मध्यप्रदेश में ‘सेफ क्लिक 2.0’ का शंखनाद: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सायबर अपराधियों को बताया डिजिटल दौर का राक्षस, 55 जिलों में शुरू हुआ महाअभियान
भोपाल। मध्यप्रदेश में डिजिटल अपराधियों और सायबर ठगों के खिलाफ राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी घेराबंदी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को राजधानी भोपाल के प्रतिष्ठित रवीन्द्र भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में राज्य व्यापी सायबर जागरूकता अभियान “सेफ क्लिक 2.0” का भव्य उद्घाटन किया। यह महत्वाकांक्षी अभियान 24 जून से शुरू होकर 8 जुलाई तक अनवरत रूप से संचालित किया जाएगा, जो प्रदेश के सभी 10 संभागों, 55 जिलों और 50 हजार से अधिक गांवों में एक साथ जन-जागरूकता की अलख जगाएगा।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सायबर क्षेत्र से उत्पन्न हो रही चुनौतियों पर बेहद गंभीर और दूरदर्शी विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि सायबर खतरा एक ऐसा अदृश्य दुश्मन है, जो बिना किसी दस्तक या आहट के हमारे घरों तक, हमारे बेडरूम तक और हमारी जेब में रखे मोबाइल के जरिए सीधे प्रवेश कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि सायबर अपराधी एक प्रकार से डिजिटल दौर के राक्षस हैं, जो दबे पाँव लैपटॉप, कम्प्यूटर और मोबाइल के जरिए नागरिकों के साथ सेंधमारी और डकैती की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।
“सायबर खतरों को समझना ही उनसे बचने का सबसे बड़ा रास्ता है। जब दुश्मन अदृश्य हो, तो हमारी जागरूकता ही हमारा सबसे अचूक हथियार बनती है। याद रखिए—सावधानी ही सुरक्षा है और जानकारी ही बचाव है। अगर हम सतर्क हैं, तो कोई भी डिजिटल राक्षस हमारी मेहनत की कमाई पर डाका नहीं डाल सकता।”
– डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश
डिजिटल अरेस्ट और डीप-फेक जैसे ‘अदृश्य दुश्मनों’ से मुकाबले की तैयारी
मुख्यमंत्री ने वर्तमान समय में तेजी से उभर रहे सायबर अपराधों के नए तरीकों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में डिजिटल अरेस्ट, डीप-फेक, फेक प्रोफाइल, हैकिंग, डेटा ब्रीचिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, ओटीपी धोखाधड़ी, ऑनलाइन शॉपिंग ठगी, रैनसमवेयर हमले और फर्जी निवेश लिंक (इनवेस्टमेंट फ्रॉड) जैसे अपराध न केवल बढ़ रहे हैं, बल्कि इनके तरीके भी बेहद जटिल और डरावने होते जा रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को हर समय सतर्क और जागरूक रहने की अत्यंत आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता को सायबर सुरक्षा के तीन सबसे महत्वपूर्ण और मूल मंत्र दिए। उन्होंने कहा कि सायबर सुरक्षा को प्रभावी बनाने के लिए तीन सूत्र आवश्यक हैं:
- जागरूकता (Awareness): तकनीक के खतरों और उनके स्वरूप के बारे में बुनियादी जानकारी होना।
- सावधानी (Caution): किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या लिंक पर बिना सोचे-समझे प्रतिक्रिया न देना।
- सहभागिता (Participation): जो लोग सायबर सुरक्षा की जानकारी रखते हैं, वे केवल स्वयं तक सीमित न रहें, बल्कि अपने परिवार, समाज और आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करें।
‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान की प्रमुख रूपरेखा
यह अभियान केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे एक व्यापक जन आंदोलन का रूप दिया जा रहा है। 15 दिनों तक चलने वाले इस विशेष अभियान के तहत प्रत्येक दिन की एक अलग और विशेष थीम निर्धारित की गई है। इस दौरान लोगों को बैंकिंग सुरक्षा, महिला सुरक्षा, बच्चों से जुड़े सायबर अपराध और विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में रहने वाले सीधे-साधे नागरिकों को जागरूक करने के लिए लक्षित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
