Advertisement

अंबिकापुर : महर्षि वाल्मीकि जयंती व शरद पूर्णिमा पर तुलसी साहित्य समिति की सरस काव्यगोष्ठी…………..

महर्षि वाल्मीकि जयंती व शरद पूर्णिमा पर तुलसी साहित्य समिति की सरस काव्यगोष्ठी……….

पी०यस० यादव/ब्यूरो चीफ/सरगुजा//आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जयंती व शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर तुलसी साहित्य समिति की ओर से शायर-ए-शहर यादव विकास की अध्यक्षता में केशरवानी भवन में सरस काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व विकासखंड शिक्षा अधिकारी व वरिष्ठ कवि एसपी जायसवाल, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार बीडी लाल, कवयित्री आशा पाण्डेय, पूनम दुबे और गीता मर्मज्ञ पं. रामनारायण शर्मा थे।

 

मां वीणापाणि व ब्रह्मर्षि वाल्मीकि के छायाचित्रों को पुष्पार्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। पं. रामनारायण शर्मा ने कहा कि आदिकवि वाल्मीकि प्रारंभ में एक डकैत थे परन्तु सप्तर्षियों के सत्संग से वे भगवान राम के परम भक्त बने और संस्कृत भाषा में ‘रामायण’ नामक महान ग्रंथ की रचना कर विश्वविख्यात हुए। उन्होंने समाज में आदर्श चरित्र की स्थापना, परिवार, समाज और राष्ट्रधर्म के साथ उत्तम राज्य व्यवस्था और शांति-संस्थापना का संदेश अपने सुप्रसिद्ध ग्रंथ ‘रामायण’ के माध्यम से लोगों को दिया। उन्होंने भगवान राम को साक्षात् धर्म, न्याय, नीति, सेवा, सत्य, निष्ठा, प्रेम, करुणा व मानवता की महानतम् मूर्ति बताते हुए जननी और जन्मभूमि की सेवा को स्वर्ग से भी बढ़कर रेखांकित किया।

 

काव्यगोष्ठी में कवयित्री माधुरी जायसवाल ने अपनी कविता में डाकू से महर्षि वाल्मीकि बनने की कथा को मानवीय दृढ़ इच्छाशक्ति का सुपरिणाम बताया- जब कोई नई सोच के साथ नया करने को तन जाता है। सोच बदलते ही अंतर्मन में युद्ध ठन जाता है। रत्नाकर डाकू भी तब महर्षि वाल्मीकि बन जाता है! युवा कवि निर्मल कुमार गुप्ता ने अपने काव्य में कर्म को मनुष्य की सच्ची पहचान व सम्मान दिलानेवाला बताया-कर्म ही हमें मान-सम्मान देता है। कौन-सा कर्म अच्छा व कौन-सा बुरा- वाल्मीकि जी का जीवन देता है यही सीख! गीतकार पूनम दुबे ने अपने दोहे में रामनाम के जाप से संसार के सुखद होने व मुक्ति की बात कही- रामनाम जपते रहो, सुखद लगे संसार। निर्मल मन-काया बने, भव से हो उद्धार। संस्था के अध्यक्ष कवि मुकुंदलाल साहू ने योगर्षि वाल्मीकि से यहां तक प्रार्थना कर डाली कि- साधो ! अपने ज्ञान से, कर दो हमें निहाल। राम रमे मन में सदा, मिट जाए भवजाल।

Gemini_Generated_Image_fohysbfohysbfohy
WhatsApp-Image-2026-03-12-at-6.48.17-PM-1-298x300 (1)
sjjj

 

शरद पूर्णिमा का स्वागत कवयित्री आशा पाण्डेय ने अपने दोहों में बड़े दिलकश अंदाज़ में किया- शरद पूर्णिमा आज है, दिन है बड़ा विशेष। दिखता प्यारा चांद है, सुंदर है परिवेश। छाई नभ में चांदनी, चारों ओर उजास। है प्रियतम को देखकर, जगी प्रेम की आस। कविवर श्यामबिहारी पाण्डेय ने अपनी रचना में शरद पूर्णिमा की चांदनी को सर्वप्रिय बताते हुए उसकी अप्रतिम शोभा का बखान किया- आ गया है चांद लेकर, मखमली-सी चांदनी। हर हृदय पर राज करती चंद्रमा की चांदनी। लग रहा अमृत बरसता आज है आकाश से। ले कलश खुद ही उतरती, चंद्रमा की चांदनी। चांद क्यों तू दूर है आ बैठ जा आगोश में, दिल से मैं महसूस करना चाहता हूं चांदनी! कविवर एसपी जायसवाल ने पैसे पर सबकुछ बिकने की बात कही तो पूरी महफ़िल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी- पैसे की इस दुनिया में सबकुछ यहां पर बिकता है! कुछ खुलेआम बिकते, कुछ छुप-छुपाकर बिकते हैं। मान यहां सम्मान भी बिकते, लोगों के अस्मत और ईमान भी बिकते! कवि चंद्रभूषण मिश्र ‘मृगांक’ की कविता में उनका दर्द छलक पड़ा- ढूंढ़ता ही रहा चले जाने के बाद, टूटता ही रहा ठोकर खाने के बाद। राह वीरानियों की संगदिल होने लगी, मैं मचलता ही रहा दूर जाने के बाद! वरिष्ठ कवि बीडी लाल जी अपनी तरुणाई के पुराने दिनों की यादों में खो गये। वे असमंजस में पड़ गए कि अपनी ग़ज़ल वे किसे सुनाएं, जिसमें प्रियतमा के रूठने की बात हो- किसको ग़ज़ल सुनाऊं तेरे रूठने के बाद? कैसे सुकून पाऊं तेरे रूठने के बाद? मंज़िल कहां? डगर भी अनजान हो गई, बोलो कहां मैं जाऊं तेरे रूठने के बाद? बेरूखी का बादल गर्जन के साथ घेरे, बस, अश्क़ ही बहाऊं, तेरे रूठने के बाद!

 

शायरी की दुनिया की बेजोड़ हस्ती शायर-ए-शहर यादव विकास जी का सचमुच कोई जवाब नहीं! उन्होंने अपनी बेशकीमती ग़ज़ल द्वारा मोहब्बत का खू़बसूरत पैगा़म दिया- खु़शबू से मोहब्बत की, गुलशन को महकने दो। सातों सुर गाएंगे, चिड़ियों को चहकने दो। हीरे उग आएंगे इन धान के बालों पर, शबनम के मुहल्ले में सूरज को निकलने दो! मैं दूर चमन से ’विकास‘, दूर चमन तो नहीं, आएगी इधर खु़शबू, कलियों को चटकने दो! कविवर संतोष ‘सरल’ ने भी सुंदर जसगीत सुनाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया- लइरका मैं तोर, तोला खोजत हवों वो। आबे ना दाई तोला जोहत हवों वो! कार्यक्रम का काव्यमय संचालन संस्था की उपाध्यक्ष कवयित्री आशा पाण्डेय व आभार कवि मुकुंदलाल साहू ने जताया। इस दौरान लीला यादव, अजय श्रीवास्तव और केशरवानी वैश्य सभा के उपाध्यक्ष मनीलाल गुप्ता सहित कई काव्यप्रेमी उपस्थित रहे।

file_0000000093d882119d122d54d9d757b5
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.12.06
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.38
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39 (1)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40 (1)
WhatsApp-Image-2026-08-15-at-00.21.47