पंजाब कांग्रेस में पिछले 5 दिनों तक चले सियासी घटनाक्रम का सबसे बड़ा नतीजा न तो राजा वड़िंग की जीत है और न ही चरणजीत सिंह चन्नी की हार। असली बदलाव यह है कि पार्टी के भीतर फैसलों का केंद्र पहले से ज्यादा दिल्ली हो गया है।
चन्नी खेमे ने प्रदेश अध्यक्ष बदलने की मांग रखी, वड़िंग अपने पद पर कायम रहे, लेकिन अंतिम फैसला किसी गुट ने नहीं, बल्कि हाईकमान ने लिया। पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने दोनों पक्षों की बातें सुनकर साफ कर दिया कि सभी नेताओं की राय दिल्ली तक जाएगी और टिकट जीतने की क्षमता के आधार पर तय होंगे।
साथ ही यह भी साफ हो गया कि पंजाब कांग्रेस के नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं होगा। राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो इस पूरे घटनाक्रम ने हाईकमान की भूमिका और मजबूत कर दी है। जबकि, पंजाब के नेताओं की अगली राजनीतिक लड़ाई अब दिल्ली में प्रभाव बनाने की होगी।















