सुराजी गांव योजना से महिलाएं घर कि जिम्मेदारी उठाने के साथ दूसरों के लिए बन रही प्रेरणास्रोत

रायगढ़ : सुराजी गांव योजना से महिलाएं घर कि जिम्मेदारी उठाने के साथ दूसरों के लिए बन रही प्रेरणास्रोत

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मूंगफल्ली बेच कमाए 6 लाख, वर्मी से लगभग 3 लाख, आलू व प्याज से कमाए 20 हजार रुपये से अधिक

गौठान में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से महिलाएं बढ़ रही आर्थिक सशक्तिकरण की ओर

लू व प्याज से कमाए 20 हजार रुपये से अधिक

सुराजी ग्राम योजना के माध्यम से आज ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के साथ रोजगार के अवसर खुल रहे है। जिससे ग्रामीण महिलाएं भी घर संभालने के साथ ही अपनी मेहनत के दम पर स्वयं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही है, साथ ही अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है।
महिला सशक्तिकरण का उदाहरण देखने को मिला जिले के विकासखंड पुसौर में ग्राम लिजीर गोठान में, इस गोठान के सफल संचालन हेतु तारिणी महिला स्व-सहायता समूह एवं तुलसी स्व-सहायता समूह द्वारा वर्मी उत्पादन एवं केंचुआ पालन एवं कार्य किया जा रहा है। दोनों समूह द्वारा गोठान प्रारंभ से अब तक कुल वर्मी उत्पादन 945.50 क्विंटल किया गया हैं एवं विक्रय किया गया है। जिसका लाभांश राशि लगभग साढ़े 3 लाख रुपये से अधिक प्राप्त हुआ हैं। वही समूह द्वारा एक एकड़ में मूंगफली उत्पादन से लगभग साढ़े 6 लाख रूपये का लाभांश प्राप्त हुआ है। साथ ही बाड़ी कार्यक्रम के तहत आलू व प्याज उत्पादन से 20 हजार रुपये का लाभ मिला है।

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तुलसी स्व-सहायता समूह की श्रीमती कुमारी बरेठ ने बताया कि लिंजिर गोठान में दो समूह कार्यरत है, जिनके द्वारा वर्मी उत्पादन, आलू, प्याज, मूंगफल्ली उत्पादन किया जा रहा है, जिससे समूह की महिलाएं अच्छी आय अर्जित कर रही है। तारिणी स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती सेवती बारीक बताती है कि समूह के महिलाओं की मेहनत का परिणाम है की गोठान में विभिन्न गतिविधियों से समूह के सदस्यों को लाभ हो रहा है। इसी प्रकार श्रीमती उत्तरा बरेठ ने बताया कि वे अर्जित आय से सिलाई मशीन एवं बक्सा खरीद चुकी है, उनके साथ श्रीमती सुलोचना ने भी सिलाई मशीन खरीदी है। श्रीमती ललिता ने टीवी तथा श्रीमती संतोषी ने कूलर क्रय किया है। उन्होंने बताया कि गोठान के गतिविधियों के माध्यम से अतिरिक्त आय प्राप्त होने से जरूरत एवं अन्य सुविधाएं जुटाने में सहायता मिल रही है। इसके साथ ही महिला स्व-सहायता समूह के अन्य सदस्योंं द्वारा प्राप्त आय का उपयोग घर खर्च, स्कूल फीस, स्वास्थ्य उपचार, आभूषण खरीदने एवं मकान मरम्मत जैसे कार्यों में किया जा रहा है।