अभियान का विस्तार इस बार अभूतपूर्व स्तर पर किया जा रहा है। इसके तहत राज्य की ग्राम पंचायतों, स्कूलों, कॉलेजों, बैंकों, स्थानीय बाजारों, धार्मिक स्थलों, मेला परिसरों और सरकारी कार्यालयों में विशेष शिविर और लोकरंजन के रुचिकर कार्यक्रम (जैसे नुक्कड़ नाटक, लघु फिल्में और संवाद सत्र) आयोजित किए जाएंगे ताकि जटिल तकनीकी बातों को भी आम जनमानस आसानी से समझ सके।
| अभियान का नाम | अवधि | भौगोलिक दायरा | मुख्य फोकस क्षेत्र | महत्वपूर्ण हेल्पलाइन |
|---|---|---|---|---|
| सेफ क्लिक 2.0 | 24 जून से 8 जुलाई (15 दिवसीय) | 10 संभाग, 55 जिले, 50,000+ गांव | बैंकिंग धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक, महिला व बाल सुरक्षा | 1930 (सायबर क्राइम हेल्पलाइन) |
पोस्टर, बुकलेट और सायबर रथ का विमोचन
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अभियान को गति देने के लिए तैयार की गई विभिन्न प्रचार सामग्रियों का विमोचन किया। इसमें सायबर जागरूकता से जुड़े आकर्षक और जानकारीपरक पोस्टर्स, विशेष रूप से स्कूली बच्चों के लिए तैयार की गई ज्ञानवर्धक सायबर जागरूकता बुकलेट्स और अभियान के ऑफिशियल वीडियो का विमोचन शामिल रहा। इसके पश्चात मुख्यमंत्री ने रवीन्द्र भवन परिसर से ‘सायबर जागरूकता रथों’ को हरी झंडी दिखाकर प्रदेश के विभिन्न अंचलों के लिए रवाना किया। ये रथ गांव-गांव घूमकर ऑडियो-विजुअल माध्यमों से लोगों को सचेत करेंगे। कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्यमंत्री का स्वागत पारंपरिक रूप से तुलसी का पौधा भेंट कर किया गया तथा समापन पर उन्हें स्मृति के रूप में प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया।
संकटमोचक हनुमान की भूमिका में मध्यप्रदेश पुलिस
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस वृहद अभियान के कुशल नियोजन और संचालन के लिए मध्यप्रदेश पुलिस की खुलकर सराहना की। उन्होंने बेहद भावुक और गौरवपूर्ण शब्दों में कहा कि संकट के समय मध्यप्रदेश पुलिस हमेशा जनता के लिए ‘संकटमोचक हनुमान’ की भूमिका में खड़ी दिखाई देती है। चाहे कानून व्यवस्था का मामला हो, प्राकृतिक आपदा हो या फिर सायबर स्पेस में नागरिकों की सुरक्षा का विषय, पुलिस ने हमेशा अपनी उपयोगिता और संवेदनशीलता सिद्ध की है।
मुख्यमंत्री ने गर्व व्यक्त करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस ने देश में पहली बार ‘सायबर डकैती का लाइव पर्दाफाश’ करने में सफलता हासिल की थी, जो देश के गृह मंत्रालय और अन्य राज्यों के लिए भी एक नजीर बना। इसके लिए पूरी पुलिस टीम बधाई की पात्रा है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2025 में विभिन्न सायबर जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से प्रदेश के 33 लाख से अधिक नागरिकों को सतर्क और जागरूक किया गया था, और इस वर्ष ‘सेफ क्लिक 2.0’ के माध्यम से इस संख्या को कई गुना बढ़ाने का लक्ष्य है।
डिजिटल पर्सनल डेटा एक्ट और सुदृढ़ तकनीकी फ्रेमवर्क
मध्यप्रदेश सरकार नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य सरकार के 56 विभागों की लगभग 1700 से अधिक महत्वपूर्ण सेवाएं अब एक एकीकृत सिंगल पोर्टल पर ऑनलाइन उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन सभी नागरिक केंद्रित सेवाओं और डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि नागरिकों के डेटा संरक्षण के लिए भारत सरकार द्वारा ‘डिजिटल पर्सनल डेटा एक्ट’ को कड़ाई से लागू किया गया है। वहीं, राज्य स्तर पर किसी भी तकनीकी आपातकाल या बड़े सायबर हमले से निपटने के लिए ‘कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम’ (CERT) का गठन किया जा चुका है, जो चौबीसों घंटे राज्य के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की निगरानी कर रही है।
‘रुको, सोचो और फिर एक्शन लो’ – आर्थिक नुकसान से बचने का अचूक मंत्र
