छठ महापर्व का हुआ समापन उगते हुए सूर्य को व्रतियों ने दिया अर्घ्य

छठ महापर्व का हुआ समापन उगते हुए सूर्य को व्रतियों ने दिया अर्घ्य

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सरगुजा:दिवाली के पांच दिवसीय त्योहार के बाद छठ का उत्सव शुरू होता है जिसके दौरान महिलाएं अपने बच्चों के लिए उपवास रखती हैं। इस साल यह त्योहार 17 नवंबर से 20 नवंबर तक मनाया जा रहा है।नहाय खाय से शुरू हुए आस्था के महापर्व छठ पूजा का आज चौथे दिन उगते हुए सूर्य देवता को अर्घ्य देने के साथ ही समापन हो गया चौथा दिन यानी सप्तमी तिथि छठ महापर्व का अंतिम दिन होता है इस दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और इसी के साथ छठ महापर्व का समापन हो जाता हैण् छठ महापर्व की शुरुआत नहाय.खाय से होती है इसके बाद दूसरे दिन खरनाए तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन को ऊषा अर्घ्य के नाम से जाना जाता है!

चार दिन का पर्व छठ पूजा का समापन उषा अर्घ्य के साथ होता है इस दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद छठ के व्रत का पारण किया जाता है इस दिन व्रत रखने वाले लोग सूर्योदय से पहले नदी के घाट पर पहुंचकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं इसके बाद सूर्य देव और छठ माता से संतान के सुखी जीवन और परिवार की सुख.शांति और सभी कष्टों को दूर करने की कामना करते हैं

सूर्य देवता को अर्घ्य देने की विधि
.छठ पूजा में व्रती यदि ही विधि और श्रद्धा भाव से उगते सूरज को अर्घ्य दें तो छठी माता प्रसन्न होकर उनकी पूजा को स्वीकार कर लेती हैंण् सदा अपनी कृपा बनाए रखती हैं

.सूर्य पूजा के समय महिलाएं सूती साड़ी पहनें वहीं पुरुष धोती पहन सकते हैं

.साफ.सफाई शुद्धता का ख्याल अवश्य रखें मान्यताओं के अनुसारए तांबे के कलश से अर्ध्य देना शुभ होता है

अर्घ्य देते समय सूर्य देवता को सीधे न देखें बल्कि कलश से गिरते हुए जल की धारा को देखकर भगवान सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए नियमित रूप से जल अर्पित करने से सूर्य दोष भी दूर होगा

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पूजा की सामग्री के साथ व्रती नदी तालाब किनारे पहुंचते हैंण् सूप में सभी पूजा की सामग्री रखी होती है पानी में खड़े होकर सूप और जल से भरा कलश लेकर उगते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है

.हाथों को ऊपर करके पूजा की सामग्री को सूरज भगवान छठी मैया को अर्पित किया जाता हैण् मंत्र जाप करके जल से अर्घ्य दिया जाता है इसके बाद सूर्य भगवान को नमस्कार करें पानी में खड़े होकर ही 5 बार परिक्रमा करें इसके बाद अपनी इच्छाओं की पूर्ति की प्रार्थना करें

हर साल कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पर्व मनाया जाता है। नहाय खाय के साथ इस पर्व की शुरूआत हो चुकी है। ये पर्व चार दिन तक चलता है। इस बार छठ पूजा की शुरुआत 17 नवंबर से चार दिनों तक चलने वाले इस त्यौहार के बारे में जाने सब कुछ

पहला दिन. नहाय खाय

छठ पूजा पर्व की शुरुआत नहाय खाय के साथ होती है। इस दिन सूर्योदय 06ण्45 बजे होगा। वहींए सूर्यास्त शाम 05ण्27 बजे होगा। नहाय.खाय में व्रती सहित परिवार के सभी सदस्य चावल के साथ कद्दू की सब्जीए चने की दाल मूली आदि ग्रहण करते हैं।

दूसरा दिन. खरना

18 नवंबर को खरना है। इस दिन का सूर्योदय सुबह 06ण्46 बजे और सूर्यास्त शाम 05ण्26 बजे होगा। इस दिन गुड़ और खीर का प्रसाद बनाकर ग्रहण करते हैं। इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद व्रती 36 घंटे निर्जला उपवास पर चली जाती हैं। इस प्रसाद को बनाने में मिट्टी के चूल्हे और आम की लकड़ी का प्रयोग किया जाता है।

तीसरा दिन. अर्घ्य

19 नवंबर को डूबते सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है जिसे संध्या अर्घ्य भी कहते हैं। 19 नवंबर को सूर्यास्त शाम 05ण्26 बजे होगा। छठ पूजा का तीसरा दिन बहुत खास होता है। इस दिन टोकरी में फलोंए ठेकुआए चावल के लड्डू आदि अर्घ्य के सूप को सजाया जाता है। इसके बाद नदी या तालाब में कमर तक पानी में रहकर अर्घ्य दिया जाता है।

चौथा दिन. अर्घ्य

चौथे दिन यानी 20 नवंबर को उगते सूर्य को अर्ध्य दिया जाता हैं। ये अर्घ्य लगभग 36 घंटे बाद दिया जाता हैं।