प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने अपने दादा राजा विजय भूषण सिंह देव द्वारा स्थापित शिव मंदिर में किया रुद्राभिषेक और पांव पखार कर की दो परिवार की घारवापासी।

प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने अपने दादा राजा विजय भूषण सिंह देव द्वारा स्थापित शिव मंदिर में किया रुद्राभिषेक और पांव पखार कर की दो परिवार की घारवापासी ।

प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने घोरड़ेगा पासंगनाला विजयगढ़ सिलफिली,भटगांव स्थित अपने दादा राजा विजय भूषण सिंह देव द्वारा स्थापित शिव मंदिर में किया रुद्राभिषेक और पांव पखार कर की दो परिवार की घारवापासी।

सरगुजा के भटगांव विधानसभा का राजनीतिक परिदृश्य आजकल गरमाया हुआ है बाहरी भीतरी की लड़ाई चरमोत्कर्ष पर है। ऐसे राजनीतिक उठापटक में प्रबल प्रताप सिंह जूदेव द्वारा उनके दादाजी राजा विजय भूषण सिंह देव द्वारा स्थापित घोरड़ेगा पासंगनाला सिलफिली शिव मंदिर में रुद्राभिषेक कर यह संदेश देने का काम किया है कि भटगांव विधानसभा के लिए वो कोई बाहरी व्यक्ति नहीं हैं ज्ञात हो कि उनके दादाजी ने सिलफिली के आस पास कई गांव बसाये। उनके सम्मान में उस जगह को विजयगढ़ सिलफिली का नाम दिया गया जो आज भी जारी है। यहां के पूर्व विधायक स्व वंशरूप सिंह को 1962 में राम राज्य परिषद का उम्मीदवार बनाकर जितवाने का श्रेय भी राजा साहब को ही जाता है। स्व वंशरूप सिंह के पुत्र विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने उस जमाने में उनके पिताजी को एक जीप भेंट की थी उनके पास अनेक छाया चित्र भी उपलब्ध हैं इसके बाद प्रबल प्रताप सिंह जूदेव के पिता स्व दिलीप सिंह जूदेव ने अपने पूर्वजों की परंपरा का निर्वहन करते हुए इस क्षेत्र से अपना सीधा संपर्क बनाये रखा । आज भी पूरे सरगुजा में दिलीप सिंह जूदेव के व्यक्तित्व की चर्चा करते क्षेत्र वासी नहीं थकते।

प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने पूछे जाने पर चुटकी लेते हुए कहा जिन्हें इतिहास का पता नहीं उन्हें आप लोगों ने बेवजह मास्टर घोषित कर रखा है छत्तीसगढ़ में निवास करने वाला प्रत्येक नागरिक क्षेत्र को अपनी सेवा देने के लिए स्वतंत्र है और उसका स्वागत है।आज वाराणसी के लोगों ने हमारे यशश्वी प्रधानमंत्री जी को चुनकर इसका सर्वोत्तम उदाहरण प्रस्तूत किया है।
इस रुद्राभिषेक में लगभग 25 गांव से पधारे युगल जोड़ियों के साथ क्षेत्र की ख्यातिलब्ध नेत्री नूतन विश्वास भी आयोजक मंडल में न केवल शामिल रहीं उन्होंने पूजा में सक्रियता से भाग लिया।रुद्राभिषेक को क्षेत्र के ग्यारह सिद्ध ब्राह्मणों द्वारा संपादित किया गया एवं रुद्राक्ष और प्रसाद वितरण किया गया।इस कार्यक्रम में राज परिवार द्वारा भंडारा का भी आयोजन था।

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