आम नागरिकों को व्यावहारिक सलाह देते हुए मुख्यमंत्री ने एक अत्यंत सरल और प्रभावी मंत्र दिया—“रुको, सोचो और फिर एक्शन लो”। उन्होंने सचेत किया कि अक्सर सायबर अपराधी लोगों के मन में अत्यधिक लालच पैदा करते हैं (जैसे लॉटरी, कम समय में पैसा दोगुना करना, पार्ट-टाइम जॉब का झांसा) या फिर अत्यधिक डर पैदा करते हैं (जैसे बिजली कनेक्शन काटने, सिम ब्लॉक होने या पुलिस/सीबीआई द्वारा डिजिटल अरेस्ट करने की धमकी)।
उन्होंने कहा कि जब भी कोई अनजान लिंक मोबाइल पर मिले, या कोई डराने-धमकाने वाली कॉल आए, तो जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं। आपकी थोड़ी सी जल्दबाजी और लालच बड़े आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि यह अभियान ऐसे समय में शुरू किया जा रहा है जब हमारी युवा पीढ़ी उच्च शिक्षा के लिए महाविद्यालयों (कॉलेजों) में नए दाखिले ले रही है। ऐसे युवाओं को लक्षित करना बेहद जरूरी है क्योंकि वे तकनीक का सबसे अधिक उपयोग करते हैं और आसानी से इनका शिकार बन सकते हैं।
डीजीपी कैलाश मकवाना ने कहा: ’80 फीसदी शिकायतें वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ीं’
समारोह को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाना ने सायबर अपराधों के सामाजिक और आर्थिक पहलुओं पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज के दौर में सायबर अपराध केवल एक आर्थिक या वित्तीय चुनौती नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारे सामाजिक विश्वास, आपसी ताने-बाने और राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील और गंभीर विषय बन चुका है।
डीजीपी कैलाश मकवाना ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच बढ़ने के साथ सायबर अपराधों में उल्लेखनीय और चिंताजनक वृद्धि दर्ज की गई है। पुलिस के पास आने वाली कुल सायबर शिकायतों में से लगभग 80 प्रतिशत शिकायतें सीधे तौर पर वित्तीय धोखाधड़ी (फाइनेंशियल फ्रॉड) से संबंधित होती हैं। इसके अलावा समाज में डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक के जरिए चरित्र हनन, सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर ब्लैकमेलिंग, अवैध रूप से हासिल किए गए फर्जी सिम कार्ड का उपयोग, मनी लॉन्ड्रिंग के लिए ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ का संचालन और महिलाओं व बच्चों के विरुद्ध होने वाले सायबर अपराधों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ है।
मध्यप्रदेश पुलिस की त्रिसूत्रीय रणनीति: रोकथाम, अनुसंधान और जागरूकता
महानिदेशक ने मध्यप्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली को रेखांकित करते हुए कहा कि सायबर अपराधियों पर प्रभावी काबू पाने के लिए पुलिस एक स्पष्ट दृष्टिकोण और त्रिसूत्रीय रणनीति पर काम कर रही है, जिसके तीन स्तंभ हैं—रोकथाम (Prevention), अनुसंधान (Investigation) और जागरूकता (Awareness)।
इसी दिशा में पुलिस ने कई क्रांतिकारी कदम उठाए हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है:
- ई-जीरो एफआईआर (e-Zero FIR) की शुरुआत: प्रदेश में 25 दिसंबर 2025 से ‘ई-जीरो एफआईआर’ की ऐतिहासिक शुरुआत की गई है। इसके अंतर्गत वर्तमान में 1 लाख रुपए तक की सायबर धोखाधड़ी होने पर पीड़ित व्यक्ति घर बैठे ही ऑनलाइन माध्यम से अपनी एफआईआर दर्ज करा सकता है, जिससे बिना किसी देरी के त्वरित कानूनी कार्रवाई शुरू हो जाती है और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल रहा है।
- हेल्पलाइन नंबर 1930 की ताकत: सायबर वित्तीय धोखाधड़ी के शिकार पीड़ितों के लिए राष्ट्रीय सायबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल का हेल्पलाइन नंबर 1930 एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है। घटना के तुरंत बाद (गोल्डन ऑवर में) इस नंबर पर कॉल करने से ठगी गई राशि को अपराधियों के खातों में ब्लॉक करने में भारी सफलता मिलती है।
