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सरगुजा के केरजू सहकारी समिति के मैनेजर द्वारा दिसंबर 2025 में फांसी लगा आत्महत्या कर लिए जाने के मामले में पुलिस ने पेटला सहकारी बैंक के तत्कालीन मैनेजर सहित अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की

सरगुजा के केरजू सहकारी समिति के मैनेजर द्वारा दिसंबर 2025 में फांसी लगा आत्महत्या कर लिए जाने के मामले में पुलिस ने पेटला सहकारी बैंक के तत्कालीन मैनेजर सहित अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि बैंक मैनेजर ने मृत सोसायटी मैनेजर को सामने रखकर बैंक से फर्जी तरीके से केसीसी लोन निकलवाया और 52 लाख रुपये ले लिया था। सोसायटी मैनेजर ने पैसे वापस मांगे तो उसे नौकरी से निकाल देने की धमकी दी। मामला सीतापुर थाना क्षेत्र का है।

जानकारी के मुताबिक, सहकारी समिति केरजू के मैनेजर दिनेश गुप्ता (50 वर्ष) ने 25 दिसंबर 2025 को अपने घर में देर रात फांसी लगा ली थी। घटना के पूर्व वे सोसायटी से वापस पहुंचे थे। सोसायटी में किसानों ने उनके खाते से फर्जी तरीके से केसीसी लोन निकालने को लेकर विवाद किया था।

बैंक मैनेजर ने 52 लाख लिया, मांगने पर दी धमकी मैनेजर दिनेश गुप्ता के आत्महत्या केस की जांच कर रही सीतापुर पुलिस ने मामले में मृतक की पत्नी सुनीता गुप्ता का बयान दर्ज किया। सुनीता गुप्ता ने बताया कि दिनेश गुप्ता के माध्यम से जिला सहकारी बैंक पेटला के तत्कालीन मैनेजर भूपेंद्र सिंह परिहार ने हेराफेरी करते हुए केसीसी लोन निकलवाकर 52 लाख रुपये ले लिया था। वे पैसे नहीं लौटा रहे थे, जिससे दिनेश गुप्ता परेशान थे।

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सुनीता गुप्ता ने बताया कि भूपेन्द्र सिंह परिहार से पैसा मांगने पर उन्होंने दिनेश गुप्ता को धमकाया और डांटते हुए नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती थी। इसके कारण दिनेश गुप्ता परेशान थे।

सुनीता सिंह ने बताया कि तत्कालीन बैंक मैनेजर ने दिनेश गुप्ता को गुमराह कर पैसे को गबन कर लिया था और पूरी जिम्मेदारी दिनेश गुप्ता के उपर डाल दी गई, जिससे प्रताड़ित होकर मृतक दिनेश गुप्ता ने आत्महत्या कर ली।

पुलिस ने दर्ज की FIR मामले में जांच के बाद सीतापुर पुलिस ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक सहकारी बैंक पेटला भूपेन्द्र सिंह परिहार (48 वर्ष) एवं अन्य के खिलाफ धारा 108, 3(5) भादवि के तहत अपराध दर्ज किया है। पुलिस ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

2 करोड़ से अधिक के गबन का हुआ था खुलासा किसानों ने फर्जी तरीके से केसीसी लोन निकालने की शिकायत सरगुजा कलेक्टर से की थीए जिसकी जांच में करीब दो करोड़ से अधिक राशि फर्जी तरीके से निकाले जाने की पुष्टि हुई। मामले की जांच सहकारी बैंक की जांच टीम द्वारा भी की गई थी। आरोप लगने के बाद तत्कालीन बैंक मैनेजर को हटा दिया गया था। इस मामले में अब तक किसान लाखों रुपये के कर्जदार हैं और परेशान हैं।

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