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पशुपालक अपने पशुओं का दूध निकाल सड़क पर छोड़ बना रहे है लावारिश निरंतर हो रही है दुर्घटनाएं

पशुपालक अपने पशुओं का दूध निकाल सड़क पर छोड़ बना रहे है लावारिश निरंतर हो रही है दुर्घटनाएं

पशुपालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान -अधिवक्ता बलराम शर्मा

गोपाल सिंह विद्रोही//प्रदेश खबर प्रमुख छत्तीसगढ़//बिश्रामपुर – लावारिस पशुओं के लिए चारागाह बना राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग एवं सकीर्ण मार्ग में जमावड़ा से राहगीर एवं वाहन चालकों के लिए काल साबित हो रही है ,आए दिन सड़क दुर्घटनाओं से कई घरों के चिराग बुझ रहे हैं परंतु इस ओर पशुपालकों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न होने से उनके मनोबल बढ़ाते जा रहे हैं जबकि कई घरों का चिराग उजड़ते जा रहे ।

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जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग 43 में जगह-जगह मवेशियों का अड्डा बना हुआ है, कई जगहों पर नियमित अड़ा बना हुआ है जिस कारण इस मार्ग से बमुश्किल से लोग अपने वाहनों को निकाल कर अपने गंतव्य तक पहुंचाते हैं ,तो वहीं आने जाने वाले राहगीर पशुओं की चपेट में आकर गंभीर रूप से चोटिल होकर मौत के आगोश में समा जा रहे हैं परंतु पशु पलकों की आंखें नहीं खुल रही है, वे अपने पशुओं को दूध निकाल कर एवं दूध न देने वाली मवेसियो को भी सड़कों पर छोड़ देते हैं जिससे आए दिन बड़ी दुर्घटनाएं होती रहती है। लोगों ने पशुओं को लावारिस छोड़ने वाले पशु फलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग लम्बे समय से करते आ रहे है परंतु कार्यवाही धरातल पर शून्य दिख रहा है। यहां बताना आवश्यक है कि पशुपालकों द्वारा पशुओं को लावरीस छोड़ देने से कोयलॉअंचल के कई दर्जन लोग अपनी जान गवां चुके हैं तो वही पशु कई किसानों की लहलहाती खेतों एवम बाड़ी को उजड़ चुके हैं जिससे पशुपालकों एवं किसानों के बीच आए दिन विवाद की स्थिति बनी रहती है ,यहां तक की लोग विभिन्न पुलिस थानों में शिकायत कर न्यायालय का चाकर काट रहे हैं परंतु पशुपालकों द्वारा पशुओं को बांधने या उनके पीछे जाकर चराने की आवश्यकता महसूस नहीं होती है ।
*लावारिस पशु तस्करों के लिए बने हैं बने है वरदान*
पशु पालकों द्वारा अपने मवेशियों को दूध निकालकर या दूध न देने वाली गायों को लावारिस छोड़ देते हैं जिन पर पशु तस्करों की पैनी नजर रहती है। क्षेत्र से लावारिस छोड़े हुए पशुओं की तस्करी होना आम सी बात हो गई है। पशु तस्कर इन मवेशियों को वाहनों में ठूस ठूस कर बूचड़खाने में ले जाने का कार्य लंबे समय से करते आ रहे है । हिंदू संगठनों एवं ग्रामीणों के द्वारा पशु तस्करों को पकड़ने का भी घटनाएं सामने आती रहती है, परंतु इनके खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं हो पाती है। कुछ सप्ताह के बाद पुलिस गिरफ्त में आए पशु तस्कर पशुओं की खरीदी का प्रमाण पत्र लेकर न्यायालय से जप्त पशुओं को छुड़ाने में कामयाब हो जाते हैं।अपने पशुओं से बेखबर पशु मालिकों का एक सप्ताह एवम महीना दिन पशु जब घर नहीं पहुंचते हैं तब वह खोजबीन करने निकलते हैं तब तक पशु उनकी हाथो से निकल जाते हैं और वे हाथ मलते रह जाते हैं।

पशुपालकों के खिलाफ हो सकती है कड़ी कार्रवाई- अधिवक्ता बलराम शर्मा

कानून के मुताबिक सड़क पर मवेशियों को छोड़ने वाले पालकों के खिलाफ जेल एवं जुर्माना दोनों साथ-साथ हो सकता है ।इस संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता बलराम शर्मा ने बताया कि सड़क पर मवेशियों को छोड़ने वाले पालकों के खिलाफ पशु अत्याचार अधिनियम 1871 की धारा 11 पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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