
हरी सब्जियों का भाव आसमान पर लोगों की थाली से दूर हुई
दुकानदारों ने अदरक -लहसुन जैसी सूखी सब्जियों का दर बढ़ाया
गोपाल सिंह विद्रोही/बिश्रामपुर -आम आदमी हो या खास आदमी या मध्यमवर्गीय परिवार की थाली से हरी सब्जियां हुई नदारद ।सब्जियों का भाव ने सभी का बजट बिगाड़ दी है। लोग सूखी सब्जियां से काम चलाने पर मजबूर है।
जानकारी के अनुसार अचानक आई बारिश से खेतों कि सब्जियां नष्ट हो गई है या पैदावार कम हो गया है। बाहर से सब्जियां आना भी बंद हो गया है जिससे सब्जियों का भाव आसमान छू रहा है। सब्जियों की कीमतों में 4-5 प्रतिशत की बढ़ोतरी से लोगों की पहुंच से दूर हो गई है, जो लोग बाजार से झोला भर कर सब्जिया लाते थे वे सब्जियों के भाव सुनकर बाजार से दूरी बना ली है या कम मात्रा में सब्जी ले कर घर पहुंच रहे हैं। अचानक हुए सब्जियों की कीमतों में तूफान आने से गृहणीया सोया बड़ी ,सफेद कुंभड़ा बड़ी, राजमा जैसे अन्य सुखी सब्जियों से काम चलाने की बात कह रही है। सब्जियों की दरों पर एक नजर डालें तो अदरक 320 रू,भिंडी 60रू, बैगन 50 रू, फूलगोभी 60, झिगी 40रू, बरबटी 60 रू,टमाटर 100रू, करेला 60रू, लहसुन 120 रू,आलू – प्याज 20 खीरा रू30 ,लौकी 30 रू,धनिया 100रू, पत्ता गोभी 30 रू गाजर 60रू, कुंभड़ा 30 ,परवल 60 ,साकिन 50 रू ,कोचई₹60 रू बिक रही है ।इस तरह हरी सब्जियों का दर अचानक सतह से आसमान पर पहुंचने से जहां गृहणीयों की बजट खराब हो गया है तो वही आम एवं खास तथा मध्यम वर्ग कि पहुंच से बाहर हो गई है।
*हरी सब्जियां तो बरसात से नष्ट हो गई परंतु लहसुन , साकिन, कोचई और अदरक के भाव आसमान पर कैसे?*
सब्जियों की बड़े कीमतों पर घरेलू महिलाओं का सवाल है कि बरसात के कारण खेतों में सब्जियां नष्ट होने की बात तो समझ में आती है परंतु अदरक 320रू , साकीन 50 रू ,कोचई 60 रू एवं लासुन 120रू कैसे बाजार में बिक रहा है ? इसका पैदावार तो बरसात से पूर्व का है। खाद्य विभाग को इसकी जांच
करनी चाहिए। लहसुन अदरक की कालाबाजारी से महिलाओं ने इनकार नहीं किया है।