- 135 करोड़ रुपए की राशि कराई होल्ड: डीजीपी ने आंकड़ों के जरिए पुलिस की सफलता साझा करते हुए बताया कि केवल वर्ष 2025 में ही त्वरित कार्रवाई करते हुए मध्यप्रदेश पुलिस ने सायबर ठगों के खातों में कुल 135 करोड़ रुपए की विशाल राशि को सफलतापूर्वक होल्ड (फ्रीज) कराया और वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर पीड़ितों को उनकी गाढ़ी कमाई वापस दिलवाई।
- म्यूल अकाउंट्स और सायबर स्लेवरी पर प्रहार: पुलिस अब केवल सतही जांच नहीं कर रही, बल्कि सायबर अपराध के पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करने में जुटी है। इसके तहत किराए के बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) को चिन्हांकित किया जा रहा है और विदेशों या अन्य राज्यों में बैठकर संचालित हो रहे सायबर स्लेवरी (डिजिटल गुलामी) के नेटवर्क और उनके सरगनाओं की पहचान कर ठोस दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।
मध्यप्रदेश पुलिस के विशेष अभियान और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान
सायबर स्पेस को सुरक्षित बनाने और अपराधियों की कमर तोड़ने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा समय-समय पर कई विशिष्ट और केंद्रित अभियान संचालित किए गए हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है। इन अभियानों में प्रमुख हैं:
- ऑपरेशन फास्ट (Operation Fast): वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित गति से अपराधियों की धरपकड़ और रिफंड प्रक्रिया को तेज करना।
- ऑपरेशन फेस्ट (Operation Fest): त्योहारों और ऑनलाइन सेल के दौरान होने वाले फर्जी शॉपिंग ऑफर्स और लॉटरी फ्रॉड के खिलाफ कार्रवाई।
- ऑपरेशन मैट्रिक्स (Operation Matrix): डार्क वेव, डेटा लीक और संगठित सायबर अपराधियों के तकनीकी नेटवर्क को भेदना।
- ऑपरेशन नयन (Operation Nyan): सोशल मीडिया पर महिलाओं और बच्चों को टारगेट करने वाले अपराधियों और अश्लील सामग्री फैलाने वालों पर डिजिटल नजर रखना।
इन उत्कृष्ट तकनीकी प्रयासों, नवाचारों और त्वरित अनुसंधान क्षमताओं के कारण ही मध्यप्रदेश पुलिस को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर के ‘डीएससीआई अवॉर्ड’ (DSCI Award – Data Security Council of India) से सम्मानित किया जा चुका है, जो पूरे राज्य के लिए गौरव का विषय है।
‘जागरूकता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच’
समारोह के समापन सत्र में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सायबर सुरक्षा) ए. साईं मनोहर ने मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री मोहन यादव, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और उपस्थित जनसमुदाय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास दिलाया कि आने वाले दो सप्ताह के भीतर मध्यप्रदेश पुलिस का एक-एक अधिकारी और कर्मचारी इस अभियान को जन-जन तक, हर चौपाल और हर घर तक पहुंचाने के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम करेगा।
इस गरिमामय और अत्यंत महत्वपूर्ण उद्घाटन समारोह में पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, प्रशासनिक अमला, विभिन्न तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञ, बड़ी संख्या में स्कूली और कॉलेज के विद्यार्थी, शिक्षकगण और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अनेक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स भी उपस्थित थे। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से विशेष रूप से आग्रह किया गया कि वे अपने विभिन्न प्लेटफॉर्म्स (यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक) के माध्यम से ‘सेफ क्लिक 2.0’ के संदेशों और रील-वीडियो को जनहित में अधिक से अधिक प्रसारित करें ताकि मध्यप्रदेश का कोई भी नागरिक इन डिजिटल राक्षसों का शिकार न बन सके।














