्र (गजट) नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा। सरकार की प्रशासनिक तैयारियों और रणनीतिक संकेतों के अनुसार, इस कानून के जुलाई महीने के भीतर ही राज्य में प्रभावी होने की प्रबल संभावना है।

उल्लेखनीय है कि यूसीसी विधेयक के पारित होने के तुरंत बाद सदन में ‘मध्य प्रदेश राजमार्ग संशोधन विधेयक 2026’ भी पेश किया गया, जिसे चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

प्रमुख बिंदु: एक नजर में

  • विधेयक: समान नागरिक संहिता (UCC) बिल मध्य प्रदेश विधानसभा से पारित।
  • विपक्ष का रुख: सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग, जिसे सरकार ने खारिज किया।
  • हंगामा: वेल में नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही दो बार (10 मिनट और 15 मिनट) स्थगित हुई।
  • प्रमुख आपत्तियां: संविधान के अनुच्छेद 29 और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हवाला।
  • अगला कदम: राज्यपाल की मंजूरी के बाद राजपत्र में प्रकाशन और जुलाई में प्रभावी होने की उम्मीद।
Tags:
MP UCC Bill
Madhya Pradesh News
Uniform Civil Code
Narendra Singh Tomar
Umang Singhar
MP Monsoon Session


ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_14_44 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_53_50 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_08_26 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_16_13 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_22_41 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.12.06
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.16.05