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विवेका हत्याकांड: सीबीआई सांसद वाई.एस. अविनाश रेड्डी को कर सकती है गिरफ्तार

विवेका हत्याकांड: सीबीआई सांसद वाई.एस. अविनाश रेड्डी को कर सकती है गिरफ्तार

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री वाई.एस. विवेकानंद रेड्डी की हत्या के मामले में एक आरोपी जी. उदय कुमार रेड्डी की जमानत याचिका का विरोध किया है।
जांच एजेंसी ने अपने जवाबी हलफनामे में सीबीआई अदालत से कहा कि अगर उदय कुमार को जमानत पर रिहा किया जा है, तो वह मामले के गवाहों को प्रभावित कर सकता है।

एजेंसी ने अदालत को बताया कि उसने उदय कुमार रेड्डी को इस मामले में उनकी संलिप्तता के बारे में सबूत इकट्ठा करने के बाद गिरफ्तार किया था।

सीबीआई ने यह भी तर्क दिया कि जांच एक महत्वपूर्ण चरण में है और उदय कुमार रेड्डी को जमानत दी जाती है तो यह जांच को बाधित कर सकती है। अदालत ने मामले पर आदेश के लिए 15 मई की तारीख मुकर्रर की है।

केंद्रीय एजेंसी ने सीबीआई कोर्ट को मर्डर केस डायरी भी सौंपी। कोर्ट ने बुधवार को एजेंसी को डायरी जमा करने का आदेश दिया था।

सीबीआई ने एक बार फिर अदालत को बताया कि कडप्पा के सांसद वाई.एस. अविनाश रेड्डी साजिश और सबूत मिटाने में शामिल थे।

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अविनाश रेड्डी के सहयोगी उदय कुमार रेड्डी को सीबीआई ने 14 अप्रैल को गिरफ्तार किया था। दो दिन बाद सीबीआई ने अविनाश रेड्डी के पिता वाईएस भास्कर रेड्डी को भी गिरफ्तार कर लिया था। सीबीआई इस मामले में अविनाश रेड्डी से कई बार पूछताछ भी कर चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा एजेंसी की एक नई विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित करने और 30 अप्रैल तक जांच पूरी करने का निर्देश देने के बाद सीबीआई ने जांच की गति तेज कर दी थी। हाल ही में समय सीमा 30 जून तक बढ़ा दी गई।

पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी के भाई और आंध्र प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के चाचा विवेकानंद रेड्डी की चुनाव से कुछ दिन पहले 15 मार्च 2019 की रात को कडप्पा जिले के पुलिवेंदुला स्थित उनके आवास पर हत्या कर दी गई थी।

राज्य के 68 वर्षीय पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद अपने घर पर अकेले थे, तभी अज्ञात लोगों ने उनके घर में घुसकर उनकी हत्या कर दी थी।

सीबीआई ने विवेकानंद रेड्डी की बेटी सुनीता रेड्डी की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर 2020 में मामले की जांच अपने हाथ में ली।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल नवंबर में इस मामले को हैदराबाद स्थानांतरित कर दिया था और कहा था कि आंध्र प्रदेश में निष्पक्ष सुनवाई और जांच के बारे में सुनीता रेड्डी द्वारा उठाए गए संदेह उचित थे।

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