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सिंगरौली कोल ब्लॉक विवाद: RTI से हुआ बड़ा खुलासा, मृत आदिवासियों के अंगूठे लगाकर हुआ फर्जीवाड़ा






फर्जी ग्राम सभाओं के जरिए आदिवासियों के अधिकार छीन रही है भाजपा सरकार: कांग्रेस


सिंगरौली कोल ब्लॉक विवाद: ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस का दिल्ली में बड़ा खुलासा, RTI से उजागर हुआ मृत लोगों के अंगूठे लगाने का ‘फर्जीवाड़ा’

स्थान: नई दिल्ली
स्रोत: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (INC)
मुख्य वक्ता: डॉ. विक्रांत भूरिया (अध्यक्ष, ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस)

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में चल रहे कोल ब्लॉक आवंटन और बड़े पैमाने पर हो रही पेड़ों की कटाई को लेकर सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है। ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने देश की राजधानी दिल्ली में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर आदिवासियों के अधिकारों को कुचलने और बड़े पैमाने पर प्रशासनिक जालसाजी करने का गंभीर आरोप लगाया है।

कांग्रेस ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों और स्थानीय ग्रामीणों के मृत्यु प्रमाण पत्रों को सार्वजनिक करते हुए दावा किया है कि सिंगरौली कोल ब्लॉक के लिए अनिवार्य ग्राम सभाओं के प्रस्तावों को पूरी तरह से फर्जी तरीके से तैयार किया गया। आरोप है कि जो लोग सालों पहले इस दुनिया से जा चुके हैं, उनके अंगूठे के निशान लगाकर प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई।

क्या है मुख्य आरोप?
कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि भाजपा सरकार में कॉरपोरेट्स को फायदा पहुंचाने के लिए आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन को अवैध तरीके से छीना जा रहा है। पेसा (PESA) कानून और वन अधिकार अधिनियम (FRA) की धज्जियां उड़ाकर मृत व्यक्तियों को कागजों पर ‘जिंदा’ किया गया ताकि ग्राम सभा की फर्जी सहमति दिखाई जा सके।

दस्तावेजों के साथ कांग्रेस ने पेश किए ये चौंकाने वाले उदाहरण:

डॉ. विक्रांत भूरिया द्वारा दिल्ली में साझा किए गए RTI दस्तावेजों के मुताबिक, कई ऐसे ग्रामीणों के नाम प्रस्तावों में शामिल हैं जिनकी मृत्यु सहमति की तारीख से सालों पहले हो चुकी थी:

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  • बृजभान सिंह: इनकी मृत्यु साल 2014 में ही हो चुकी थी, लेकिन सरकारी कागजों के अनुसार सिंगरौली कोल ब्लॉक के प्रस्ताव के लिए इनसे अनुमति साल 2021 में ली गई।
  • फुलेश्वरी सिंह: इनका निधन साल 2018 में हुआ था, मगर दस्तावेजी दावों के मुताबिक इन्होंने अपनी सहमति साल 2021 में दर्ज कराई।
  • जग बंधन सिंह गोंड: साल 2015 में दुनिया छोड़ चुके जग बंधन जी का कथित अंगूठा भी साल 2021 के प्रस्ताव पत्र पर लगाया गया।
  • चंद सिंह: इनकी मृत्यु साल 2017 में हुई थी, लेकिन प्रशासन ने 2021 में इनकी भी ‘मंजूरी’ कागजों पर दिखा दी।

जीवित प्रदर्शनकारियों के नाम पर भी हुआ फर्जीवाड़ा

इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाला पहलू सुमारू सिंह और सोनमती सिंह का है। कांग्रेस ने बताया कि ये दोनों आदिवासी कार्यकर्ता सिंगरौली कोल ब्लॉक के खिलाफ जमीनी स्तर पर लड़ाई लड़ रहे हैं। वे इस परियोजना का विरोध करने वाले एक प्रतिनिधिमंडल (डेलिगेशन) का हिस्सा बनकर खुद दिल्ली आए थे और उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर अपनी आपबीती सुनाई थी।

विडंबना यह है कि जो लोग इस परियोजना के खिलाफ दिल्ली तक दौड़ लगा रहे हैं, भाजपा सरकार के प्रशासनिक अमले ने उनका अंगूठा भी ग्राम सभा के ‘सहमति प्रस्ताव’ में शामिल दिखा दिया। कांग्रेस ने इसे सरकारी मशीनरी का सबसे शर्मनाक और खुला फर्जीवाड़ा करार दिया है।

“कॉरपोरेट मित्रों के लिए आदिवासियों पर जुल्म” – विक्रांत भूरिया

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. विक्रांत भूरिया ने कहा कि यह सिर्फ तकनीकी खामी नहीं बल्कि एक गंभीर आपराधिक साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंगरौली में भारी पुलिस बल तैनात करके ग्रामीणों को डराया-धमकाया जा रहा है, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और कांग्रेस नेताओं को क्षेत्र में जाने से रोका जा रहा है, और पीछे से इस तरह की फर्जी ग्राम सभाएं आयोजित कर लाखों पेड़ों को काटने का रास्ता साफ किया जा रहा है।

कांग्रेस ने मांग की है कि सिंगरौली कोल ब्लॉक से जुड़े सभी प्रस्तावों की तुरंत उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होनी चाहिए और आदिवासियों की जमीन हड़पने के इरादे से फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले दोषी अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। पार्टी ने साफ किया है कि जल-जंगल-जमीन की इस लड़ाई में वे आदिवासियों के साथ सड़क से लेकर संसद तक मुस्तैदी से खड़े रहेंगे।

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